Friday, 5 December 2025

“Christmas Message | यीशु का जन्म और उद्धार का वचन | Powerful Christmas Sermon – Pastor Emmanuel”

Christmas Message in Hindi | Christmas Bible Study | जन्म का संदेश

मत्ती 1:23 “देखो, एक कुँवारी गर्भवती होगी और पुत्र जन्मेगी; और उसका नाम इम्मानुएल रखा जाएगा।”

क्रिसमस का आत्मिक संदेश

क्रिसमस केवल एक त्योहार नहीं है, यह वह दिव्य क्षण है जब परमेश्वर ने अपने पुत्र को संसार में भेजा ताकि मानवता को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए। यह दिन हमें परमेश्वर के प्रेम, अनुग्रह और उद्धार की याद दिलाता है।

क्रिसमस हमें यह सिखाता है कि परमेश्वर मनुष्य से दूर नहीं है — वह हमारे साथ है, हममें है, और हमारे जीवन को बदलना चाहता है। "इम्मानुएल" का अर्थ ही है — “परमेश्वर हमारे साथ।”

1. क्रिसमस हमें आशा देता है

यूहन्ना 1:5 “जो ज्योति अन्धकार में चमकती है और अन्धकार ने उसे दबा न लिया।”

ईसा मसीह की ज्योति किसी भी अन्धकार से बड़ी है। चाहे निराशा हो, बीमारी हो, आर्थिक संकट हो — मसीह की ज्योति जीवन में आशा पैदा करती है।

2. क्रिसमस हमें उद्धार की याद दिलाता है

लूका 2:11 “क्योंकि आज दाऊद के नगर में तुम्हारे लिये उद्धारकर्ता जन्मा है, जो प्रभु मसीह है।”

यीशु का जन्म मानवता के उद्धार के लिए हुआ। वे हमें पाप से छुड़ाने, जीवन में शांति और अनन्त जीवन देने आए।

3. क्रिसमस हमें प्रेम का मार्ग दिखाता है

यूहन्ना 3:16 “क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया।”

परमेश्वर ने हमें इतना प्रेम किया कि अपने पुत्र को बलिदान के रूप में दे दिया। इसलिए क्रिसमस प्रेम, दया, और क्षमा का संदेश है।

4. क्रिसमस आज भी जीवन बदलता है

2 कुरिन्थियों 5:17 “यदि कोई मसीह में है, तो वह नई सृष्टि है।”

यीशु आज भी जीवन बदलते हैं। उनका जन्म केवल अतीत की घटना नहीं— वह आज भी हर उस हृदय में जन्म लेते हैं जो उन्हें स्वीकार करता है।

क्रिसमस का आत्मिक अर्थ (Refined Explanation)

  • यीशु का जन्म — मानव इतिहास का सबसे बड़ा चमत्कार।
  • परमेश्वर का प्रेम — जो हमें अयोग्य होने पर भी दिया गया।
  • यीशु की ज्योति — जो हर अन्धकार को तोड़ती है।
  • यीशु की उपस्थिति — जो हमें जीवन में दिशा और शांति देती है।
  • यीशु का संदेश — प्रेम, क्षमा और उद्धार।

Christmas Blessing (आशीष)

“इम्मानुएल का प्रकाश आपके परिवार में चमके। यीशु की शांति आपके घर को भर दे। उनकी उपस्थिति आपके जीवन में नई दिशा, नई आशा और नया आरंभ दे।”

Christmas Prayer (शॉर्ट और शक्तिशाली)

प्रभु यीशु, आपके जन्म के दिन हम आपका धन्यवाद करते हैं। हे प्रभु, आज अपने प्रकाश से हमारे जीवन के हर अंधकार को हटा दीजिए। हमारे घर, परिवार, काम, स्वास्थ्य और भविष्य पर आपकी शांति और आशीष बनी रहे। हमें प्रेम, क्षमा और विनम्रता में चलने की शक्ति दीजिए। आपकी ज्योति इस पूरे नए वर्ष में हमारा मार्गदर्शन करे। इम्मानुएल— परमेश्वर हमारे साथ— हम पर अनुग्रह करे। आमीन।

अतिरिक्त Christmas Wachan

यशायाह 9:6 “क्योंकि हमारे लिये एक बालक उत्पन्न हुआ... और उसका नाम अद्भुत, युक्ति करने वाला, पराक्रमी ईश्वर, अनन्तकाल का पिता, शान्ति का राजकुमार होगा।”

