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Wednesday, 21 January 2026

परमेश्वर आत्मा है – आत्मा और सच्चाई से भजन करें | Powerful Christian Message in Hindi

आत्मा और सच्चाई से भजन करने वाले

📖 मुख्य वचन
“परमेश्वर आत्मा है, और अवश्य है कि उसके भजन करने वाले आत्मा और सच्चाई से भजन करें।”
(यूहन्ना 4:24)


🔹 1. परमेश्वर आत्मा है – उसकी पहचान और स्वभाव

व्याख्या:
यह वचन हमें परमेश्वर के स्वभाव को स्पष्ट रूप से समझाता है। परमेश्वर आत्मा है, अर्थात वह भौतिक सीमाओं में बंधा हुआ नहीं है। वह हर स्थान पर उपस्थित रहने वाला, सब कुछ जानने वाला और हर समय कार्य करने वाला प्रभु है। वह मनुष्य की बाहरी दशा को नहीं, बल्कि उसके भीतरी मन और आत्मा की स्थिति को देखता है।

जब हम यह समझते हैं कि परमेश्वर आत्मा है, तब हमारी आराधना का दृष्टिकोण बदल जाता है। तब हम केवल औपचारिकता या रीति से नहीं, बल्कि पूरे हृदय से परमेश्वर के सामने झुकते हैं। ऐसा भजन केवल शब्दों का उच्चारण नहीं, बल्कि आत्मा की गहराई से निकली हुई आराधना होती है।

📖 2 कुरिन्थियों 3:17
“प्रभु आत्मा है; और जहाँ प्रभु का आत्मा है वहाँ स्वतंत्रता है।”

📖 भजन संहिता 34:18
“यहोवा टूटे हुए मन वालों के निकट रहता है, और पिसे हुए मन वालों का उद्धार करता है।”


🔹 2. भजन का अर्थ – सम्पूर्ण जीवन का समर्पण

व्याख्या:
भजन केवल गीत गाने या शब्द बोलने तक सीमित नहीं है। बाइबल के अनुसार भजन का अर्थ है अपने पूरे जीवन को परमेश्वर के अधीन कर देना। जब मनुष्य अपने विचार, इच्छाएँ, योजनाएँ और मार्ग परमेश्वर को सौंप देता है, तब उसका जीवन स्वयं एक भजन बन जाता है।

परमेश्वर ऐसे भजन को स्वीकार करता है जो आज्ञाकारिता और नम्रता से भरा हो। यदि मनुष्य अपने जीवन में परमेश्वर की इच्छा को मानने से इनकार करता है, तो केवल शब्दों का भजन परमेश्वर को प्रसन्न नहीं करता।

📖 भजन संहिता 95:6
“आओ, हम झुककर दण्डवत करें; अपने कर्ता यहोवा के सम्मुख घुटने टेकें।”

📖 रोमियों 12:1
“अपने शरीरों को जीवित, पवित्र और परमेश्वर को भाता हुआ बलिदान करके चढ़ाओ; यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है।”

📖 1 शमूएल 15:22
“आज्ञा मानना बलिदान से और कान लगाना मेढ़ों की चर्बी से कहीं अच्छा है।”


🔹 3. आत्मा से भजन करना – जीवित और सामर्थी आराधना

व्याख्या:
आत्मा से भजन करने का अर्थ है ऐसा भजन जो केवल बुद्धि या भावना तक सीमित न रहे, बल्कि परमेश्वर के आत्मा की अगुवाई में हो। जब मनुष्य आत्मा से भजन करता है, तब वह परमेश्वर के साथ गहरे संबंध में प्रवेश करता है।

ऐसा भजन बोझ नहीं लगता, बल्कि आत्मा को ताज़गी और शांति देता है। आत्मा से किया गया भजन मनुष्य के जीवन को बदलता है, उसे सामर्थ देता है और विश्वास में स्थिर करता है।

📖 रोमियों 8:26
“इसी रीति से आत्मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है।”

📖 इफिसियों 5:18-19
“आत्मा से परिपूर्ण होते जाओ; और भजन, स्तुति और आत्मिक गीत गाया करो।”

📖 गलातियों 5:25
“यदि हम आत्मा से जीवित हैं, तो आत्मा के अनुसार चलें भी।”


