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Friday, 3 July 2026

The Third Heaven Explained | God's Throne, Heavenly Worship & the Glory of Heaven Part 2

 The Third Heaven – God's Throne, the Glory of Heaven, the Presence of God, Heavenly Worship, and the Eternal Kingdom of Jesus Christ (Part 2)


In Part 1, we learned that the Bible speaks of three heavens. The first heaven is the sky above the earth where birds fly and clouds move. The second heaven is the vast universe containing the sun, moon, stars, and galaxies. The Third Heaven is completely different. It is not simply another part of creation but the glorious dwelling place of Almighty God.

The Third Heaven is the highest heaven revealed in Scripture. It is where God's throne is established, where the Lord Jesus Christ is seated at the right hand of the Father, where countless holy angels worship day and night, and where believers will one day live forever in the presence of God. It is a place of perfect holiness, everlasting peace, endless joy, righteousness, and eternal glory.

Throughout the Bible, Heaven is presented as the center of God's kingdom and the place from which He rules over all creation. Every description of Heaven reveals God's greatness, holiness, majesty, wisdom, power, and everlasting love. While many people imagine Heaven according to traditions or personal opinions, Christians must understand Heaven only through the inspired Word of God.

As we continue this biblical study, we will discover what Scripture teaches about God's throne, His heavenly kingdom, His glorious presence, and the worship that continually takes place before Him.

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The Third Heaven Is God's Dwelling Place

The Bible repeatedly describes Heaven as the dwelling place of God. Although God is everywhere because He is omnipresent, the Third Heaven is the place where His glory is revealed in its fullest measure.

From Heaven, God reigns over the universe, hears the prayers of His people, accomplishes His perfect will, and rules with righteousness and justice. Heaven is not limited by time or space as we understand them on earth. It is the holy dwelling place of the Eternal King.

Deuteronomy 26:15

"Look down from heaven, Your holy dwelling place, and bless Your people Israel..."

This verse reminds us that Heaven is holy because God Himself is holy. His presence makes Heaven glorious beyond human imagination.

The holiness of Heaven teaches us that nothing sinful can remain before God. Everything in Heaven reflects His perfect character, purity, righteousness, truth, and everlasting light.

Throughout Scripture, believers lift their eyes toward Heaven because it is the place where God's authority, mercy, grace, and blessing flow from His throne.

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Heaven Is God's Throne

One of the greatest truths revealed in the Bible is that Heaven is God's throne.

A throne represents authority, kingship, justice, sovereignty, and absolute power. The Bible declares that God's throne is established forever and that His kingdom has no end.

Isaiah 66:1

"Heaven is My throne, and the earth is My footstool."

These words remind us that the Creator rules over everything He has made. Every nation, every ruler, every angel, every human being, and every created thing exists under His authority.

No earthly kingdom can compare with God's eternal kingdom. Human kingdoms rise and fall, but God's kingdom stands forever.

Psalm 103:19

"The Lord has established His throne in heaven, and His kingdom rules over all."

This verse reveals the complete sovereignty of God. Nothing happens outside His knowledge, wisdom, or permission. His throne is never shaken, His rule never ends, and His purposes never fail.

For believers, this truth brings great comfort. Even when the world seems uncertain, God remains on His throne, faithfully governing His creation according to His perfect plan.

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The Throne of God

The Book of Revelation gives us the clearest description of God's heavenly throne.

The Apostle John was taken in the Spirit and saw the glory of Heaven. His vision reminds us that God's majesty is beyond human understanding.

Revelation 4:2–3

*"At once I was in the Spirit, and there before me was a throne in heaven with someone sitting on it. And the One who sat there had the appearance




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Wednesday, 24 June 2026

What is healing? The wondrous work of God's healing power चंगाई क्या है? परमेश्वर की चंगाई शक्ति का अद्भुत कार्य

 चंगाई क्या है? परमेश्वर की चंगाई शक्ति का अद्भुत कार्य


परिचय

चंगाई (Healing) परमेश्वर की महान आशीषों में से एक है। बाइबल हमें बताती है कि परमेश्वर केवल हमारे आत्मिक जीवन की ही नहीं, बल्कि हमारे शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक जीवन की भी चिंता करता है। जब कोई व्यक्ति बीमारी, दर्द, निराशा या कमजोरी से गुजरता है, तब परमेश्वर अपनी दया और सामर्थ्य के द्वारा उसे चंगा कर सकता है।

