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Wednesday, 8 July 2026

Tithes Offerings and Giving According to the Bible || दशमांश दान और भेंट || Dashamansh Daan Aur Bhent


💝 दशमांश, दान और भेंट पर बाइबल आधारित सम्पूर्ण अध्ययन


📖 परिचय

दशमांश, दान और भेंट पवित्रशास्त्र के महत्वपूर्ण विषय हैं। बहुत से विश्वासियों के मन में प्रश्न होते हैं कि क्या दशमांश आज भी आवश्यक है, दान और भेंट में क्या अंतर है, और नया नियम इन विषयों के बारे में क्या सिखाता है।

इस अध्ययन में हम पहले नया नियम और उसके बाद पुराने नियम के वचनों को देखेंगे ताकि सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र की शिक्षा को समझ सकें।

देना केवल आर्थिक विषय नहीं है, बल्कि यह विश्वास, कृतज्ञता, प्रेम, आराधना और समर्पण का विषय है।


✝️ नया नियम क्या सिखाता है?

नया नियम विश्वासियों को बाध्यता या भय से नहीं, बल्कि प्रेम, प्रसन्नता और विश्वास से देने की शिक्षा देता है।


❤️ प्रसन्नता से देने वाला

📖 2 कुरिन्थियों 9:7

"हर एक जन जैसा अपने मन में ठाने वैसा ही दान करे; न कुढ़-कुढ़ के और न दबाव से, क्योंकि परमेश्वर हर्ष से देने वाले से प्रेम रखता है।"

प्रेरित पौलुस विश्वासियों को बताते हैं कि परमेश्वर बाहरी मजबूरी नहीं बल्कि हृदय की इच्छा को देखता है।

यदि कोई व्यक्ति केवल दबाव, भय या लोगों को दिखाने के लिए देता है, तो वह बाइबल की शिक्षा के अनुसार देना नहीं है।

परमेश्वर उस व्यक्ति से प्रसन्न होता है जो प्रेम, कृतज्ञता और आनन्द के साथ देता है।


🌾 उदारता से बोने वाला

📖 2 कुरिन्थियों 9:6

"जो थोड़ा बोता है वह थोड़ा काटेगा, और जो बहुत बोता है वह बहुत काटेगा।"

पौलुस यहाँ खेती का उदाहरण देकर बताते हैं कि उदारता और कृपणता दोनों के परिणाम होते हैं।

इस वचन का अर्थ केवल धन की वृद्धि नहीं है, बल्कि परमेश्वर की आशीष, आत्मिक फल और सेवकाई के विस्तार से भी है।

विश्वासी को अपनी सामर्थ्य और विश्वास के अनुसार उदार होना चाहिए।


🤲 गुप्त रूप से दान देना

📖 मत्ती 6:3-4

"जब तू दान करे, तो जो तेरा दाहिना हाथ करता है उसे तेरा बाँया हाथ भी न जानने पाए।"

प्रभु यीशु ने दान को दिखावे और प्रशंसा प्राप्त करने का साधन बनने से रोका।

दान का उद्देश्य मनुष्यों से सम्मान प्राप्त करना नहीं, बल्कि परमेश्वर की महिमा करना है।

जो कुछ हम परमेश्वर के लिए करते हैं, वह सच्चे और नम्र हृदय से होना चाहिए।


💝 लेने से देना अधिक धन्य है

📖 प्रेरितों के काम 20:35

"लेने से देना अधिक धन्य है।"

प्रभु यीशु की यह शिक्षा मसीही जीवन के सबसे सुन्दर सिद्धांतों में से एक है।

दुनिया प्राप्त करने में आनन्द खोजती है, लेकिन प्रभु यीशु देने में आनन्द और आशीष देखते हैं।

जब विश्वासी प्रेम से देता है, तब वह परमेश्वर के स्वभाव को प्रकट करता है क्योंकि परमेश्वर स्वयं देने वाला परमेश्वर है।


🪙 निर्धन विधवा की भेंट

📖 मरकुस 12:41-44

प्रभु यीशु ने कहा कि इस निर्धन विधवा ने सब से अधिक डाला है, क्योंकि दूसरों ने अपनी बहुतायत में से दिया, परन्तु उसने अपनी घटी में से अपना सब कुछ दे दिया।

प्रभु यीशु केवल दी गई राशि को नहीं देखते, बल्कि उस हृदय को देखते हैं जिससे वह दी जाती है।

बहुत लोग अधिक देकर भी परमेश्वर को प्रसन्न नहीं कर पाते, जबकि कोई व्यक्ति थोड़ी भेंट देकर भी परमेश्वर को प्रसन्न कर सकता है यदि उसका हृदय विश्वास और प्रेम से भरा हो।