मीका 5:2 “हे बेतलेहेम... तुझ में से मेरे लिये एक ऐसा निकलेगा जो इस्राएल पर प्रभुता करेगा।”

गलातियों 4:4 “जब समय पूरा हुआ, तो परमेश्वर ने अपने पुत्र को भेजा।”

Christmas का अंतिम संदेश

क्रिसमस केवल एक दिन नहीं — यह वह शक्ति है जो जीवन को बदल सकती है। यीशु आपके घरों में शांति, आपके दिलों में आनंद, आपकी राहों में प्रकाश और आपके भविष्य में सफलता प्रदान करें।

क्रिसमस संदेश — वचन में जन्मा उद्धार

By Pastor Emmanuel

मुख्य वचन

“वह एक पुत्र जनेगी और तू उसका नाम यीशु रखना; क्योंकि वही अपने लोगों को उनके पापों से उद्धार करेगा।”
— मत्ती 1:21

व्याख्या — मत्ती 1:21

यह वचन क्रिसमस का केंद्र है। यीशु का जन्म केवल एक त्योहार नहीं बल्कि मानवता के लिए परमेश्वर की उद्धार योजना है। संसार पाप में गिरा हुआ था और परमेश्वर ने समाधान भेजा—यीशु। क्रिसमस वह क्षण है जब स्वर्ग ने पृथ्वी से कहा — उद्धार आ गया है।

स्वर्गदूत का सन्देश

“मत डर, देख, मैं तुम्हारे लिये बड़े आनन्द का सुसमाचार लाता हूँ… आज दाऊद के नगर में तुम्हारे लिये एक उद्धारकर्ता उत्पन्न हुआ है, अर्थात मसीह प्रभु।”
— लूका 2:10–11

व्याख्या — लूका 2:10–11

क्रिसमस का पहला शब्द है—“मत डर।” इसका अर्थ है कि मसीह का आगमन हमारे जीवन से हर भय को दूर करने के लिए है। जहाँ मसीह आते हैं, वहाँ शांति, आशा और आनंद का जन्म होता है।

वचन देहधारी हुआ

“और वचन देहधारी हुआ, और हमारे बीच में रहा; और हमने उसकी महिमा देखि, जैसे पिता के एकलौते का महिमा।”
— यूहन्ना 1:14

व्याख्या — यूहन्ना 1:14

ईश्वर दूर से नहीं देखता—वह हमारे बीच आता है। वचन का देहधारी होना दर्शाता है कि परमेश्वर हमें समझता है, हमारे दुःख को महसूस करता है और हमारे साथ चलना चाहता है। क्रिसमस का अर्थ है — परमेश्वर हमारे साथ।

मसीहा के नामों की घोषणा

“क्योंकि हमारे लिये एक बालक उत्पन्न हुआ… और उसका नाम अद्भुत युक्ति करने वाला, पराक्रमी ईश्वर, अनन्तकाल का पिता, और शान्ति का राजकुमार रखा जाएगा।”
— यशायाह 9:6

व्याख्या — यशायाह 9:6

  • अद्भुत युक्ति करने वाला — समस्याओं में मार्ग दिखाने वाला।
  • पराक्रमी ईश्वर — कमजोरी में शक्ति देने वाला।
  • अनन्तकाल का पिता — प्रेम और सुरक्षा देने वाला।
  • शांति का राजकुमार — हर तूफान में शांति देने वाला।

क्रिसमस का सार

  • क्रिसमस = उद्धार का दिन।
  • क्रिसमस = परमेश्वर का हमारे निकट आना (इम्मानुएल)।
  • क्रिसमस = भय का अंत और आनंद की शुरुआत।
  • क्रिसमस = शांति, शक्ति और आशा का पर्व।

आध्यात्मिक चुनौती

क्रिसमस केवल उत्सव नहीं बल्कि परिवर्तन का दिन है। प्रश्न यह है—क्या हमने यीशु को अपने जीवन का केंद्र बनाया है? क्या हमने अपने डर, चिंता और समस्याओं को उसके हाथों सौंपा है? क्रिसमस का असली अर्थ तब प्रकट होता है जब मसीह हमारे हृदय में जन्म लेते हैं।