आज भी बहुत से लोग गवाही देते हैं कि प्रभु यीशु मसीह ने उन्हें विभिन्न प्रकार की बीमारियों, दुखों और समस्याओं से छुटकारा दिया है। चंगाई केवल शरीर की बीमारी दूर होना नहीं है, बल्कि मन, आत्मा और जीवन के हर क्षेत्र में परमेश्वर की बहाली (Restoration) है।


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चंगाई का स्रोत कौन है?

बाइबल में परमेश्वर स्वयं को चंगाई देने वाला परमेश्वर कहता है।

> "मैं यहोवा हूँ, जो तुझे चंगा करता हूँ।" — निर्गमन 15:26



इस वचन से स्पष्ट है कि सच्ची चंगाई का स्रोत परमेश्वर है। डॉक्टर, दवाइयाँ और चिकित्सा व्यवस्था परमेश्वर के द्वारा दिए गए साधन हैं, लेकिन अंतिम चंगाई देने वाला परमेश्वर ही है।

जब हम विश्वास के साथ परमेश्वर के पास आते हैं, तब वह हमारी प्रार्थनाओं को सुनता है और अपनी इच्छा के अनुसार कार्य करता है।


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यीशु मसीह और चंगाई

जब यीशु पृथ्वी पर थे, तब उन्होंने हजारों लोगों को चंगा किया।

उन्होंने:

अंधों को दृष्टि दी

लंगड़ों को चलाया

कोढ़ियों को शुद्ध किया

बहरे लोगों को सुनने की शक्ति दी

गूंगों को बोलने योग्य बनाया

दुष्टात्माओं से पीड़ित लोगों को स्वतंत्र किया


बाइबल बताती है:

> "वह सब प्रकार की बीमारी और सब प्रकार की दुर्बलता को दूर करता था।" — मत्ती 4:23



जहाँ-जहाँ यीशु गए, वहाँ लोगों ने चंगाई प्राप्त की। उनकी करुणा और प्रेम ने अनगिनत लोगों के जीवन बदल दिए।


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चंगाई के विभिन्न प्रकार

1. शारीरिक चंगाई

जब परमेश्वर किसी व्यक्ति को शारीरिक बीमारी से स्वस्थ करता है, उसे शारीरिक चंगाई कहते हैं।

उदाहरण:

बुखार

कैंसर

गठिया

त्वचा रोग

हृदय रोग

कमजोरी


परमेश्वर के लिए कोई भी बीमारी बड़ी नहीं है।


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2. मानसिक चंगाई

आज बहुत से लोग तनाव, चिंता, भय और अवसाद से जूझ रहे हैं।

परमेश्वर मन की शांति देता है।

> "मैं तुम्हें अपनी शांति दिए जाता हूँ।" — यूहन्ना 14:27



जब हम प्रभु के पास आते हैं, तब वह हमारे टूटे हुए मन को चंगा करता है।


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3. भावनात्मक चंगाई

कई लोग:

विश्वासघात

असफलता

पारिवारिक समस्याएँ

रिश्तों के टूटने


के कारण अंदर से टूट जाते हैं।

परमेश्वर ऐसे लोगों को नया साहस और नई आशा देता है।

> "वह खेदित मन वालों को चंगा करता है।" — भजन संहिता 147:3




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4. आत्मिक चंगाई

सबसे बड़ी चंगाई आत्मिक चंगाई है।

पाप मनुष्य को परमेश्वर से दूर कर देता है।

यीशु मसीह ने क्रूस पर मरकर हमारे पापों का दण्ड अपने ऊपर लिया ताकि हम परमेश्वर के साथ मेल-मिलाप प्राप्त कर सकें।

जब कोई व्यक्ति यीशु को अपना उद्धारकर्ता स्वीकार करता है, तब वह आत्मिक रूप से नया जीवन प्राप्त करता है।


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विश्वास और चंगाई

यीशु ने कई बार लोगों से कहा:

> "तेरे विश्वास ने तुझे चंगा किया।"