इस घटना से यह शिक्षा मिलती है कि परमेश्वर के सामने मात्रा से अधिक महत्व समर्पण और विश्वास का है।


🤝 प्रारम्भिक कलीसिया की उदारता

📖 प्रेरितों के काम 4:34-35

उनमें कोई भी दरिद्र न था, क्योंकि जिनके पास भूमि या घर थे वे उन्हें बेचकर उसका मूल्य प्रेरितों के पास रखते थे और प्रत्येक को उसकी आवश्यकता के अनुसार बाँट दिया जाता था।

प्रारम्भिक कलीसिया प्रेम, सहभागिता और उदारता का अद्भुत उदाहरण थी।

विश्वासी केवल अपनी आवश्यकताओं के बारे में नहीं सोचते थे, बल्कि दूसरों की आवश्यकताओं को भी अपनी जिम्मेदारी मानते थे।

यह दान मजबूरी से नहीं बल्कि प्रेम और एकता के कारण था।


📜 पुराने नियम में दशमांश

अब हम देखते हैं कि पुराने नियम में दशमांश की व्यवस्था किस प्रकार दी गई थी और उसका उद्देश्य क्या था।


👑 अब्राहम और दशमांश

📖 उत्पत्ति 14:19-20

अब्राम ने सब वस्तुओं में से मलिकिसिदक को दशमांश दिया।

यह बाइबल में दशमांश का पहला उल्लेख है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि यह घटना मूसा की व्यवस्था दिए जाने से पहले हुई थी।

अब्राहम ने किसी मजबूरी या आदेश के कारण नहीं, बल्कि परमेश्वर के प्रति आदर और धन्यवाद के कारण दशमांश दिया।


🏕️ याकूब की प्रतिज्ञा

📖 उत्पत्ति 28:20-22

याकूब ने प्रतिज्ञा की कि जो कुछ परमेश्वर उसे देगा उसका दशमांश वह परमेश्वर को देगा।

याकूब ने दशमांश को परमेश्वर की विश्वासयोग्यता और सुरक्षा के उत्तर के रूप में देखा।

यह कृतज्ञता और समर्पण का एक कार्य था।

दशमांश केवल आर्थिक व्यवस्था नहीं, बल्कि परमेश्वर के प्रति सम्मान और विश्वास का प्रतीक भी था।


🌾 दशमांश यहोवा का है

📖 लैव्यव्यवस्था 27:30

"भूमि का सब दशमांश चाहे भूमि के बीज का हो या वृक्ष के फल का, वह यहोवा का है; वह यहोवा के लिये पवित्र है।"

पुराने नियम में परमेश्वर ने इस्राएल की प्रजा को सिखाया कि उनकी सम्पत्ति, उपज और आशीष का वास्तविक स्वामी परमेश्वर है।

दशमांश इस बात की स्वीकृति था कि जो कुछ मनुष्य के पास है वह अन्ततः परमेश्वर की ओर से प्राप्त हुआ है।

इस प्रकार दशमांश केवल आर्थिक योगदान नहीं था, बल्कि परमेश्वर की प्रभुता को स्वीकार करने का एक कार्य था।


⛺ सेवकाई के समर्थन के लिए दशमांश

📖 गिनती 18:21

"लेवियों को मैं ने इस्राएल में सब दशमांश उनके भाग के लिये दिया है, क्योंकि वे मिलापवाले तम्बू की सेवा करते हैं।"

पुराने नियम में लेवी गोत्र को अन्य गोत्रों की तरह भूमि का भाग नहीं मिला था।

उनकी जिम्मेदारी परमेश्वर की सेवा और आराधना से सम्बन्धित कार्यों को पूरा करना था।

इसी कारण परमेश्वर ने दशमांश की व्यवस्था के द्वारा उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति का प्रबंध किया।

इससे यह सिद्धान्त दिखाई देता है कि परमेश्वर की सेवकाई और आराधना के कार्यों का समर्थन करना महत्वपूर्ण है।


🌿 प्रथम फल द्वारा परमेश्वर का आदर

📖 नीतिवचन 3:9

"अपनी सम्पत्ति और अपनी सारी उपज के पहिले फल से यहोवा का आदर कर।"

बाइबल सिखाती है कि परमेश्वर को हमारे जीवन में पहला स्थान मिलना चाहिए।

पहले फल का सिद्धान्त यह दर्शाता है कि मनुष्य अपनी सर्वोत्तम वस्तुओं के द्वारा परमेश्वर का आदर करे।

यह केवल धन तक सीमित नहीं है, बल्कि समय, प्रतिभा, सेवा और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में परमेश्वर को प्रथम स्थान देने की शिक्षा देता है।