क्रिसमस प्रार्थना

हे स्वर्गीय पिता,

हम आपके देहधारी वचन के लिए धन्यवाद करते हैं। इस क्रिसमस हम प्रार्थना करते हैं कि यीशु मसीह का प्रकाश हमारे जीवन में चमके। हमारे पापों का उद्धार, हमारे मन की शांति, हमारे घरों में प्रेम और हमारे भविष्य में आशा स्थापित कर।

जहाँ भी अंधकार है वहाँ आपका प्रकाश उतरे। जहाँ टूटन है वहाँ आपकी चंगाई और पुनर्स्थापना हो। आप हमारे साथ रहे और हमारे हर कदम का मार्गदर्शन करें।

यीशु मसीह के नाम में, आमीन।

समापन आशीष

मैं घोषणा करता/करती हूँ कि इस क्रिसमस के मौसम में आपके जीवन में उद्धार, अनुग्रह, शांति, नई शुरुआत और दिव्य सुरक्षा प्रकट होगी। प्रभु आपका मार्ग प्रशस्त करे और आपको अपनी ज्योति से भर दे।

— Pastor Emmanuel





Saturday, 22 November 2025

भजन संहिता 1 अध्ययन हिंदी में | Psalm 1 Explained in Hindi | धन्य व्यक्ति का मार्ग

 

भजन संहिता 1 पूरा अध्ययन हिंदी में | Psalm 1 Study in Hindi

भजन संहिता 1 एक ज्ञान-भजन है जिसे सामान्यतः दाऊद द्वारा लिखा गया माना जाता है। इस अध्याय में दो मार्ग दिखाए गए हैं—धर्मी का मार्ग और दुष्ट का मार्ग। यह भजन हमें सिखाता है कि परमेश्वर के वचन पर चलने वाला जीवन फलदार, स्थिर और आशीषित होता है।

भजन संहिता 1 – पृष्ठभूमि

यह अध्याय उस समय लिखा गया जब दाऊद लोगों को यह बताना चाहता था कि परमेश्वर के वचन में आनंद लेने वाला व्यक्ति ही सच्चे जीवन का आनंद पाता है। भजन 1 पूरे भजन संहिता की दिशा तय करता है और दो मार्गों की तुलना करता है:
✔ धर्मियों का मार्ग — उन्नति, स्थिरता
✔ दुष्टों का मार्ग — अस्थिरता और नाश

भजन संहिता 1 — पद दर पद अध्ययन

1:1

क्या ही धन्य है वह पुरूष जो दुष्टों की युक्ति पर नहीं चलता, और न पापियों के मार्ग में खड़ा होता; और न ठट्ठा करने वालों की मण्डली में बैठता है!

अनुवाद: धन्य वह मनुष्य है जो बुरे लोगों की सलाह नहीं मानता, पापियों के मार्ग पर नहीं रुकता और ठट्ठा करने वालों की संगति में नहीं बैठता।

व्याख्या:
– आशीषित जीवन बुराई से दूरी बनाने से शुरू होता है।
– चलना, खड़ा होना और बैठना — यह पाप में धीरे-धीरे फँसने के 3 स्तर हैं।
– धर्मी अपनी संगति सोच-समझकर चुनता है क्योंकि संगति जीवन की दिशा बदल देती है।

1:2

परन्तु वह तो यहोवा की व्यवस्था से प्रसन्न रहता; और उसकी व्यवस्था पर रात दिन ध्यान करता रहता है।

अनुवाद: वह परमेश्वर के वचन से आनंद लेता है और दिन-रात उसी पर मनन करता है।

व्याख्या:
– धर्मी का आनंद संसार में नहीं, वचन में होता है।
– रात-दिन ध्यान का अर्थ है कि वचन उसके मन में लगातार सक्रिय रहता है।
– वचन के कारण उसके निर्णय, स्वभाव और जीवन में परमेश्वर का चरित्र झलकने लगता है।

1:3

वह उस वृक्ष के समान है, जो बहती नालियों के किनारे लगाया गया है। और अपनी ऋतु में फलता है, और जिसके पत्ते कभी मुरझाते नहीं। इसलिये जो कुछ वह पुरूष करे वह सफल होता है॥

अनुवाद: वह नहरों के पास लगे हरे-भरे वृक्ष जैसा है; सही समय पर फल देता है और उसके पत्ते नहीं सूखते। वह जो भी करता है उसमें सफलता पाता है।