विश्वास चंगाई प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

विश्वास का अर्थ है:

परमेश्वर पर भरोसा करना

उसकी प्रतिज्ञाओं पर विश्वास करना

परिस्थितियों से अधिक परमेश्वर की सामर्थ्य को देखना


विश्वास हमें निराशा से निकालकर आशा की ओर ले जाता है।


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प्रार्थना और चंगाई

प्रार्थना परमेश्वर से संवाद करने का माध्यम है।

जब हम विश्वास के साथ प्रार्थना करते हैं, तब परमेश्वर कार्य करता है।

> "विश्वास की प्रार्थना रोगी को बचाएगी।" — याकूब 5:15



प्रार्थना के समय हमें:

विश्वास रखना चाहिए

धन्यवाद देना चाहिए

धैर्य रखना चाहिए

परमेश्वर की इच्छा पर भरोसा करना चाहिए



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क्या परमेश्वर आज भी चंगाई देता है?

हाँ, परमेश्वर आज भी वही है।

> "यीशु मसीह कल और आज और युगानुयुग एक सा है।" — इब्रानियों 13:8



जिस परमेश्वर ने बाइबल के समय में लोगों को चंगा किया, वही परमेश्वर आज भी जीवित है और कार्य कर रहा है।

दुनिया भर में लाखों लोग आज भी चंगाई की गवाही देते हैं।


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चंगाई प्राप्त करने के लिए क्या करें?

1. परमेश्वर पर विश्वास करें

अपने संपूर्ण हृदय से परमेश्वर पर भरोसा रखें।

2. नियमित प्रार्थना करें

प्रतिदिन प्रार्थना में समय बिताएँ।

3. परमेश्वर के वचन को पढ़ें

बाइबल विश्वास को बढ़ाती है।

> "विश्वास सुनने से और सुनना मसीह के वचन से होता है।" — रोमियों 10:17



4. धन्यवाद देना सीखें

परिस्थितियाँ कैसी भी हों, परमेश्वर का धन्यवाद करें।

5. धैर्य रखें

कभी-कभी चंगाई तुरंत मिलती है और कभी समय के साथ मिलती है।


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चंगाई के लिए शक्तिशाली प्रार्थना

हे स्वर्गीय पिता,

मैं प्रभु यीशु मसीह के नाम में आपके सामने आता हूँ। मैं विश्वास करता हूँ कि आप चंगाई देने वाले परमेश्वर हैं। मेरे शरीर, मन और आत्मा को स्पर्श करें। हर बीमारी, दर्द, कमजोरी और चिंता को दूर करें। मुझे नई शक्ति, नया स्वास्थ्य और नई आशा प्रदान करें।

प्रभु, आपका वचन कहता है कि आप टूटे हुए मन को चंगा करते हैं। मेरे जीवन में अपनी शांति और आनंद भर दें। मैं आपकी दया और प्रेम के लिए धन्यवाद देता हूँ।

यीशु मसीह के नाम में प्रार्थना करता हूँ।

आमीन।


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निष्कर्ष

चंगाई परमेश्वर का अद्भुत उपहार है। वह हमारे शरीर, मन और आत्मा की चिंता करता है। चाहे बीमारी कितनी भी बड़ी क्यों न हो, परमेश्वर की सामर्थ्य उससे कहीं अधिक बड़ी है। जब हम विश्वास, प्रार्थना और परमेश्वर के वचन के साथ उसके पास आते हैं, तब वह हमारे जीवन में आश्चर्यजनक कार्य कर सकता है।

याद रखें:

> "मैं यहोवा हूँ, जो तुझे चंगा करता हूँ।" (निर्गमन 15:26)



परमेश्वर आज भी चंगाई देता है, आशा देता है और जीवन को नया बनाता है।



 चंगाई क्या है? | परमेश्वर की चंगाई शक्ति और बाइबल की शिक्षाएँ

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Thursday, 3 July 2025

एक लड़का और एक विशालकाय – विश्वास की कहानी -David and Goliath: A Boy and a Giant Faith Story