🔹 4. सच्चाई से भजन करना – वचन के अनुसार जीवन

व्याख्या:
सच्चाई से भजन करने का अर्थ है ऐसा जीवन जीना जो परमेश्वर के वचन के अनुसार हो। यदि हमारा जीवन वचन से अलग है और हमारा भजन अलग, तो वह भजन अधूरा रह जाता है। सच्चाई से भजन तब होता है जब हमारा आचरण, सोच और निर्णय परमेश्वर के वचन के अधीन होते हैं।

परमेश्वर का वचन सत्य है और वही मनुष्य के जीवन को पवित्र करता है। जब कोई व्यक्ति वचन में स्थिर रहता है, तब उसका भजन भी सच्चा और स्वीकार्य बनता है।

📖 यूहन्ना 17:17
“सच्चाई से उन्हें पवित्र कर; तेरा वचन सत्य है।”

📖 भजन संहिता 119:105
“तेरा वचन मेरे पांव के लिए दीपक और मेरे मार्ग के लिए उजियाला है।”

📖 भजन संहिता 119:160
“तेरे वचन का सार सत्य है।”


🔹 5. परमेश्वर की खोज – सच्चे भजन करने वालों के लिए

व्याख्या:
बाइबल यह स्पष्ट करती है कि परमेश्वर स्वयं ऐसे लोगों को खोजता है जो आत्मा और सच्चाई से भजन करें। वह केवल बाहरी भीड़ से प्रसन्न नहीं होता, बल्कि उन हृदयों को ढूंढ़ता है जो पूरी रीति से उसके प्रति समर्पित हों।

यह एक अद्भुत सच्चाई है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर मनुष्य के हृदय की खोज करता है, ताकि वह उसे सामर्थ और आशीष दे सके।

📖 यूहन्ना 4:23
“पिता ऐसे भजन करने वालों को ढूंढ़ता है जो आत्मा और सच्चाई से भजन करें।”

📖 2 इतिहास 16:9
“यहोवा की दृष्टि सारी पृथ्वी पर लगी रहती है कि जिनका मन उसकी ओर पूरा है, उन्हें वह सामर्थ दे।”


🔹 6. आज के समय के लिए आत्मिक सीख

व्याख्या:
आज के समय में यह वचन हमें आत्मिक जांच करने के लिए बुलाता है। क्या हमारा भजन केवल परंपरा बन गया है, या वह वास्तव में आत्मा और सच्चाई से निकल रहा है? परमेश्वर आज भी ऐसे भजन से प्रसन्न होता है जो टूटे और नम्र हृदय से किया गया हो।

📖 भजन संहिता 51:17
“टूटा हुआ और पिसा हुआ मन—ऐसा बलिदान परमेश्वर तुच्छ नहीं जानता।”

📖 यशायाह 29:13
“ये लोग मुँह से मेरा आदर करते हैं, पर उनका मन मुझ से दूर रहता है।”


🙏 समापन विचार

परमेश्वर आत्मा है।
वह हमारे शब्दों से अधिक हमारे हृदय को देखता है।
जब हम आत्मा और सच्चाई से भजन करते हैं,
तब हमारा भजन केवल सुनाई नहीं देता,
बल्कि परमेश्वर के सिंहासन तक पहुँचता है।

आओ, हम ऐसे भजन करने वाले बनें
जिनका जीवन स्वयं परमेश्वर की आराधना बन जाए।

Powerful Christian Message in Hindi

परमेश्वर आत्मा है – आत्मा और सच्चाई से भजन करने का गहरा अर्थ

मुख्य वचन:

“परमेश्वर आत्मा है, और अवश्य है कि उसके भजन करने वाले आत्मा और सच्चाई से भजन करें।”
(यूहन्ना 4:24)


भूमिका (Introduction)

यह वचन हमें यह सिखाता है कि प्रभु की आराधना केवल बाहरी रीति या शब्दों तक सीमित नहीं है। परमेश्वर आत्मा है, इसलिए वह हमारे हृदय की दशा, हमारी सच्चाई और हमारी आत्मा की पुकार को देखता है। आज बहुत से लोग प्रभु का नाम लेते हैं, पर आत्मा और सच्चाई से भजन करने वाले बहुत कम हैं।


परमेश्वर आत्मा है – इसका अर्थ

जब बाइबल कहती है कि परमेश्वर आत्मा है, तो इसका अर्थ यह है कि वह सीमाओं में बंधा हुआ नहीं है। वह हर स्थान पर उपस्थित है, हर मन को जानता है और हर आह को सुनता है।

बाइबल वचन:
“क्या मैं ही निकट का परमेश्वर हूँ और दूर का नहीं?”
(यिर्मयाह 23:23)