व्याख्या:
– वचन उसकी जड़ों को मजबूत रखता है, जैसे पानी वृक्ष को पोषण देता है।
– वह अपने समय में फलता है — परमेश्वर सही समय पर उसके लिए मार्ग खोलता है।
– सफलता उसके प्रयास से नहीं, परमेश्वर की कृपा से आती है।

1:4

दुष्ट लोग ऐसे नहीं होते, वे उस भूसी के समान होते हैं, जो पवन से उड़ाई जाती है।

अनुवाद: दुष्ट भूसे की तरह होते हैं जिसे हवा जहाँ चाहे उड़ा देती है।

व्याख्या:
– भूसा हल्का, अस्थिर और बेकार होता है — यही दुष्टों का जीवन है।
– उनमें स्थिरता का कोई आधार नहीं होता।
– उनका दिखावा थोड़ी-सी हवा से उड़ जाता है।

1:5

इस कारण दुष्ट लोग अदालत में स्थिर न रह सकेंगे, और न पापी धर्मियों की मण्डली में ठहरेंगे;

अनुवाद: न्याय के दिन दुष्ट टिक नहीं पाएंगे और पापी धर्मियों की संगति में स्थिर नहीं रह सकेंगे।

व्याख्या:
– परमेश्वर का न्याय किसी को पक्षपात नहीं देता।
– धर्मियों की मण्डली में स्थान चरित्र और विश्वास के कारण मिलता है।
– दुष्ट अपनी चालों के कारण स्थिर नहीं रह पाते।

1:6

क्योंकि यहोवा धर्मियों का मार्ग जानता है, परन्तु दुष्टों का मार्ग नाश हो जाएगा॥

अनुवाद: यहोवा धर्मियों के मार्ग की देखभाल करता है, पर दुष्टों का मार्ग नाश की ओर जाता है।

व्याख्या:
– यहोवा जानता है = वह मार्गदर्शन, सुरक्षा और देखभाल करता है।
– धर्मी सुरक्षित है क्योंकि परमेश्वर उसके साथ है।
– दुष्टों का अंत हमेशा नाश, बिखराव और हानि में होता है।

Saturday, 11 October 2025

जीवन की पुस्तक में नाम लिखा रहे | Revelation 3:5 Hindi Message | Let Your Name Remain in the Book of Life

✝️ जीवन की पुस्तक में नाम लिखा रहे | Let Your Name Remain in the Book of Life

Bible Verse:

प्रकाशितवाक्य 3:5 — “जो जय पाए उसे इसी प्रकार श्वेत वस्त्र पहिनाया जाएगा और मैं उसका नाम जीवन की पुस्तक में से किसी रीति से न काटूंगा, पर उसका नाम अपने पिता और उसके स्वर्गदूतों के साम्हने मान लूंगा।”

 1. जय पानेवाले के जीवन की पहचान

1️⃣ जो जय पाए... – इसका अर्थ क्या है?

“जय पाना” का अर्थ है — पाप, प्रलोभन, संसार और शैतान पर विजय पाना।

यह उन लोगों की बात है जो अपने विश्वास पर अटल रहते हैं, चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों।

📖 1 यूहन्ना 5:4

“क्योंकि जो कोई परमेश्वर से जन्मा है वह संसार पर जय पाता है; और वह जय जिससे हम ने संसार पर जय पाई है, हमारा विश्वास है।”

व्याख्या:

संसार की चमक, पाप का आकर्षण और शैतान की चालें हर किसी को गिराने की कोशिश करती हैं।

परंतु जो व्यक्ति यीशु पर स्थिर विश्वास रखता है, वही जय पाता है।

जय पाने के लिए हमें प्रतिदिन आत्मिक युद्ध में स्थिर रहना होता है।

2️⃣ श्वेत वस्त्र पहिनाया जाएगा – इसका अर्थ क्या है?