एक लड़का और एक विशालकाय – विश्वास की जीत

David and Goliath Faith Story in Hindi

यह कहानी बताती है कि एक साधारण लड़का दाऊद, अपने विश्वास और परमेश्वर की शक्ति से कैसे एक विशाल योद्धा गोलियत को हराता है। यह एक प्रेरणादायक बाइबिल कथा है जो हमें सिखाती है कि जब विश्वास होता है, तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।


⚔️ पृष्ठभूमि

बहुत समय पहले की बात है, जब इस्राएल और पलिश्तियों के बीच युद्ध छिड़ा हुआ था। पलिश्ती सेना की ओर से एक विशालकाय योद्धा मैदान में उतरता था – उसका नाम था गोलियत। उसकी ऊँचाई लगभग नौ फुट थी। वह सिर से पाँव तक लोहे के कवच से ढका हुआ था और हाथ में भयानक भाला लिए हुए गर्जना करता था।

“अगर कोई मर्द है, तो मेरे खिलाफ आकर लड़े! अगर वह मुझे हरा दे, तो हम तुम्हारे दास होंगे! लेकिन अगर मैं जीत गया, तो तुम हमारे दास बनोगे!”

इस ललकार से इस्राएल की सेना काँप उठती थी। राजा शाऊल समेत कोई भी योद्धा साहस नहीं कर पाया।


🌿 छोटा चरवाहा लेकिन बड़ा विश्वास

उसी समय एक युवक था – दाऊद, जो अपने पिता की भेड़ें चराता था। वह अपने भाइयों के लिए खाना लेकर युद्ध क्षेत्र में आया था। जब उसने गोलियत की ललकार सुनी, तो उसका हृदय परमेश्वर के प्रति जल उठा।

“यह खतना रहित पलिश्ती कौन है जो जीवते परमेश्वर की सेना का अपमान कर रहा है?” – दाऊद ने कहा।

सबने उसका मज़ाक उड़ाया। उसके भाई बोले, “तू यहाँ लड़ाई देखने आया है!” पर दाऊद ने कहा, “जिसने मुझे शेर और भालू से बचाया, वही मुझे इस पलिश्ती से भी बचाएगा।”


👑 राजा के सामने दाऊद

राजा शाऊल के सामने दाऊद को लाया गया। राजा ने कहा, “तू एक बच्चा है, और वह युद्ध का योद्धा है।” पर दाऊद ने उत्तर दिया:

“जब मैं भेड़ें चराता था और कोई शेर या भालू आता, तो मैं उसे मारता था। वही परमेश्वर अब मुझे शक्ति देगा।”

राजा ने उसे अपनी तलवार और कवच पहनने को दिया, पर दाऊद ने उन्हें उतार दिया और कहा: “मुझे इनकी आदत नहीं है।”


🪨 पाँच पत्थर और एक गुलेल

दाऊद ने एक नदी से पाँच चिकने पत्थर उठाए, और अपनी गुलेल के साथ युद्ध क्षेत्र में चला गया।

गोलियत हँसने लगा: “क्या मैं कुत्ता हूँ, कि तू लाठी लेकर आया है?” पर दाऊद ने उत्तर दिया: “तू तलवार और भाले से आता है, लेकिन मैं सेनाओं के यहोवा के नाम से आता हूँ – वही परमेश्वर जिसे तू ने अपमानित किया है।”


⚡ विश्वास की जीत

दाऊद ने अपनी गुलेल में एक पत्थर रखा और दौड़ते हुए गोलियत पर छोड़ा। पत्थर सीधे उसके माथे पर लगा और वह जमीन पर गिर पड़ा। दाऊद ने दौड़कर उसकी तलवार ली और उसका सिर काट दिया। पूरी पलिश्ती सेना डरकर भाग गई।


🌈 कहानी से क्या सीख मिलती है?