इसलिए हमें प्रभु के पास आने के लिए किसी विशेष स्थान या समय की आवश्यकता नहीं होती। जहाँ सच्चा हृदय पुकारता है, वहाँ प्रभु उपस्थित होता है।


आत्मा से भजन करने का अर्थ

आत्मा से भजन करने का अर्थ है – पूरे मन, पूरे विश्वास और पूरे समर्पण के साथ प्रभु की आराधना करना। यह केवल होठों का भजन नहीं बल्कि टूटे हुए हृदय की पुकार है।

बाइबल वचन:
“हे परमेश्वर, तू टूटे और पिसे हुए मन को तुच्छ नहीं जानता।”
(भजन संहिता 51:17)

जब हम अपनी कमजोरी, पीड़ा और आवश्यकता के साथ प्रभु के सामने आते हैं, तभी हमारा भजन आत्मा में होता है।


सच्चाई से भजन करने का अर्थ

सच्चाई से भजन करने का अर्थ है – बिना दिखावे के, बिना कपट के और बिना दोहरे जीवन के प्रभु के सामने आना। प्रभु झूठे होंठों से नहीं, सच्चे हृदय से की गई प्रार्थना को स्वीकार करता है।

बाइबल वचन:
“जो लोग सच्चे मन से यहोवा को पुकारते हैं, यहोवा उनके निकट रहता है।”
(भजन संहिता 145:18)

जब हमारा जीवन और हमारे शब्द एक समान होते हैं, तब हमारा भजन सच्चाई में होता है।


भजन का प्रभाव हमारे जीवन में

आत्मा और सच्चाई से किया गया भजन हमारे जीवन को बदल देता है। भजन से भय दूर होता है, आत्मिक बल मिलता है और विश्वास दृढ़ होता है।

बाइबल वचन:
“यहोवा मेरा बल और ढाल है; मेरा मन उस पर भरोसा रखता है।”
(भजन संहिता 28:7)

जब हम सच्चे मन से प्रभु की आराधना करते हैं, तो समस्याएँ छोटी और प्रभु महान दिखाई देने लगता है।


आज के समय के लिए संदेश

आज प्रभु हमसे यह नहीं पूछता कि हमने कितना ऊँचा गाया, बल्कि यह पूछता है कि क्या हमने सच्चे मन से गाया। यह वचन हमें अपने आत्मिक जीवन की जाँच करने के लिए बुलाता है।

बाइबल वचन:
“आज यदि तुम उसका शब्द सुनो, तो अपने मन कठोर न करो।”
(इब्रानियों 3:15)


समापन प्रार्थना (Pastor Prayer)

अब मैं एक सेवक के रूप में प्रार्थना करता हूँ। हे प्रभु यीशु, तू आत्मा है और सच्चाई का स्रोत है। आज हर उस व्यक्ति को छू जो टूटे मन से तुझे खोज रहा है।

हे प्रभु, जो रोगी हैं उन्हें चंगा कर, जो निराश हैं उन्हें आशा दे, जो बंधन में हैं उन्हें स्वतंत्र कर।

हमारे भजन को औपचारिकता से निकालकर आत्मा और सच्चाई में बदल दे। हमारा जीवन तेरी महिमा के लिए उपयोग कर।

यीशु मसीह के नाम में प्रार्थना करते हैं, आमीन।

Saturday, 11 October 2025

जीवन की पुस्तक में नाम लिखा रहे | Revelation 3:5 Hindi Message | Let Your Name Remain in the Book of Life

✝️ जीवन की पुस्तक में नाम लिखा रहे | Let Your Name Remain in the Book of Life

Bible Verse:

प्रकाशितवाक्य 3:5 — “जो जय पाए उसे इसी प्रकार श्वेत वस्त्र पहिनाया जाएगा और मैं उसका नाम जीवन की पुस्तक में से किसी रीति से न काटूंगा, पर उसका नाम अपने पिता और उसके स्वर्गदूतों के साम्हने मान लूंगा।”

 1. जय पानेवाले के जीवन की पहचान

1️⃣ जो जय पाए... – इसका अर्थ क्या है?