श्वेत वस्त्र पवित्रता, धार्मिकता और उद्धार का प्रतीक है।

📖 यशायाह 1:18 —

“यदि तुम्हारे पाप लाल रंग के हों तो वे हिम के समान उजले हो जाएंगे।”

📖 प्रकाशितवाक्य 7:14 —

“उन्होंने अपने वस्त्र धोकर मेम्ने के लोहू में उजले किए।”

व्याख्या:

श्वेत वस्त्र का अर्थ है कि व्यक्ति ने अपने जीवन को पाप से धोकर शुद्ध किया है।

केवल यीशु के लहू से यह संभव है।

जो प्रभु पर भरोसा रखता है, उसका जीवन स्वच्छ और चमकदार बन जाता है।

 3. आत्मिक रूप से जागृत रहना

यही अध्याय (प्रकाशितवाक्य 3:1-6) सर्दिस की कलीसिया को चेतावनी देता है —

“तू जीता तो कहता है, परंतु मरा हुआ है।”

इसका मतलब है — बाहर से धार्मिक दिखना, पर अंदर आत्मिक रूप से ठंडा हो जाना।

📖 रोमियों 13:11 —

“अब समय है कि तुम नींद से जागो; क्योंकि अब हमारा उद्धार उस समय से निकट है जब हमने विश्वास किया था।”

व्याख्या:

हमारा नाम जीवन की पुस्तक में तभी बना रहेगा, जब हम आत्मिक रूप से जीवित रहेंगे —

प्रार्थना, वचन, प्रेम और सेवा में।

 2. जीवन की पुस्तक और स्वर्ग में स्वीकार्यता

4️⃣ “मैं उसका नाम जीवन की पुस्तक में से किसी रीति से न काटूंगा।”

जीवन की पुस्तक (Book of Life) वह पवित्र सूची है जिसमें उन सबके नाम लिखे हैं जिन्होंने यीशु मसीह को अपना उद्धारकर्ता स्वीकार किया है।

📖 फिलिप्पियों 4:3 —

“जिनके नाम जीवन की पुस्तक में लिखे हैं।”

📖 निर्गमन 32:32-33 —

मूसा ने कहा, “यदि तू उनका पाप न क्षमा करेगा तो मेरा नाम अपनी पुस्तक से मिटा दे।”

व्याख्या:

परमेश्वर की इस पुस्तक में नाम लिखा होना अनन्त जीवन का प्रतीक है।

पर जो व्यक्ति पाप में लौट जाता है, और पश्चाताप नहीं करता, उसका नाम मिटाया जा सकता है।

परंतु प्रभु यीशु का वादा है — “जो जय पाएगा, उसका नाम कभी नहीं काटा जाएगा।”

5️⃣ “उसका नाम अपने पिता और स्वर्गदूतों के साम्हने मान लूंगा।”

यह परमेश्वर की ओर से सार्वजनिक सम्मान और स्वीकार्यता है।

📖 मत्ती 10:32 —

“जो मनुष्यों के साम्हने मेरा अंगीकार करेगा, मैं भी उसे अपने पिता के साम्हने अंगीकार करूंगा।”

व्याख्या:

जब हम इस पृथ्वी पर यीशु को स्वीकार करते हैं, वह हमें स्वर्ग में स्वीकार करता है।

यह एक अनन्त पुरस्कार है — जब यीशु हमारे नाम को स्वर्ग में घोषित करेगा,

“यह मेरा है, यह विजेता है।”

 6. आज के समय में संदेश

जय पाने के लिए हमें संसार से अलग जीवन जीना है।

हमें अपने विश्वास में दृढ़ रहना है, चाहे कितनी भी कठिनाई क्यों न आए।

हमें प्रतिदिन अपने हृदय को पवित्र रखना है ताकि हमारा नाम जीवन की पुस्तक में बना रहे।

📖 2 कुरिन्थियों 7:1 —

“आओ, हम अपने आप को शरीर और आत्मा की सब मलिनता से शुद्ध करें, और परमेश्वर का भय मानकर पवित्रता को सिद्ध करें।”

🙏  (Conclusion)

जो जय पाएगा वही श्वेत वस्त्र धारण करेगा।

उसका नाम जीवन की पुस्तक में स्थायी रहेगा।

और प्रभु यीशु स्वयं उसके नाम को पिता के सामने स्वीकार करेगा।

आइए हम अपने जीवन की परीक्षा करें —

क्या हम वास्तव में जय पा रहे हैं?

क्या हमारा नाम जीवन की पुस्तक में बना रहेगा?