📦 भण्डार में दशमांश लाना

📖 मलाकी 3:10

"सब दशमांश भण्डार में ले आओ, कि मेरे भवन में भोजनवस्तु रहे।"

यह वचन पुराने नियम में इस्राएल की प्रजा के लिए दिया गया था।

इसका उद्देश्य आराधना, सेवकाई और परमेश्वर के भवन से जुड़े कार्यों का समर्थन करना था।

इस वचन का ऐतिहासिक और बाइबिलीय संदर्भ समझना महत्वपूर्ण है, ताकि इसे सही प्रकार से समझा जा सके।


💝 दान, भेंट और दशमांश में अंतर

दशमांश — आय या उपज का दसवाँ भाग, जिसका उल्लेख विशेष रूप से पुराने नियम में मिलता है।

दान — गरीबों, जरूरतमंदों और सहायता की आवश्यकता रखने वालों के लिए प्रेम और दया से दिया गया योगदान।

भेंट — परमेश्वर के प्रति आदर, धन्यवाद और आराधना के रूप में स्वेच्छा से दिया गया समर्पण।


❤️ परमेश्वर किस प्रकार के दाता को पसंद करता है?

पवित्रशास्त्र बार-बार यह सिखाता है कि परमेश्वर केवल भेंट या दान की मात्रा को नहीं देखते, बल्कि उस हृदय को देखते हैं जिससे वह दिया जाता है।

मनुष्य बाहरी वस्तुओं को देखता है, परन्तु परमेश्वर हृदय को देखते हैं।

इसलिए देना केवल आर्थिक विषय नहीं है, बल्कि यह आराधना, विश्वास और प्रेम का विषय है।


😊 प्रसन्नता से देने वाला

📖 2 कुरिन्थियों 9:7

"क्योंकि परमेश्वर हर्ष से देने वाले से प्रेम रखता है।"

परमेश्वर मजबूरी, दबाव या भय के कारण दी गई भेंट से अधिक उस भेंट को महत्व देते हैं जो प्रेम और प्रसन्नता से दी जाती है।

हर्ष से देना परमेश्वर की भलाई और विश्वासयोग्यता पर भरोसा प्रकट करता है।


🙏 विश्वास के साथ देने वाला

जब कोई विश्वासी परमेश्वर पर भरोसा करते हुए देता है, तब वह यह स्वीकार करता है कि उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति का वास्तविक स्रोत परमेश्वर ही है।

देना विश्वास का एक कार्य भी है, क्योंकि इसके द्वारा मनुष्य यह प्रकट करता है कि उसका भरोसा अपनी सम्पत्ति पर नहीं बल्कि परमेश्वर पर है।


🤝 प्रेम और दया से देने वाला

दान और सहायता का उद्देश्य केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि परमेश्वर के प्रेम को लोगों तक पहुँचाना भी है।

जब विश्वासी जरूरतमंदों की सहायता करते हैं, तब वे परमेश्वर के प्रेम और करुणा को प्रकट करते हैं।

यही कारण है कि प्रारम्भिक कलीसिया में विश्वासी एक-दूसरे की आवश्यकताओं को पूरा करने में तत्पर रहते थे।


📖 निष्कर्ष

पवित्र बाइबल सिखाती है कि दशमांश, दान और भेंट केवल धन से जुड़े विषय नहीं हैं, बल्कि यह विश्वास, कृतज्ञता, आराधना और समर्पण से जुड़े हुए विषय हैं।

नया नियम प्रेम, प्रसन्नता और स्वेच्छा से देने पर बल देता है, जबकि पुराने नियम में दशमांश और सेवकाई के समर्थन की व्यवस्था दिखाई देती है।

विश्वासी को बुद्धिमानी, प्रेम और विश्वास के साथ देना चाहिए, क्योंकि परमेश्वर केवल भेंट को नहीं, बल्कि उस हृदय को देखते हैं जिससे वह दी जाती है।


📚 मुख्य बाइबल संदर्भ

📖 2 कुरिन्थियों 9:6-7

📖 मत्ती 6:3-4

📖 मरकुस 12:41-44

📖 प्रेरितों के काम 20:35

📖 प्रेरितों के काम 4:34-35

📖 उत्पत्ति 14:19-20

📖 उत्पत्ति 28:20-22

📖 लैव्यव्यवस्था 27:30

📖 गिनती 18:21

📖 नीतिवचन 3:9

📖 मलाकी 3:10

💝 "क्योंकि परमेश्वर हर्ष से देने वाले से प्रेम रखता है।"

— 2 कुरिन्थियों 9:7 —

देना केवल आर्थिक कार्य नहीं है।
यह विश्वास है।
यह आराधना है।
यह कृतज्ञता है।
यह प्रेम का प्रकट होना है।


❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या नया नियम दशमांश देने की आज्ञा देता है?