  • परमेश्वर की शक्ति में विश्वास रखना – दाऊद कमजोर दिखता था, पर उसका विश्वास शक्तिशाली था।
  • मत देखो कि तुम्हारे पास क्या नहीं है, देखो कि तुम्हारे साथ कौन है – दाऊद के पास न तलवार थी, न कवच, पर परमेश्वर था।
  • जब दुनिया कहे ‘तू नहीं कर सकता’, तो परमेश्वर कहता है ‘मैं तुझ से करूंगा’

📖 बाइबल वचन

“क्योंकि यहोवा की दृष्टि मनुष्य की सी नहीं होती, मनुष्य तो मुखाकृति पर दृष्टि करता है, परन्तु यहोवा हृदय पर दृष्टि करता है।”
– 1 शमूएल 16:7


✝️ निष्कर्ष

दाऊद की कहानी हमें यह सिखाती है कि जीवन में चाहे कितनी भी बड़ी चुनौती क्यों न हो, अगर हम परमेश्वर पर भरोसा करें, तो हम विजयी होंगे। परमेश्वर बच्चों को, कमजोरों को, और अनदेखे लोगों को भी बड़े कामों के लिए चुनता है।

तुम भी दाऊद बन सकते हो – अगर तुममें विश्वास है!


David and Goliath – A Boy and a Giant

A Powerful Bible Story of Faith and Victory

This inspiring Bible story shows how a young shepherd boy named David, full of faith and trust in God, defeated a mighty warrior named Goliath. It teaches us that with faith, no obstacle is too big to overcome.


⚔️ The Background

Long ago, a battle was raging between the Israelites and the Philistines. From the Philistine side, a giant warrior came forward every day to challenge Israel’s army. His name was Goliath, a man over nine feet tall, covered head to toe in armor, holding a massive spear.

“Choose a man to fight me! If he defeats me, we will be your servants. But if I win, you will serve us!” – Goliath

The soldiers of Israel, including King Saul, were terrified. No one dared to face Goliath.


🌿 A Shepherd Boy with Great Faith

At that time, there was a young shepherd boy named David. He was not a soldier, but he loved God deeply. He came to the battlefield to deliver food to his older brothers and heard Goliath’s challenge.

“Who is this uncircumcised Philistine that he should defy the armies of the living God?” – David

Everyone mocked him. Even his brothers said he came just to watch the fight. But David replied:

“The Lord who saved me from the lion and the bear will also save me from this Philistine.”


👑 David Before the King

David was brought before King Saul. The king said, “You’re just a boy. He’s a trained warrior!” But David said:

“When a lion or bear came to attack my sheep, I struck it down. God helped me then. He will help me now.”

King Saul gave David his own armor and sword, but David took them off and said:

“I cannot go in these. I am not used to them.”


🪨 Five Stones and a Sling

David went to a nearby stream and picked up five smooth stones. With only a sling in his hand, he approached Goliath.

Goliath laughed: “Am I a dog that you come at me with sticks?” David answered: “You come to me with sword and spear, but I come to you in the name of the Lord of Hosts—the God of Israel, whom you have defied.”


⚡ Victory by Faith

David ran toward the giant, took one stone, placed it in his sling, and hurled it with all his strength. The stone struck Goliath on the forehead. The giant fell face down to the ground.

David ran, took Goliath’s own sword, and cut off his head. The Philistines were terrified and fled in fear.


🌈 What We Learn from This Story

  • Faith in God gives us true strength – David had no sword or armor, but he had the Lord.
  • Don't focus on what you lack—focus on Who is with you – God turns the weak into warriors.
  • When the world says “You can't,” God says “Through Me, you will.”

📖 Bible Verse

“The Lord does not look at the things people look at. People look at the outward appearance, but the Lord looks at the heart.”
– 1 Samuel 16:7


✝️ Conclusion

The story of David and Goliath is not just a tale of bravery—it's a testimony of faith. It reminds us that God can use even the smallest person for the greatest victory.

You too can be like David—if you have faith in the Living God!


Wednesday, 7 May 2025

धर्मी की परीक्षा: अच्छाई के बावजूद दुःख क्यों? Dharmee Kee Pareeksha: Achchhaee ke Baavajood Duhkh kyon?

                           धर्मी की परीक्षा: अच्छाई के बावजूद दुःख क्यों?

 धर्मी की परीक्षा: अच्छाई के बावजूद दुःख क्यों -क्या आपने कभी सोचा है कि जब हम भलाई करते हैं फिर भी हमारे जीवन में दुःख कठिनाई और अन्याय क्यों आता है?बाइबल में यह प्रश्न कई बार उठाया गया है। परमेश्वर के वचन में यह स्पष्ट है कि धर्मी व्यक्ति भी परीक्षाओं से नहीं बचता बल्कि वह उन परीक्षाओं के माध्यम से और अधिक मजबूत और सिद्ध बनता है

Dharmee Kee Pareeksha: Achchhaee ke Baavajood Duhkh kyon?