यदि हम प्रभु से प्रेम रखते हैं, पवित्र जीवन जीते हैं, और अंत तक स्थिर रहते हैं,

तो एक दिन वह हमें श्वेत वस्त्र पहनाकर कहेगा —

“शाबाश, भले और विश्वासयोग्य दास।”

📖 प्रकाशितवाक्य 2:10 — “मृत्यु तक विश्वासयोग्य रह, तब मैं तुझे जीवन का मुकुट दूंगा।”

📖 मत्ती 24:13 — “पर जो अंत तक बना रहेगा

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Thursday, 9 October 2025

बपतिस्मा किसके नाम से लिया जाता है? | Baptism in the Name of Jesus Christ | Pastor Emmanuel

बपतिस्मा किसके नाम से लिया जाता है? | <a target="_blank" href="https://www.google.com/search?ved=1t:260882&q=define+<a target="_blank" href="https://www.google.com/search?ved=1t:260882&q=define+Baptism&bbid=2009619181704892186&bpid=3328138657355433106" data-preview>Baptism</a>&bbid=2009619181704892186&bpid=3328138657355433106" data-preview>Baptism</a> in the Name of <a target="_blank" href="https://www.google.com/search?ved=1t:260882&q=Jesus+Christ&bbid=2009619181704892186&bpid=3328138657355433106" data-preview><a target="_blank" href="https://www.google.com/search?ved=1t:260882&q=Jesus+Christ&bbid=2009619181704892186&bpid=3328138657355433106" data-preview>Jesus Christ</a></a>

✝️ बपतिस्मा किसके नाम से लिया जाता है? | Baptism in the Name of Jesus Christ

🔹 प्रस्तावना

बपतिस्मा (Baptism) केवल एक धार्मिक रिवाज़ नहीं है, बल्कि यह विश्वास और आज्ञाकारिता का प्रतीक है। यह हमारे पुराने जीवन से पश्चाताप करके नए जीवन में प्रवेश का सार्वजनिक घोषणा है। बहुत से लोग यह प्रश्न पूछते हैं कि — "बपतिस्मा किसके नाम से लिया जाना चाहिए?"
इस प्रश्न का उत्तर हमें स्वयं बाइबल देती है।

🔹 बाइबल में बपतिस्मा का आदेश

मत्ती 28:19
“इसलिये तुम जाकर सब जातियों को चेला बनाओ, और उन्हें पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो।”

यहाँ प्रभु यीशु मसीह ने अपने चेलों को सीधा आदेश दिया कि वे सब जातियों को सुसमाचार सुनाएँ और उन्हें पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दें।

पर ध्यान दीजिए — “नामों” नहीं, बल्कि “नाम” (एकवचन) लिखा गया है। इसका अर्थ यह है कि इन तीनों — पिता, पुत्र, और पवित्र आत्मा — का एक ही नाम है।

🔹 वह एक नाम क्या है?

प्रेरितों के काम 2:38
“पतरस ने उनसे कहा, मन फिराओ, और तुम में से हर एक व्यक्ति यीशु मसीह के नाम से बपतिस्मा लो, ताकि तुम्हारे पाप क्षमा हों, और तुम पवित्र आत्मा का दान पाओ।”

यहाँ स्पष्ट लिखा है कि प्रेरितों ने किसी अन्य नाम से नहीं, बल्कि यीशु मसीह के नाम से बपतिस्मा दिया।

क्योंकि यीशु ही वह नाम है जो पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा में प्रकट हुआ है।
- पिता — परमेश्वर का आत्मा है जो अदृश्य है।
- पुत्र — वह देह है जिसमें परमेश्वर प्रकट हुआ।
- पवित्र आत्मा — वह शक्ति है जो अब हमारे भीतर कार्य करती है।

और यह तीनों एक ही हैं — यीशु मसीह में पूर्ण परमेश्वर का निवास है।

🔹 बाइबल के अनुसार बपतिस्मा का उदाहरण

  • प्रेरितों के काम 8:16
    “क्योंकि वह (पवित्र आत्मा) उन में से किसी पर नहीं उतरा था, केवल वे प्रभु यीशु के नाम से बपतिस्मा पाए थे।”
  • प्रेरितों के काम 10:48
    “और उसने आज्ञा दी कि वे यीशु मसीह के नाम से बपतिस्मा लें।”
  • प्रेरितों के काम 19:5
    “यह सुनकर उन्होंने प्रभु यीशु के नाम से बपतिस्मा लिया।”

इन सब वचनों में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि प्रेरितों और शुरुआती विश्वासियों ने सदा यीशु मसीह के नाम से बपतिस्मा लिया।

🔹 क्यों यीशु के नाम से बपतिस्मा?