नया नियम विशेष रूप से दशमांश को व्यवस्था के रूप में नहीं सिखाता, बल्कि प्रसन्नता, उदारता और स्वेच्छा से देने पर बल देता है।


क्या विश्वासी को देना चाहिए?

हाँ। नया नियम सिखाता है कि विश्वासी को परमेश्वर के कार्य, सेवकाई और जरूरतमंदों की सहायता के लिए उदारता से देना चाहिए।


क्या दान और भेंट में अंतर है?

हाँ। दान सामान्यतः जरूरतमंदों और गरीबों की सहायता के लिए दिया जाता है, जबकि भेंट परमेश्वर के प्रति आदर, धन्यवाद और आराधना के रूप में दी जाती है।


क्या परमेश्वर राशि को देखते हैं?

बाइबल सिखाती है कि परमेश्वर केवल राशि नहीं बल्कि देने वाले के हृदय, विश्वास और भावना को भी देखते हैं।


क्या निर्धन व्यक्ति भी परमेश्वर को प्रसन्न कर सकता है?

हाँ। मरकुस 12 में प्रभु यीशु ने निर्धन विधवा की भेंट की प्रशंसा की, क्योंकि उसने विश्वास और समर्पण से दिया था।


✨ इस अध्ययन से मुख्य शिक्षाएँ

✅ देना आराधना का भाग है।

✅ परमेश्वर हर्ष से देने वाले से प्रेम रखते हैं।

✅ दान दिखावे के लिए नहीं होना चाहिए।

✅ जरूरतमंदों की सहायता करना बाइबल की शिक्षा है।

✅ परमेश्वर भेंट से अधिक हृदय को देखते हैं।

✅ विश्वास, प्रेम और कृतज्ञता से देना चाहिए।

💝 "लेने से देना अधिक धन्य है।"

— प्रेरितों के काम 20:35 —

प्रेम से दी गई भेंट,
विश्वास से दिया गया दान,
और कृतज्ञता से किया गया समर्पण,
परमेश्वर के सामने मूल्यवान है।


⚖️ क्या दशमांश उद्धार का साधन है?

पवित्र बाइबल स्पष्ट रूप से सिखाती है कि उद्धार दान, भेंट, दशमांश या किसी भी मानवीय कार्य के द्वारा प्राप्त नहीं होता।

उद्धार परमेश्वर के अनुग्रह का उपहार है जो प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास करने के द्वारा प्राप्त होता है।

📖 इफिसियों 2:8-9

"क्योंकि अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार विश्वास के द्वारा हुआ है; और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है। और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्ड करे।"

इसलिए दशमांश, दान और भेंट उद्धार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि उद्धार प्राप्त कर चुके विश्वासी के धन्यवाद, विश्वास और आराधना की अभिव्यक्ति हैं।


🏠 परमेश्वर के कार्यों में सहभागिता

बाइबल सिखाती है कि विश्वासी परमेश्वर के कार्यों, सेवकाई और सुसमाचार के प्रचार में सहभागिता करें।

जब विश्वासी प्रेम और विश्वास से देते हैं, तब वे परमेश्वर के कार्य में सहभागी बनते हैं।

📖 फिलिप्पियों 4:15-16

फिलिप्पी की कलीसिया ने पौलुस की सेवकाई में सहायता और सहभागिता की।

यह उदाहरण दिखाता है कि प्रारम्भिक कलीसिया ने सेवकाई और सुसमाचार के कार्य को समर्थन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


🌍 जरूरतमंदों की सहायता

पवित्रशास्त्र बार-बार गरीबों, विधवाओं, अनाथों और जरूरतमंदों की सहायता करने की शिक्षा देता है।

सच्ची उदारता केवल धार्मिक कार्यों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि लोगों की आवश्यकताओं को भी देखती है।

📖 याकूब 1:27

"अनाथों और विधवाओं के क्लेश में उनकी सुधि लेना और अपने आप को संसार से निष्कलंक रखना ही परमेश्वर के निकट शुद्ध और निर्मल भक्ति है।"

यह वचन बताता है कि परमेश्वर के प्रति सच्चा प्रेम लोगों के प्रति दया और करुणा में भी दिखाई देता है।


💝 "क्योंकि परमेश्वर हर्ष से देने वाले से प्रेम रखता है।"

— 2 कुरिन्थियों 9:7 —

दशमांश सम्मान है।
दान प्रेम है।
भेंट आराधना है।
और इन सबके पीछे विश्वास और कृतज्ञता का हृदय होना चाहिए।