“जय पाना” का अर्थ है — पाप, प्रलोभन, संसार और शैतान पर विजय पाना।

यह उन लोगों की बात है जो अपने विश्वास पर अटल रहते हैं, चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों।

📖 1 यूहन्ना 5:4

“क्योंकि जो कोई परमेश्वर से जन्मा है वह संसार पर जय पाता है; और वह जय जिससे हम ने संसार पर जय पाई है, हमारा विश्वास है।”

व्याख्या:

संसार की चमक, पाप का आकर्षण और शैतान की चालें हर किसी को गिराने की कोशिश करती हैं।

परंतु जो व्यक्ति यीशु पर स्थिर विश्वास रखता है, वही जय पाता है।

जय पाने के लिए हमें प्रतिदिन आत्मिक युद्ध में स्थिर रहना होता है।

2️⃣ श्वेत वस्त्र पहिनाया जाएगा – इसका अर्थ क्या है?

श्वेत वस्त्र पवित्रता, धार्मिकता और उद्धार का प्रतीक है।

📖 यशायाह 1:18 —

“यदि तुम्हारे पाप लाल रंग के हों तो वे हिम के समान उजले हो जाएंगे।”

📖 प्रकाशितवाक्य 7:14 —

“उन्होंने अपने वस्त्र धोकर मेम्ने के लोहू में उजले किए।”

व्याख्या:

श्वेत वस्त्र का अर्थ है कि व्यक्ति ने अपने जीवन को पाप से धोकर शुद्ध किया है।

केवल यीशु के लहू से यह संभव है।

जो प्रभु पर भरोसा रखता है, उसका जीवन स्वच्छ और चमकदार बन जाता है।

 3. आत्मिक रूप से जागृत रहना

यही अध्याय (प्रकाशितवाक्य 3:1-6) सर्दिस की कलीसिया को चेतावनी देता है —

“तू जीता तो कहता है, परंतु मरा हुआ है।”

इसका मतलब है — बाहर से धार्मिक दिखना, पर अंदर आत्मिक रूप से ठंडा हो जाना।

📖 रोमियों 13:11 —

“अब समय है कि तुम नींद से जागो; क्योंकि अब हमारा उद्धार उस समय से निकट है जब हमने विश्वास किया था।”

व्याख्या:

हमारा नाम जीवन की पुस्तक में तभी बना रहेगा, जब हम आत्मिक रूप से जीवित रहेंगे —

प्रार्थना, वचन, प्रेम और सेवा में।

 2. जीवन की पुस्तक और स्वर्ग में स्वीकार्यता

4️⃣ “मैं उसका नाम जीवन की पुस्तक में से किसी रीति से न काटूंगा।”

जीवन की पुस्तक (Book of Life) वह पवित्र सूची है जिसमें उन सबके नाम लिखे हैं जिन्होंने यीशु मसीह को अपना उद्धारकर्ता स्वीकार किया है।

📖 फिलिप्पियों 4:3 —

“जिनके नाम जीवन की पुस्तक में लिखे हैं।”

📖 निर्गमन 32:32-33 —

मूसा ने कहा, “यदि तू उनका पाप न क्षमा करेगा तो मेरा नाम अपनी पुस्तक से मिटा दे।”

व्याख्या:

परमेश्वर की इस पुस्तक में नाम लिखा होना अनन्त जीवन का प्रतीक है।

पर जो व्यक्ति पाप में लौट जाता है, और पश्चाताप नहीं करता, उसका नाम मिटाया जा सकता है।

परंतु प्रभु यीशु का वादा है — “जो जय पाएगा, उसका नाम कभी नहीं काटा जाएगा।”

5️⃣ “उसका नाम अपने पिता और स्वर्गदूतों के साम्हने मान लूंगा।”

यह परमेश्वर की ओर से सार्वजनिक सम्मान और स्वीकार्यता है।

📖 मत्ती 10:32 —

“जो मनुष्यों के साम्हने मेरा अंगीकार करेगा, मैं भी उसे अपने पिता के साम्हने अंगीकार करूंगा।”

व्याख्या:

जब हम इस पृथ्वी पर यीशु को स्वीकार करते हैं, वह हमें स्वर्ग में स्वीकार करता है।

यह एक अनन्त पुरस्कार है — जब यीशु हमारे नाम को स्वर्ग में घोषित करेगा,

“यह मेरा है, यह विजेता है।”

 6. आज के समय में संदेश

जय पाने के लिए हमें संसार से अलग जीवन जीना है।

हमें अपने विश्वास में दृढ़ रहना है, चाहे कितनी भी कठिनाई क्यों न आए।

हमें प्रतिदिन अपने हृदय को पवित्र रखना है ताकि हमारा नाम जीवन की पुस्तक में बना रहे।

📖 2 कुरिन्थियों 7:1 —

“आओ, हम अपने आप को शरीर और आत्मा की सब मलिनता से शुद्ध करें, और परमेश्वर का भय मानकर पवित्रता को सिद्ध करें।”

🙏  (Conclusion)

जो जय पाएगा वही श्वेत वस्त्र धारण करेगा।

उसका नाम जीवन की पुस्तक में स्थायी रहेगा।

और प्रभु यीशु स्वयं उसके नाम को पिता के सामने स्वीकार करेगा।

आइए हम अपने जीवन की परीक्षा करें —

क्या हम वास्तव में जय पा रहे हैं?