  1. क्योंकि यीशु ही वह नाम है जिसमें उद्धार है।
    प्रेरितों के काम 4:12
    “क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया है, जिसके द्वारा हम उद्धार पा सकें।”
  2. क्योंकि यीशु में ही परमेश्वर का पूरा स्वरूप वास करता है।
    कुलुस्सियों 2:9
    “क्योंकि उसी में परमेश्वरत्व की सारी परिपूर्णता देह रूप में वास करती है।”
  3. क्योंकि यीशु का नाम ही पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा का नाम है।
    यूहन्ना 5:43
    “मैं अपने पिता के नाम से आया हूं।”
    यूहन्ना 14:26
    “परन्तु सहायक, अर्थात पवित्र आत्मा, जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा…”

    इसका अर्थ है कि पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा — तीनों यीशु के नाम में एक हैं।

🔹 बपतिस्मा का महत्व

बपतिस्मा केवल पानी में डुबकी लेना नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक पुनर्जन्म का प्रतीक है।
जब हम बपतिस्मा लेते हैं, हम यह स्वीकार करते हैं कि
- हमारा पुराना मनुष्य यीशु के साथ मर गया,
- और अब हम नए जीवन में पुनः जीवित हुए हैं।

रोमियों 6:4
“इसलिये हम बपतिस्मा के द्वारा उसके साथ मृत्यु में गाड़े गए, ताकि जैसे मसीह पिता की महिमा के द्वारा मरे हुओं में से जिलाया गया, वैसे ही हम भी नये जीवन में चलें।”

🔹 बपतिस्मा का सही तरीका

  • पश्चाताप करें – पहले अपने पापों को स्वीकार करें और उनसे दूर हों।
  • यीशु मसीह में विश्वास करें – मानें कि वही आपका उद्धारकर्ता और प्रभु है।
  • यीशु मसीह के नाम से बपतिस्मा लें – पूर्ण डुबकी देकर, पुराने जीवन को दफन करें।
  • पवित्र आत्मा प्राप्त करें – ताकि आप नया जीवन मसीह में चला सकें।

🔹 निष्कर्ष

बाइबल के अनुसार, बपतिस्मा किसी धार्मिक परंपरा का हिस्सा नहीं बल्कि यीशु मसीह की आज्ञा का पालन है।
पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा का नाम एक ही है — यीशु मसीह।
इसलिए सच्चा बपतिस्मा वही है जो यीशु मसीह के नाम से लिया जाए, ताकि हमारे पाप क्षमा हों और हम नया जीवन प्राप्त करें।

🔹 मुख्य वचन सारांश

  • मत्ती 28:19
  • प्रेरितों के काम 2:38
  • प्रेरितों के काम 8:16
  • प्रेरितों के काम 10:48
  • प्रेरितों के काम 19:5
  • प्रेरितों के काम 4:12
  • कुलुस्सियों 2:9
  • रोमियों 6:4

🔹 निष्कर्ष प्रार्थना 🙏

“हे प्रभु यीशु मसीह, मैं तेरा धन्यवाद करता हूँ कि तूने मुझे सत्य जानने का अवसर दिया। मुझे बपतिस्मा की सच्चाई समझा और अपने नाम की सामर्थ दिखाई।
प्रभु, मुझे अपने वचन में स्थिर कर, ताकि मैं तेरी आज्ञा का पालन कर सकूँ। मेरे पापों को क्षमा कर और मुझे अपने पवित्र आत्मा से भर दे।
मैं अपना जीवन तेरे हाथों में सौंपता हूँ।
यीशु मसीह के नाम से — आमीन।”

Friday, 26 September 2025

अन्य भाषाओं का वरदान – पवित्र आत्मा का अद्भुत कार्य | Bible Study in Hindi

भाषाओं का वरदान – पवित्र आत्मा का अद्भुत कार्य

भाषाओं का वरदान – पवित्र आत्मा का अद्भुत कार्य

परिचय: पवित्र आत्मा के वरदानों में “अन्य भाषा” या “भाषाओं का वरदान” (Gift of Tongues) एक विशेष और अद्भुत वरदान है। यह केवल किसी मानवीय भाषा को सीखना नहीं, बल्कि पवित्र आत्मा की सामर्थ से परमेश्वर की महिमा करना और आत्मिक निर्माण पाना है। बाइबल हमें बताती है कि यह वरदान आरम्भिक कलीसिया में पवित्र आत्मा के आगमन का स्पष्ट चिन्ह था और आज भी आत्मिक जीवन में गहरी भूमिका निभाता है।