📖 प्रभु यीशु और देने की शिक्षा

प्रभु यीशु मसीह ने अपने जीवन और शिक्षाओं के द्वारा देने, दया और उदारता का उदाहरण प्रस्तुत किया।

उन्होंने लोगों को केवल धन देने की नहीं, बल्कि अपने जीवन, समय, प्रेम और सेवा को भी परमेश्वर और लोगों के लिए समर्पित करने की शिक्षा दी।

📖 लूका 6:38

"दो, तो तुम्हें भी दिया जाएगा; लोग अच्छा नाप दबा-दबा कर और हिला-हिला कर और उभरता हुआ तुम्हारी गोद में डालेंगे।"

प्रभु यीशु यहाँ उदारता और दया की भावना को सिखाते हैं।

यह केवल धन तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रेम, क्षमा, दया और सहायता के प्रत्येक कार्य पर भी लागू होता है।


❤️ परमेश्वर ने पहले दिया

बाइबल में देने का सबसे महान उदाहरण स्वयं परमेश्वर हैं।

मनुष्य ने परमेश्वर को कुछ नहीं दिया, बल्कि परमेश्वर ने पहले मनुष्य से प्रेम किया और अपने पुत्र को संसार के उद्धार के लिए दिया।

📖 यूहन्ना 3:16

"क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया।"

मसीही उदारता की जड़ परमेश्वर के इसी प्रेम में पाई जाती है।

विश्वासी इसलिए देते हैं क्योंकि उन्होंने पहले परमेश्वर से प्राप्त किया है।


🙏 निष्कर्ष

पवित्र बाइबल के अनुसार दशमांश, दान और भेंट का उद्देश्य केवल आर्थिक व्यवस्था नहीं है।

यह परमेश्वर के प्रति सम्मान, कृतज्ञता, प्रेम, आराधना और विश्वास की अभिव्यक्ति है।

पुराने नियम में दशमांश की व्यवस्था दिखाई देती है, जबकि नया नियम प्रसन्नता, उदारता और स्वेच्छा से देने पर बल देता है।

परमेश्वर केवल इस बात को नहीं देखते कि कितना दिया गया, बल्कि यह भी देखते हैं कि किस भावना और किस उद्देश्य से दिया गया।

जब विश्वासी प्रेम, विश्वास और आनन्द के साथ देते हैं, तब वे परमेश्वर के स्वभाव और उसके प्रेम को संसार के सामने प्रकट करते हैं।


💝 "लेने से देना अधिक धन्य है।"

— प्रेरितों के काम 20:35 —

दशमांश सम्मान है।
दान प्रेम है।
भेंट आराधना है।
और इन सबका उद्देश्य परमेश्वर की महिमा करना है।


📖 इब्रानियों 7 और मलिकिसिदक का दशमांश

नए नियम में इब्रानियों का लेखक अब्राहम और मलिकिसिदक की घटना का उल्लेख करता है और बताता है कि अब्राहम ने विजय के बाद दशमांश दिया था।

📖 इब्रानियों 7:1-2

"यह मलिकिसिदक शालेम का राजा और परमप्रधान परमेश्वर का याजक था... और अब्राहम ने उसे सब वस्तुओं का दशमांश दिया।"

यहाँ लेखक का मुख्य उद्देश्य दशमांश की व्यवस्था स्थापित करना नहीं, बल्कि मलिकिसिदक के याजकत्व और प्रभु यीशु मसीह के अनन्त याजकत्व को समझाना है।

इब्रानियों की पुस्तक यह दिखाती है कि प्रभु यीशु मसीह मलिकिसिदक की रीति पर अनन्त महायाजक हैं।


⛪ सेवकाई और कलीसिया का सहयोग

नया नियम सिखाता है कि विश्वासी सुसमाचार और सेवकाई के कार्य में सहभागिता करें।

प्रारम्भिक कलीसियाओं ने प्रेरितों और सेवकों की सहायता करके इस सिद्धान्त को व्यवहार में दिखाया।

📖 फिलिप्पियों 4:15-16

फिलिप्पी की कलीसिया ने पौलुस की आवश्यकताओं और सेवकाई में सहायता भेजी।

यह सहायता केवल आर्थिक सहयोग नहीं थी, बल्कि सुसमाचार के कार्य में सहभागिता का प्रतीक थी।

आज भी विश्वासियों को परमेश्वर के कार्य और सुसमाचार के प्रचार में अपनी सामर्थ्य के अनुसार सहयोग करना चाहिए।


❓ क्या नया नियम में दशमांश अनिवार्य है?

