🔥 40 दिन उपवास – Day 3
📖 यशायाह 1:18
“यहोवा कहता है, आओ, हम आपस में वादविवाद करें: तुम्हारे पाप चाहे लाल रंग के हों, तौभी वे हिम की नाईं उजले हो जाएंगे; और चाहे अर्गवानी रंग के हों, तौभी वे ऊन के समान श्वेत हो जाएंगे।”
🌿 प्रस्तावना
40 दिन के उपवास का तीसरा दिन हमें परमेश्वर की अद्भुत करुणा और उसकी शुद्ध करने वाली सामर्थ्य को समझने के लिए बुलाता है। अक्सर हम अपने पापों और गलतियों के कारण स्वयं को अयोग्य महसूस करते हैं। हम सोचते हैं कि शायद अब बहुत देर हो चुकी है, शायद अब वापसी संभव नहीं। लेकिन आज का वचन हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर न्याय करने से पहले निमंत्रण देता है।
यह वचन दंड की घोषणा नहीं, बल्कि दया की पुकार है। यह हमें सिखाता है कि चाहे जीवन में कितना भी अंधकार क्यों न हो, प्रभु का प्रकाश उससे अधिक शक्तिशाली है।
✨ विस्तार से व्याख्या
1️⃣ “आओ, हम आपस में वादविवाद करें”
ध्यान दीजिए – यहोवा स्वयं बुला रहा है। मनुष्य पाप में गिरा हुआ है, फिर भी परमेश्वर कहता है – आओ। यह वाक्य परमेश्वर के प्रेम को प्रकट करता है।
“वादविवाद” का अर्थ यहाँ झगड़ा नहीं है, बल्कि सत्य का सामना करना है। यह ऐसा है जैसे पिता अपने बच्चे से कहता है – आओ, बैठकर बात करें। परमेश्वर चाहता है कि मनुष्य अपनी स्थिति को समझे, अपने जीवन की सच्चाई को देखे और उसकी ओर लौट आए।
कई बार हम परमेश्वर से दूर भागते हैं क्योंकि हमें डर लगता है। लेकिन यह वचन बताता है कि परमेश्वर हमें दूर नहीं करता, बल्कि अपने पास बुलाता है।
2️⃣ “तुम्हारे पाप चाहे लाल रंग के हों”
लाल रंग यहाँ गहरे दोष और अपराध का प्रतीक है। कुछ पाप ऐसे होते हैं जो जीवन पर गहरा दाग छोड़ देते हैं। वे केवल बाहरी गलती नहीं होते, बल्कि भीतर तक असर डालते हैं।
कभी-कभी लोग हमें क्षमा कर देते हैं, लेकिन हमारा अपना मन हमें दोषी ठहराता रहता है। हम अतीत की बातों को बार-बार याद करते हैं।
परमेश्वर कहता है – चाहे पाप कितना भी गहरा क्यों न हो, वह असंभव नहीं है। कोई भी जीवन इतना गिरा हुआ नहीं कि परमेश्वर उसे उठा न सके।
3️⃣ “तौभी वे हिम की नाईं उजले हो जाएंगे”
हिम अर्थात बर्फ – पूर्ण रूप से श्वेत, बिना दाग के। यह केवल क्षमा का नहीं, पूर्ण शुद्धि का चित्र है।
परमेश्वर केवल हमारे पापों को ढकता नहीं, वह उन्हें मिटा देता है। वह हमें नया जीवन देता है।
जहाँ पहले लज्जा थी, वहाँ अब सम्मान हो सकता है। जहाँ पहले निराशा थी, वहाँ अब आशा हो सकती है। जहाँ पहले अंधकार था, वहाँ अब प्रकाश हो सकता है।
4️⃣ “और चाहे अर्गवानी रंग के हों”
अर्गवानी रंग गहरे और स्थायी रंग का संकेत है। यह ऐसे पापों की ओर इशारा करता है जो आदत बन चुके हैं, जो वर्षों से जीवन में जमे हुए हैं।
कुछ बंधन इतने मजबूत लगते हैं कि उनसे बाहर निकलना असंभव लगता है। लेकिन परमेश्वर कहता है कि वह उन गहरे जमे हुए दोषों को भी धो सकता है।
कोई भी आदत, कोई भी लत, कोई भी पुरानी गलती इतनी शक्तिशाली नहीं कि प्रभु की सामर्थ्य उससे बड़ी न हो।
5️⃣ “तौभी वे ऊन के समान श्वेत हो जाएंगे”
ऊन को जब धोया जाता है तो वह उजली और कोमल हो जाती है। यह केवल साफ होने का नहीं, बहाल होने का चित्र है।
परमेश्वर हमें खाली नहीं छोड़ता। वह हमारे जीवन को नया आकार देता है। वह हमें पवित्रता और शांति से भर देता है।
Day 3 हमें सिखाता है कि प्रभु की शुद्धि पूर्ण है, गहरी है और स्थायी है।
📖 और वचन
📖 भजन 51:7
“मुझे जूफे से शुद्ध कर, तो मैं शुद्ध हो जाऊंगा; मुझे धो, तो मैं हिम से भी अधिक उजला हो जाऊंगा।”
✨ वचन की व्याख्या
यहाँ दाऊद फिर से शुद्धि की प्रार्थना करता है। वह जानता था कि पाप ने उसके जीवन को प्रभावित किया है।
“मुझे जूफे से शुद्ध कर”
जूफा पुरानी वाचा में शुद्धिकरण का प्रतीक था। यह बाहरी रीति से अधिक, भीतर की सफाई का संकेत था। दाऊद समझ गया था कि केवल परमेश्वर ही उसे शुद्ध कर सकता है।
“मुझे धो”
यह बहुत व्यक्तिगत प्रार्थना है। दाऊद किसी परंपरा या नियम पर निर्भर नहीं है। वह सीधे प्रभु से कहता है – मुझे धो।
“तो मैं हिम से भी अधिक उजला हो जाऊंगा”
यह वही प्रतिज्ञा है जो यशायाह 1:18 में दिखाई देती है। परमेश्वर की शुद्धि बाहरी नहीं, बल्कि हृदय की पूर्ण सफाई है।
दोनों वचन हमें सिखाते हैं कि चाहे पाप कितना भी गहरा हो, प्रभु की शुद्धि उससे अधिक सामर्थी है।
🙏 आज की प्रार्थना
हे प्रभु, आज 40 दिन के उपवास के तीसरे दिन मैं तेरे सामने नम्र होकर आता हूँ।
मेरे जीवन के हर लाल दाग को तू श्वेत कर दे। मेरे भीतर जो भी अर्गवानी रंग के समान गहरे दोष हैं, उन्हें अपने अनुग्रह से धो दे।
मुझे केवल क्षमा ही नहीं, पूर्ण शुद्धि दे। मुझे नया मन और नया जीवन दे।
आमीन।
🌈 निष्कर्ष
Day 3 हमें यह विश्वास दिलाता है कि कोई भी पाप इतना बड़ा नहीं कि परमेश्वर की दया उसे मिटा न सके।
जब हम उसके पास आते हैं, तो वह हमें अस्वीकार नहीं करता। वह हमें शुद्ध करता है, बहाल करता है और नया बनाता है।
आज उसका निमंत्रण है – “आओ।” क्या हम उसके पास जाएंगे?