 धर्मी की परीक्षा: अच्छाई के बावजूद दुःख क्यों? 1. धर्मी भी क्यों पीड़ित होते हैं? भजन संहिता 34:19 — धर्मी बहुत क्लेश में होता है, परन्तु यहोवा उसको उन सब से छुड़ाता है।  इस वचन में स्पष्ट है कि धर्मी व्यक्ति क्लेशों से गुजरता है। यह इसलिए नहीं कि परमेश्वर उसे छोड़ देता है, बल्कि इसलिए कि वह उसे शुद्ध और सिद्ध बनाना चाहता है।
व्याख्या: दुनिया का न्याय व्यवस्था और परमेश्वर की योजना अलग होती है। परमेश्वर अपने बच्चों को कष्टों से नहीं बचाता, बल्कि उन कष्टों में उनके साथ चलता है और उन्हें निकालता है।

 धर्मी की परीक्षा: अच्छाई के बावजूद दुःख क्यों? 2. अय्यूब का जीवन: एक जीवित उदाहरण अय्यूब 1:1 - उत्स देश में अय्यूब नाम का एक पुरुष रहता था वह निष्कलंक और सीधा था और परमेश्वर का भय मानता और बुराई से दूर रहता था अय्यूब ने कभी किसी का बुरा नहीं किया, फिर भी उसके जीवन में ऐसी परीक्षा आई कि उसने सब कुछ खो दिया – संतानें धन स्वास्थ्य

व्याख्या: परमेश्वर ने शैतान को यह सिद्ध करने दिया कि सच्चे विश्वासियों की परीक्षा उन्हें गिराने के लिए नहीं बल्कि उन्हें और अधिक गहरा और विश्वसनीय बनाने के लिए होती है।

धर्मी की परीक्षा: अच्छाई के बावजूद दुःख क्यों?  3. यीशु मसीह का जीवन: परम उदाहरण 1 पतरस 2:22-23 - उसने न कोई पाप किया और न उसके मुंह से कोई छल की बात निकली जब उस पर निन्दा की गई तो उस ने उत्तर में निन्दा नहीं की जब वह दुःख उठा रहा था, तो धमकी नहीं दी  यीशु ने पूर्णतः भलाई की फिर भी क्रूस पर चढ़ाया गया।

व्याख्या: यीशु मसीह ने हमें यह रास्ता दिखाया कि सच्ची भलाई करने वालों को इस संसार से बदले में प्रशंसा नहीं, बल्कि विरोध भी मिल सकता है। लेकिन अंततः उन्हें परमेश्वर से महिमा मिलती है।

 धर्मी की परीक्षा: अच्छाई के बावजूद दुःख क्यों? 4. भलाई का फल देर से मिलता है पर मिलता अवश्य है गलातियों 6:9 - हम भलाई करते करते थकें नहीं क्योंकि यदि हम ढीले न हों तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे 

व्याख्या: जब हम अच्छाई करते हैं और तुरंत परिणाम नहीं देखते तब हमें धैर्य रखना चाहिए। परमेश्वर का समय हमारे समय से अलग है लेकिन वह न्यायी है

 धर्मी की परीक्षा: अच्छाई के बावजूद दुःख क्यों? 5. धर्मियों के आँसू गिनता है परमेश्वर भजन संहिता 56:8 - तू ने मेरे मारे फिरने का हिसाब रखा है मेरे आँसू अपनी कुप्पी में रख दे क्या वे तेरी पुस्तक में नहीं हैं?