नया नियम मुख्य रूप से प्रसन्नता, उदारता और स्वेच्छा से देने पर बल देता है।

नया नियम विश्वासियों को बाध्यता, भय या दबाव से देने की शिक्षा नहीं देता, बल्कि प्रेम और विश्वास से देने के लिए प्रोत्साहित करता है।

📖 2 कुरिन्थियों 9:7

"हर एक जन जैसा अपने मन में ठाने वैसा ही दान करे; न कुढ़-कुढ़ के और न दबाव से, क्योंकि परमेश्वर हर्ष से देने वाले से प्रेम रखता है।"

इसलिए प्रत्येक विश्वासी को प्रार्थना, बुद्धि और विश्वास के साथ निर्णय लेना चाहिए कि वह परमेश्वर के कार्य, सेवकाई और जरूरतमंदों की सहायता में किस प्रकार सहभागिता करेगा।


💝 "क्योंकि परमेश्वर हर्ष से देने वाले से प्रेम रखता है।"

— 2 कुरिन्थियों 9:7 —

दशमांश कृतज्ञता का चिन्ह हो सकता है।
दान प्रेम का कार्य है।
भेंट आराधना की अभिव्यक्ति है।
और इन सबका केन्द्र परमेश्वर के प्रति प्रेम होना चाहिए।


📖 देने के पीछे हृदय का महत्व

पवित्रशास्त्र बार-बार यह सिखाता है कि परमेश्वर केवल इस बात को नहीं देखते कि कितना दिया गया है, बल्कि यह भी देखते हैं कि किस हृदय और किस उद्देश्य से दिया गया है।

मनुष्य बाहरी वस्तुओं को देखता है, परन्तु परमेश्वर हृदय को देखते हैं।

इसी कारण प्रभु यीशु ने उस निर्धन विधवा की भेंट की प्रशंसा की जिसने अपनी बहुतायत में से नहीं, बल्कि विश्वास और समर्पण से दिया।

परमेश्वर के सामने धन की मात्रा नहीं, बल्कि विश्वास, प्रेम और समर्पण का हृदय मूल्यवान है।


🌍 दान और सुसमाचार का कार्य

प्रारम्भिक कलीसिया ने दान और सहयोग के द्वारा सुसमाचार के प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

विश्वासी केवल अपने स्थानीय समुदाय के लिए ही नहीं, बल्कि परमेश्वर के राज्य के विस्तार के लिए भी सहभागिता करते थे।

📖 रोमियों 10:14-15

"यदि कोई प्रचार न करे, तो वे कैसे सुनेंगे?"

सुसमाचार के प्रचार, सेवकाई और मिशन कार्यों में सहभागिता करना भी परमेश्वर के कार्य का एक महत्वपूर्ण भाग है।


👑 परमेश्वर की महिमा के लिए देना

विश्वासी का उद्देश्य मनुष्यों से प्रशंसा प्राप्त करना नहीं, बल्कि परमेश्वर की महिमा करना होना चाहिए।

जब दान, भेंट और सहयोग प्रेम, नम्रता और विश्वास से किया जाता है, तब वह परमेश्वर की आराधना का भाग बन जाता है।

📖 कुलुस्सियों 3:23

"जो कुछ तुम करते हो, मन से करो, यह समझकर कि मनुष्यों के लिये नहीं परन्तु प्रभु के लिये करते हो।"

यह सिद्धान्त देने और सेवकाई दोनों पर लागू होता है।


💝 "लेने से देना अधिक धन्य है।"

— प्रेरितों के काम 20:35 —

देना विश्वास है।
देना प्रेम है।
देना आराधना है।
देना कृतज्ञता है।
और परमेश्वर हर्ष से देने वाले से प्रेम रखते हैं।


📖 अंतिम निष्कर्ष

पवित्र बाइबल के अनुसार दशमांश, दान और भेंट केवल आर्थिक विषय नहीं हैं, बल्कि यह परमेश्वर के प्रति विश्वास, प्रेम, कृतज्ञता और आराधना की अभिव्यक्ति हैं।

पुराने नियम में हम दशमांश की व्यवस्था, लेवी गोत्र की सेवा, परमेश्वर के भवन और इस्राएल की आराधना व्यवस्था को देखते हैं।

नए नियम में जोर किसी निश्चित प्रतिशत पर नहीं, बल्कि हर्ष, उदारता, प्रेम और स्वेच्छा से देने पर दिया गया है।

प्रभु यीशु मसीह ने सिखाया कि परमेश्वर केवल भेंट की मात्रा को नहीं, बल्कि देने वाले के हृदय को देखते हैं।

निर्धन विधवा की छोटी भेंट परमेश्वर की दृष्टि में इसलिए महान थी क्योंकि उसमें विश्वास, समर्पण और प्रेम था।