1. पवित्र आत्मा का वादा और पूर्ति

प्रेरितों के काम 2:1-4
“जब पिन्तेकुस्त का दिन आया, तो वे सब एक ही स्थान पर इकट्ठे थे। तभी अचानक आकाश से ऐसा शब्द हुआ, जैसे प्रचण्ड आँधी चलने का शब्द होता है, और उस पूरे घर को भर लिया… और वे सब पवित्र आत्मा से भर गए और आत्मा ने जैसा उन्हें बोलने की शक्ति दी, वैसी ही वे अलग-अलग भाषाओं में बोलने लगे।”

यह पहला अवसर था जब पवित्र आत्मा ने कलीसिया को अन्य भाषाओं में बोलने की सामर्थ दी। इसका उद्देश्य था कि लोग परमेश्वर के अद्भुत कार्यों को अपने-अपने मातृभाषा में सुन सकें (प्रेरितों 2:11)।

2. भाषाओं का उद्देश्य

1 कुरिन्थियों 14:2
“जो अन्य भाषा में बोलता है, वह मनुष्यों से नहीं, परमेश्वर से बातें करता है; क्योंकि कोई नहीं समझता, परन्तु वह आत्मा में भेद भरे हुए वचन बोलता है।”
  • परमेश्वर से सीधे संवाद: यह प्रार्थना का आत्मिक तरीका है।
  • व्यक्तिगत आत्मिक निर्माण: 1 कुरिन्थियों 14:4 – “जो अन्य भाषा में बोलता है, वह अपनी ही आत्मा का निर्माण करता है।”

3. व्यवस्था और कलीसिया में प्रयोग

1 कुरिन्थियों 14:27-28
“यदि कोई अन्य भाषा में बोलता है, तो दो या सबसे अधिक तीन व्यक्ति क्रम से बोलें, और कोई उसका अर्थ बताए; पर यदि कोई अर्थ बताने वाला न हो, तो वह सभा में चुप रहे और अपने मन में और परमेश्वर से बातें करे।”

पवित्र आत्मा का वरदान अनुशासन और शांति में उपयोग होना चाहिए। कलीसिया में अर्थ बताने वाला हो तो ही सार्वजनिक रूप से भाषाओं में बोलें।

4. आत्मिक जीवन में लाभ

रोमियों 8:26
“इसी प्रकार आत्मा भी हमारी दुर्बलताओं में सहायता करता है; क्योंकि हम नहीं जानते कि हमें कैसी प्रार्थना करनी चाहिए, पर आत्मा स्वयं ऐसी आहें भरकर, जिन्हें शब्दों में नहीं कह सकते, हमारे लिये बिनती करता है।”

यह प्रार्थना में गहराई, आत्मा की संगति और आत्मिक युद्ध में सामर्थ प्रदान करता है।

5. आज के मसीही के लिए संदेश

1 कुरिन्थियों 12:7,11
“आत्मा का प्रगटीकरण हर एक को लाभ के लिये दिया जाता है… परन्तु यह सब एक ही आत्मा करता है, और वही अपनी इच्छा अनुसार हर एक को अलग-अलग बांटता है।”

भाषाओं का वरदान हर विश्वासियों के लिए खुला है, परन्तु यह परमेश्वर की इच्छा और आत्मा की अगुवाई पर निर्भर है।

व्यावहारिक सुझाव

  • पवित्र आत्मा की भरपूरी के लिए नियमित प्रार्थना और उपवास।
  • बाइबल अध्ययन और कलीसिया की संगति में बने रहना।
  • वरदान के पीछे नहीं, वरदान देने वाले—यीशु मसीह—के पीछे लगे रहना।

निष्कर्ष

भाषाओं का वरदान केवल आत्मिक अनुभव नहीं, बल्कि परमेश्वर की महिमा, व्यक्तिगत आत्मिक उन्नति और कलीसिया की भलाई के लिए है। पवित्र आत्मा आज भी विश्वासियों को सामर्थ देता है। हमें हृदय खोलकर परमेश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए कि वह अपनी इच्छा अनुसार हमें यह वरदान दे और इसके सही प्रयोग में मार्गदर्शन करे।

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