व्याख्या: परमेश्वर आपके हर दुःख, हर आँसू, हर अन्याय को गिन रहा है। वह किसी भी भलाई को व्यर्थ नहीं जाने देता। वह न्याय करेगा – अपने समय पर, अपने ढंग से।


निष्कर्ष -  धर्मी की परीक्षा: अच्छाई के बावजूद दुःख क्यों?  धर्मी की परीक्षा उसका विनाश नहीं उसकी परिपक्वता लाती है
यदि आप अच्छाई के बदले बुराई का सामना कर रहे हैं तो याद रखें - आप अकेले नहीं हैं। परमेश्वर आपके साथ है और वह हर परीक्षा को आपके लिए आशीष में बदल सकता है

Prayer Vachan Hindi
हे प्रभु जब मैं भलाई के बाद भी दुःख झेलूं तो मुझे हिम्मत देना तू मेरे आँसू गिनता है तू मेरी लड़ाई लड़ता है मुझे विश्वास दे कि तू मेरी परीक्षा को मेरी गवाही बना देगा। आमीन

Monday, 1 April 2024

believers and faith vishvaasee aur vishvaas


साधारण शब्दों में प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास करने वाला विश्वासी है। विश्वास क्या है - विश्वास मनुष्य के मन,बुद्धि और शरीर की वह प्रक्रिया है, जिनमें मनुष्य अपने आप को किसी वस्तु व स्थिति में सीमित कर दे और यह निश्चय रखे कि केवल यही है जिसके द्वारा( मेरा) हर एक कार्य हो सकता है तथा यह आशा रखे कि मेरा कार्य हो जाएगा। इस प्रक्रिया में ऐसा होता है कि वह जिन बातों को नहीं जानता कि वे हैं या हो जाएँगी उसे क्रिया रुप में कहना और देखना प्रारंभ करता हैं। 





जब एक व्यक्ति जिसे यीशु मसीह की गवाही तथा सुसमाचार सुनाया जाता है तो यह सुनकर उसकी बातों पर विश्वास करता है। यह उसी प्रकार हैं जिस प्रकार एक सूबेदार जिसका सेवक बीमार था और उसने आकर यीशु से कहा - मेरा सेवक लकवे का मारा हुआ घर में पड़ा है और बहुत तकलीफ में है तब यीशु ने उससे कहा - मैं आकर उसे चंगा करूंगा। सूबेदार ने जवाब में कहा - हे प्रभु मैं इस लायक नहीं कि तू मेरी छत के नीचे आए परंतु केवल मुख ही से कही दे तो मेरा सेवक चंगा हो जाएगा। ( मतती 8:6-8)

यह सूबेदार का ऐसा बड़ा विश्वास था जिसमें आशा और निश्चय की बहुतायत थी जिसके चलते प्रभु यीशु मसीह द्वारा वहीं से कहा गया और सूबेदार का सेवक चंगा हो गया। 

सूबेदार ने यीशु मसीह के बारे में एक  आशा जागृत किया और उसे निश्चय हुआ कि मेरे द्वारा यीशु से कहे जाने पर वह उसे चंगा करेगा। 

यह विश्वास हैं बगैर देखे विश्वास करना अर्थात सुनकर विश्वास करना। 

(2) दूसरा विश्वास हैं देखकर विश्वास करना। 

प्रभु यीशु मसीह के बारह चेले थे जिसमें से एक था थोमा। उसे जब  शेष 10 चेलो ने ( एक चेला यहूदा फांसी लगाकर मर गया था) बताया कि यीशु मसीह मुर्दो में जी उठा है तब थोमा ने कहा जब तक मैं उसके हाथों के छेद में ऊँगली और उसकी पसली में हाथ डालकर ना देख लूँ 
तब तक विश्वास ना करूंगा। थोमा अविश्वास में था कि यीशु मसीह मुर्दो में जी उठा है लेकिन हमारे प्रभु ने उसे दर्शन दिया और अविश्वास से विश्वास में लाया। तब उसने यीशु को अपना प्रभु और परमेश्वर स्वीकार किया। 

यह विश्वास हैं देखकर करना। आज भी हजारों लोग हैं जो अपने जीवन में यीशु के द्वारा दिए गए आश्चर्य कर्मो को नहीं लेते उसकी उपस्थिति को महसूस नहीं कर लेते तब तक वे उस पर विश्वास नहीं करते। 

विश्वासी कौन हैं? 