विश्वासी को परमेश्वर के कार्य, सुसमाचार के प्रचार, सेवकाई और जरूरतमंदों की सहायता में अपनी सामर्थ्य और विश्वास के अनुसार सहभागिता करनी चाहिए।

देना कभी भी भय, दबाव, मजबूरी या लोगों को प्रभावित करने के लिए नहीं होना चाहिए, बल्कि परमेश्वर के प्रति प्रेम और कृतज्ञता के कारण होना चाहिए।

जब विश्वासी प्रेम और प्रसन्नता से देते हैं, तब वे परमेश्वर के स्वभाव को संसार के सामने प्रकट करते हैं, क्योंकि परमेश्वर स्वयं देने वाला परमेश्वर है।


📚 मुख्य बाइबल संदर्भ

📖 2 कुरिन्थियों 9:6-7

📖 मत्ती 6:3-4

📖 मरकुस 12:41-44

📖 प्रेरितों के काम 20:35

📖 प्रेरितों के काम 4:34-35

📖 फिलिप्पियों 4:15-16

📖 इब्रानियों 7:1-2

📖 उत्पत्ति 14:19-20

📖 उत्पत्ति 28:20-22

📖 लैव्यव्यवस्था 27:30

📖 गिनती 18:21

📖 नीतिवचन 3:9

📖 मलाकी 3:10

🙏 प्रार्थना

हे स्वर्गीय पिता,

हमें ऐसा हृदय दे जो प्रेम, विश्वास और कृतज्ञता से भरा हो।

हमें सिखा कि हम अपनी सम्पत्ति, समय, सामर्थ्य और जीवन के द्वारा आपकी महिमा करें।

हमें उदार, दयालु और प्रसन्नता से देने वाला बनाएँ।

हमें ऐसा जीवन जीने में सहायता करें जो आपके प्रेम और अनुग्रह को संसार के सामने प्रकट करे।

यह प्रार्थना हम प्रभु यीशु मसीह के नाम से माँगते हैं।

आमीन।


💝 "क्योंकि परमेश्वर हर्ष से देने वाले से प्रेम रखता है।"

— 2 कुरिन्थियों 9:7 —

दशमांश सम्मान है।
दान प्रेम है।
भेंट आराधना है।
और इन सबका केन्द्र परमेश्वर के प्रति प्रेम और कृतज्ञता है।

Thursday, 28 February 2019

Happy Palm Sunday पाम संडे क्या होता है ?

पाम संडे क्या होता है ?
 आये हम जानते है पाम संडे क्या होता है?

पाम संडे यानी खजूर रविवार को ईसाई धर्म के अनुयाइयों के प्रमुख त्योहारों में से एक त्योहार मनाया गया। 
इस दिन को ईसाई समुदाय के लोग प्रभु यीशू के यरुशलम में विजयी प्रवेश के रूप में मनाते हैं। 
इस बार 28 March  को पाम संडे मनाया गया।
पवित्र बाइबल में कहा गया है कि प्रभु यीशू जब यरुशलम पहुँचे, तो उनके स्वागत में बड़ी संख्या में लोग पाम यानी खजूर की डालियाँ अपने हाथों में लहराते हुए एकत्रित हो गए थे। लोगों ने प्रभु यीशू की शिक्षा और चमत्कारों को शिरोधार्य कर उनका जोरदार स्वागत किया था। यह बात करीब दो हजार वर्ष पहले की बताई जाती है। उस दिन की याद में पाम संडे मनाया जाता है।
इसे पवित्र सप्ताह की शुरुआत के रूप में भी मनाया जाता है। इसका समापन ईस्टर के रूप में होता है।  पाम संडे दक्षिण भारत में प्रमुखता से मनाया जाता है। इसे पैसन संडे भी कहा जाता है।
इस मौके पर चर्चों में विशेष आयोजन होते हैं। इसमें बाइबल का पाठ, प्रवचन और मीसा का आयोजन भी किया जाएगा। साथ ही एक विशेष आयोजन के साथ शाम को विशेष चल समारोह निकाला जाएगा। ईसाई समाज पाम संडे के दिन प्रभु के आगमन की खुशी में गीत गाकर इस दिन का स्वागत करते हैं। वे हाथों में खजूर की डालियाँ लेकर प्रभु के आने की खुशी में गीत गाएँगे। रविवार से गिरिजाघरों में शुरू हुई प्रभु आराधना एवं भक्ति का सिलसिला ईस्टर तक जारी रहेगा।
मसीही मंदिरों में विशेष प्रार्थना होगी। 
 इसमें झाँकी सजाकर प्रभु के जीवन को दर्शाया जाएगा।



