भजन संहिता 2 — पृष्ठभूमि और लेखक
भजन संहिता 2 दाऊद द्वारा लिखा गया भजन है। यह उस समय की परिस्थितियों को दर्शाता है जब राष्ट्र और राजा परमेश्वर की इच्छा के विरुद्ध चल रहे थे। यह मसीह के राज्य, उसके अधिकार और परमेश्वर की प्रभुता को प्रकट करता है। यह भजन चेतावनी और आशीष दोनों देता है।
2:1 जाति जाति के लोग क्यों हुल्लड़ मचाते हैं, और देश देश के लोग व्यर्थ बातें क्यों सोच रहे हैं?
अनुवाद: राष्ट्र क्यों विद्रोह कर रहे हैं और लोग व्यर्थ योजनाएँ क्यों बना रहे हैं?
व्याख्या: यह पद मानव जाति के घमंड को दिखाता है — लोग परमेश्वर की योजना के विरुद्ध जाकर अपनी शक्ति पर भरोसा करते हैं। उनकी सारी योजनाएँ व्यर्थ और टिकाऊ नहीं होतीं। दाऊद बता रहा है कि जो भी परमेश्वर के विरुद्ध खड़ा होता है, उसकी सोच खुद ही नाश का कारण बनती है।
2:2 यहोवा के और उसके अभिषिक्त के विरूद्ध पृथ्वी के राजा मिलकर, और हाकिम आपस में सम्मति करके कहते हैं, कि
अनुवाद: पृथ्वी के राजा और हाकिम परमेश्वर और उसके अभिषिक्त के विरुद्ध खड़े हो जाते हैं।
व्याख्या: यह पद दर्शाता है कि सांसारिक नेता मिलकर परमेश्वर की आज्ञा को चुनौती देते हैं। “अभिषिक्त” भविष्यद्वाणी रूप से मसीहा की ओर इशारा करता है। दुनिया की ताकतें हमेशा परमेश्वर की प्रभुता को नकारने की कोशिश करती हैं।
2:3 आओ, हम उनके बन्धन तोड़ डालें, और उनकी रस्सियों अपने ऊपर से उतार फेंके॥
अनुवाद: वे कहते हैं— हम परमेश्वर के नियमों को तोड़ डालें और उसके बन्धनों को हटाएँ।
व्याख्या: मनुष्य परमेश्वर के बंधन को बंधन नहीं बल्कि बोझ मानता है। वे आत्मिक स्वतंत्रता को गलत समझते हैं और परमेश्वर के अधिकार को हटाना चाहते हैं। यह विद्रोही मनुष्य के स्वभाव को दिखाता है।
2:4 वह जो स्वर्ग में विराजमान है, हंसेगा, प्रभु उन को ठट्ठों में उड़ाएगा।
अनुवाद: स्वर्ग में बैठा परमेश्वर उन पर हंसेगा और उनका उपहास करेगा।
व्याख्या: परमेश्वर की नजर में मनुष्य का विद्रोह हास्यास्पद है। परमेश्वर का शासन अटल है— कोई भी उसकी शक्ति को चुनौती नहीं दे सकता। विद्रोही योजनाएँ खुद ही टूटने के लिए बनी होती हैं।
2:5 तब वह उन से क्रोध करके बातें करेगा, और क्रोध में कहकर उन्हें घबरा देगा, कि
अनुवाद: परमेश्वर क्रोध में उनसे बात करेगा और उन्हें भयभीत करेगा।
व्याख्या: जब परमेश्वर न्याय करता है, तो कोई भी उसके सामने ठहर नहीं सकता। उसकी डांट शक्तिशाली है और विद्रोही राष्ट्रों को भय में डाल देती है।
2:6 मैं तो अपने ठहराए हुए राजा को अपने पवित्र पर्वत सिय्योन की राजगद्दी पर बैठा चुका हूं।
अनुवाद: परमेश्वर कहता है— मैंने अपने चुने हुए राजा को सिय्योन पर बैठाया है।
व्याख्या: परमेश्वर का राज्य स्थापित है। चाहे मनुष्य जितना विरोध करे, परमेश्वर का अभिषिक्त— मसीहा— ही सच्चा राजा है। उसका राज्य कभी नहीं हिलेगा।
2:7 मैं उस वचन का प्रचार करूंगा: जो यहोवा ने मुझ से कहा, तू मेरा पुत्रा है, आज तू मुझ से उत्पन्न हुआ।
अनुवाद: परमेश्वर ने कहा— तू मेरा पुत्र है, आज मैंने तुझे उत्पन्न किया।
व्याख्या: यह मसीह के दिव्य पुत्रत्व की घोषणा है। यह पद मसीहा की महिमा, अधिकार और स्वर्गीय पहचान को प्रकट करता है।
2:8 मुझ से मांग, और मैं जाति जाति के लोगों को तेरी सम्पत्ति होने के लिये, और दूर दूर के देशों को तेरी निज भूमि बनने के लिये दे दूंगा।
अनुवाद: मुझसे मांग— मैं सारी जातियों को तेरी विरासत बना दूंगा।
व्याख्या: परमेश्वर अपने पुत्र को संपूर्ण पृथ्वी की प्रभुता देता है। यह पद बताता है कि मसीह सिर्फ इस्राएल का नहीं बल्कि सारी दुनिया का राजा है।
2:9 तू उन्हें लोहे के डण्डे से टुकड़े टुकड़े करेगा। तू कुम्हार के बर्तन की नाईं उन्हें चकना चूर कर डालेगा॥
अनुवाद: तू उन्हें लोहे के डंडे से तोड़ेगा और बर्तनों की तरह चूर कर देगा।
व्याख्या: यह मसीह के न्यायी राजा होने को दर्शाता है। जो उसके विरुद्ध खड़े होंगे, न्याय के दिन ठहर नहीं सकेंगे।
2:10 इसलिये अब, हे राजाओं, बुद्धिमान बनो; हे पृथ्वी के न्यायियों, यह उपदेश ग्रहण करो।
अनुवाद: अब राजाओं, बुद्धिमान बनो; पृथ्वी के न्यायियों, शिक्षा लो।
व्याख्या: परमेश्वर सभी शक्तिशाली लोगों को चेतावनी देता है— अहंकार में मत रहो। परमेश्वर की प्रभुता को स्वीकार करना ही बुद्धिमानी है।
2:11 डरते हुए यहोवा की उपासना करो, और कांपते हुए मगन हो।
अनुवाद: डरते हुए यहोवा की उपासना करो और कांपते हुए आनन्दित हो।
व्याख्या: परमेश्वर की भय मानने वाली उपासना ही सच्ची उपासना है। आदर और विनम्रता के साथ आनन्द मनाना मसीही जीवन का आधार है।
2:12 पुत्र को चूमो ऐसा न हो कि वह क्रोध करे, और तुम मार्ग ही में नाश हो जाओ; क्योंकि क्षण भर में उसका क्रोध भड़कने को है॥ धन्य हैं वे जिनका भरोसा उस पर है॥
अनुवाद: पुत्र को आदर दो, ताकि वह क्रोध न करे और तुम नाश न हो जाओ। धन्य हैं वे जो उस पर भरोसा रखते हैं।
व्याख्या: यह अंतिम चेतावनी और आशीष है। जो मसीह को मानते हैं वे धन्य हैं, परन्तु जो उसे अस्वीकार करते हैं वे न्याय का सामना करते हैं। परमेश्वर पर भरोसा सुरक्षा और आशीष लाता है।