क्या हमारा नाम जीवन की पुस्तक में बना रहेगा?

यदि हम प्रभु से प्रेम रखते हैं, पवित्र जीवन जीते हैं, और अंत तक स्थिर रहते हैं,

तो एक दिन वह हमें श्वेत वस्त्र पहनाकर कहेगा —

“शाबाश, भले और विश्वासयोग्य दास।”

📖 प्रकाशितवाक्य 2:10 — “मृत्यु तक विश्वासयोग्य रह, तब मैं तुझे जीवन का मुकुट दूंगा।”

📖 मत्ती 24:13 — “पर जो अंत तक बना रहेगा

https://www.jesusgroupallworld.org/?m=1


Thursday, 9 October 2025

बपतिस्मा किसके नाम से लिया जाता है? | Baptism in the Name of Jesus Christ | Pastor Emmanuel

बपतिस्मा किसके नाम से लिया जाता है? | <a target="_blank" href="https://www.google.com/search?ved=1t:260882&q=define+<a target="_blank" href="https://www.google.com/search?ved=1t:260882&q=define+Baptism&bbid=2009619181704892186&bpid=3328138657355433106" data-preview>Baptism</a>&bbid=2009619181704892186&bpid=3328138657355433106" data-preview>Baptism</a> in the Name of <a target="_blank" href="https://www.google.com/search?ved=1t:260882&q=Jesus+Christ&bbid=2009619181704892186&bpid=3328138657355433106" data-preview><a target="_blank" href="https://www.google.com/search?ved=1t:260882&q=Jesus+Christ&bbid=2009619181704892186&bpid=3328138657355433106" data-preview>Jesus Christ</a></a>

✝️ बपतिस्मा किसके नाम से लिया जाता है? | Baptism in the Name of Jesus Christ

🔹 प्रस्तावना

बपतिस्मा (Baptism) केवल एक धार्मिक रिवाज़ नहीं है, बल्कि यह विश्वास और आज्ञाकारिता का प्रतीक है। यह हमारे पुराने जीवन से पश्चाताप करके नए जीवन में प्रवेश का सार्वजनिक घोषणा है। बहुत से लोग यह प्रश्न पूछते हैं कि — "बपतिस्मा किसके नाम से लिया जाना चाहिए?"
इस प्रश्न का उत्तर हमें स्वयं बाइबल देती है।

🔹 बाइबल में बपतिस्मा का आदेश

मत्ती 28:19
“इसलिये तुम जाकर सब जातियों को चेला बनाओ, और उन्हें पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो।”

यहाँ प्रभु यीशु मसीह ने अपने चेलों को सीधा आदेश दिया कि वे सब जातियों को सुसमाचार सुनाएँ और उन्हें पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दें।

पर ध्यान दीजिए — “नामों” नहीं, बल्कि “नाम” (एकवचन) लिखा गया है। इसका अर्थ यह है कि इन तीनों — पिता, पुत्र, और पवित्र आत्मा — का एक ही नाम है।

🔹 वह एक नाम क्या है?

प्रेरितों के काम 2:38
“पतरस ने उनसे कहा, मन फिराओ, और तुम में से हर एक व्यक्ति यीशु मसीह के नाम से बपतिस्मा लो, ताकि तुम्हारे पाप क्षमा हों, और तुम पवित्र आत्मा का दान पाओ।”

यहाँ स्पष्ट लिखा है कि प्रेरितों ने किसी अन्य नाम से नहीं, बल्कि यीशु मसीह के नाम से बपतिस्मा दिया।

क्योंकि यीशु ही वह नाम है जो पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा में प्रकट हुआ है।
- पिता — परमेश्वर का आत्मा है जो अदृश्य है।
- पुत्र — वह देह है जिसमें परमेश्वर प्रकट हुआ।
- पवित्र आत्मा — वह शक्ति है जो अब हमारे भीतर कार्य करती है।