Saturday, 26 January 2019

There is none holy as the LORD PROPHET BAJINDER SINGH MINISTRY

PROPHET BAJINDER SINGH MINISTRY
THE CHURCH OF GLORY AND WISDOM NEW CHANDIGARH
यहोवा के तुल्य कोई पवित्र नहीं, क्योंकि तुझ को छोड़ और कोई है ही नहीं
और हमारे परमेश्वर के समान कोई चट्टान नहीं है॥
फूलकर अहंकार की ओर बातें मत करो, और अन्धेर की बातें तुम्हारे मुंह से न निकलें
क्योंकि यहोवा ज्ञानी ईश्वर है, और कामों को तौलने वाला है॥
यहोवा मारता है और जिलाता भी है वही अधोलोक में उतारता और उस से निकालता भी है॥
यहोवा निर्धन करता है और धनी भी बनाता है, वही नीचा करता और ऊंचा भी करता है।
वह कंगाल को धूलि में से उठाता; और दरिद्र को घूरे में से निकाल खड़ा करता है, ताकि उन को अधिपतियों के संग बिठाए, और महिमायुक्त सिंहासन के अधिकारी बनाए। क्योंकि पृथ्वी के खम्भे यहोवा के हैं, और उसने उन पर जगत को धरा है।
वह अपने भक्तों के पावों को सम्भाले रहेगा, परन्तु दुष्ट अन्धियारे में चुपचाप पड़े रहेंगे; क्योंकि कोई मनुष्य अपने बल के कारण प्रबल न होगा॥
जो यहोवा से झगड़ते हैं वे चकनाचूर होंगे; वह उनके विरुद्ध आकाश में गरजेगा। यहोवा पृथ्वी की छोर तक न्याय करेगा; और अपने राजा को बल देगा, और अपने अभिषिक्त के सींग को ऊंचा करेगा॥

Sunday, 23 December 2018

Dashamaansh kisako dena hai es post ko jarur dekhe | दशमांश किसको देना है ?? | इस लेख को पढने वाला कोई भी व्यक्ति अगर इन आशीषो से वंचित है तो आज ही प्रभु से माफ़ी माँग ले।

Dashamaansh kisako dena hai
दशमांश किसको देना है ??
इस लेख को पढने वाला कोई भी व्यक्ति अगर इन आशीषो से वंचित है 
तो आज ही प्रभु से माफ़ी माँग ले।


गिनती 18:21 --- उनको को इस्त्राएलियों का सब दशमांश उनका निज भाग कर देता हूं। दशमांश परमेश्वर के भवन में कार्य करने वालो का भाग है । मलाकी 3:10-  सारे दशमांश भण्डार में ले आओ कि मेरे भवन में भोजनवस्तु रहे।
परमेश्वर के भवन से आत्मिक भोजन पाने वाले को अपना दशमांश वाह देना है । नये नियम में प्रेरित पौलूस ने उल्लेख किया है 
 "हर एक जन जैसा मन में ठाने वैसा ही दान करे न कुढ़ कुढ़ के, और न दबाव से, क्योंकि परमेश्वर हर्ष से देने वाले से प्रेम रखता है 
(2 कुरिन्थियों 9:7 

जिस जगह से हमे निरंतर आत्मिक भोजन मिलता है वही पर हमे अपना दशमांश देना है । आपके लिय प्रार्थना करने वालो को आपके रिश्तेदार जो सेवकाई में है और जरूरतमंद प्रभु के दासो को भी ना भूले । आपके पास जो 90 % है उसमे से आप उन्हें जरुर दे। 
व्यवस्थाविवरण 16: 17 उस आशीष के अनुसार जो तेरे परमेश्वर यहोवा ने तुझ को दी हो, दिया करें।
1 कुरिन्थियों 9:7-17..इन पदों में प्रेरीत पौलुस ने प्रभु यीशु के वचनों को लेकर विस्वासियो को बताता है . प्रभु ने भी ठहराया कि जो लोग सुसमाचार सुनाते है उन की जीविका सुसमाचार से हो।
इसीलिए सुसमाचार सुनाने वालो की मदद करना अनिवार्य है । हमे मनुष्यों के लिए नही परमेश्वर के लिए देना है प्रभु राह खोलेगा।
एक भाई ने मेरे को बोला की भाई मै जिस चर्च में जाता हु वहा पर मै आब दशमांश नहीं दूंगा । 
मै पुछा क्यों? क्या हुआ भाई तो ओ बोले  की वहा के लोग पैसे को सही उपयोग नही करते है ।
भीर मै भाई को बोला की भाई आप जिस चर्च में दंशमंश दे रहे है वही पर देवे क्योकि आप मनुष्यों को नहीं दे रहे हो आप प्रभु को दे रहे हो । प्रभु उन से जबाब मांगेगे  उनको देना है जबाब ।आप को  नही