विश्वासी वह व्यक्ति हैं-

(1) जो मन से यह विश्वास करे कि परमेश्वर ने उसे यीशु को मरे हुओ में जिलाया हैं। ( रोमियो 10:9)

(2) और यीशु को अपना प्रभु जानकर अंगीकार ( कहें ) करें। ( रोमियो 10:9 )

( 3) अपना मन फिराकर परमेश्वर के पास आए ( मतती 3:2 )

यहाँ पर निम्न प्रकार की बातें हैं -



(1) लिखा है ( मन से यह विश्वास करें कि) परमेश्वर ने उसे मरों हुओ में जिलाया हैं। निश्चय, विश्वास के लिए प्रथम जरूरी बात है जब एक व्यक्ति को निश्चय हो जाता है कि यीशु मसीह को परमेश्वर ने मुर्दो में से जीवित कर दिया है। उस मनुष्य के मन में दूसरी आशा उतपन होती हैं। निश्चय के द्वारा वह व्यक्ति यह जान पाता है यीशु का लहू मुझे सब पापो से शुद्ध करता है वह मेरे लिए मारा गया है कि मैं जीवन पाऊँ और यीशु मेरे लिए जी उठा कि मैं हमेशा जिंदगी पाऊँ। 


(2) जब इस निश्चय के द्वारा वह व्यक्ति अपने मुँह से अंगीकार करता है कि परमेश्वर ही मेरा प्रभु और स्वामी है तब एक सेवक की आशा अपने स्वामी से प्रारंभ हो जाती है और मुँह से किया गया यह अंगीकार कि यीशु ही मेरा प्रभु है उसके जीवन में एक और आशा उतपन करता है कि यीशु जो शरीर स्वर्ग पर उठा लिया गया वह मुझे अपने साथ पिता के पास ले जाने आएगा जब वो आएगा तब मैं चाहें दफन ( गाड़ा) किया जाऊँ, चाहे जीवित होऊँ उठा लिया जाऊँगा और अविनाशी देह को धारण करूँगा। 

(3) जब जक्ई नाम महसूल ( कर)  लेने वाले व्यक्ति के घर यीशु मसीह गये तब एक बहुत बड़ा परिर्वतन जक्ई के जीवन में दिखाई दिया। वह धन जो उसने बहुत लोगों से जबरदस्ती करके लिया था, तथा पाप के द्वारा जमा किया गया था। बड़ा आश्चर्य। उसने वह धन जिस जिस से लिया था उनको चार गुना वापस किया जक्ई के मन में यीशु के आने से पापों के प्रति पश्चात उतपन हुआ और उसने अपने गुनाहो को तो मान ही लिया और जिसके प्रति गुनाह किया था उसने भी क्षमा के लिए उनका धन वापस दे दिया इसी तरह एक व्यक्ति के जीवन में जब प्रभु यीशु आ जाते हैं तब वह अपने किए हुए गुनाहों से पछताता हैं। मूर्तिपूजा, झूठ, जादूटोना, व्यभिचार, चोरी, लालच, बैर आदि पापों से और परमेश्वर की इच्छा के विरोध में किए गए कामों से और किसी भी मनुष्य का बुरा चाहकर किए गए कार्यो से पछताकर पश्चाताप करता है। तब उसके घर उद्वार और छुटकारा आता हैं। 




(1) एक चुना हुआ वंश - यदि हम अपनी वंशावली में जाए इस प्रकार जैसे मेरा नाम सौरभ है मेरे पिता का नाम माधव प्रसाद मेरे दादा का नाम राम प्रसाद उनके पिता का नाम रामलाल ये वंशावली मेरे परिवार की है जो इस तरह जाकर किसी ने किसी रूप में आदम से मिलती है। पहले आदम ने पाप किया और पाप के द्वारा अब तक मृत्यु सारी जाति पर कब्जा रखे हुए हैं। 

परंतु हमारे प्रभु यीशु पुनः जीवित होकर मृत्यु पर जयवंत हो गए और हमें इस जगत से आवाज देकर अलग किया जैसे कि लिखा है मेरी भेड़ मेरा शब्द सुनकर मेरे पीछे हो लेती है। हमने परमेश्वर के वचनों को सुना और यीशु मसीह के पीछे हो लिए। यीशु मसीह ने हमें जगत से चुनकर अपने वंस में शामिल किया और हमें अपनी संतान बनाया। ( यूहनां 1:12, 10:16)