और यह तीनों एक ही हैं — यीशु मसीह में पूर्ण परमेश्वर का निवास है।

🔹 बाइबल के अनुसार बपतिस्मा का उदाहरण

  • प्रेरितों के काम 8:16
    “क्योंकि वह (पवित्र आत्मा) उन में से किसी पर नहीं उतरा था, केवल वे प्रभु यीशु के नाम से बपतिस्मा पाए थे।”
  • प्रेरितों के काम 10:48
    “और उसने आज्ञा दी कि वे यीशु मसीह के नाम से बपतिस्मा लें।”
  • प्रेरितों के काम 19:5
    “यह सुनकर उन्होंने प्रभु यीशु के नाम से बपतिस्मा लिया।”

इन सब वचनों में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि प्रेरितों और शुरुआती विश्वासियों ने सदा यीशु मसीह के नाम से बपतिस्मा लिया।

🔹 क्यों यीशु के नाम से बपतिस्मा?

  1. क्योंकि यीशु ही वह नाम है जिसमें उद्धार है।
    प्रेरितों के काम 4:12
    “क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया है, जिसके द्वारा हम उद्धार पा सकें।”
  2. क्योंकि यीशु में ही परमेश्वर का पूरा स्वरूप वास करता है।
    कुलुस्सियों 2:9
    “क्योंकि उसी में परमेश्वरत्व की सारी परिपूर्णता देह रूप में वास करती है।”
  3. क्योंकि यीशु का नाम ही पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा का नाम है।
    यूहन्ना 5:43
    “मैं अपने पिता के नाम से आया हूं।”
    यूहन्ना 14:26
    “परन्तु सहायक, अर्थात पवित्र आत्मा, जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा…”

    इसका अर्थ है कि पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा — तीनों यीशु के नाम में एक हैं।

🔹 बपतिस्मा का महत्व

बपतिस्मा केवल पानी में डुबकी लेना नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक पुनर्जन्म का प्रतीक है।
जब हम बपतिस्मा लेते हैं, हम यह स्वीकार करते हैं कि
- हमारा पुराना मनुष्य यीशु के साथ मर गया,
- और अब हम नए जीवन में पुनः जीवित हुए हैं।

रोमियों 6:4
“इसलिये हम बपतिस्मा के द्वारा उसके साथ मृत्यु में गाड़े गए, ताकि जैसे मसीह पिता की महिमा के द्वारा मरे हुओं में से जिलाया गया, वैसे ही हम भी नये जीवन में चलें।”

🔹 बपतिस्मा का सही तरीका

  • पश्चाताप करें – पहले अपने पापों को स्वीकार करें और उनसे दूर हों।
  • यीशु मसीह में विश्वास करें – मानें कि वही आपका उद्धारकर्ता और प्रभु है।
  • यीशु मसीह के नाम से बपतिस्मा लें – पूर्ण डुबकी देकर, पुराने जीवन को दफन करें।
  • पवित्र आत्मा प्राप्त करें – ताकि आप नया जीवन मसीह में चला सकें।

🔹 निष्कर्ष

बाइबल के अनुसार, बपतिस्मा किसी धार्मिक परंपरा का हिस्सा नहीं बल्कि यीशु मसीह की आज्ञा का पालन है।
पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा का नाम एक ही है — यीशु मसीह।
इसलिए सच्चा बपतिस्मा वही है जो यीशु मसीह के नाम से लिया जाए, ताकि हमारे पाप क्षमा हों और हम नया जीवन प्राप्त करें।

🔹 मुख्य वचन सारांश

  • मत्ती 28:19
  • प्रेरितों के काम 2:38
  • प्रेरितों के काम 8:16
  • प्रेरितों के काम 10:48
  • प्रेरितों के काम 19:5
  • प्रेरितों के काम 4:12
  • कुलुस्सियों 2:9
  • रोमियों 6:4

🔹 निष्कर्ष प्रार्थना 🙏

“हे प्रभु यीशु मसीह, मैं तेरा धन्यवाद करता हूँ कि तूने मुझे सत्य जानने का अवसर दिया। मुझे बपतिस्मा की सच्चाई समझा और अपने नाम की सामर्थ दिखाई।
प्रभु, मुझे अपने वचन में स्थिर कर, ताकि मैं तेरी आज्ञा का पालन कर सकूँ। मेरे पापों को क्षमा कर और मुझे अपने पवित्र आत्मा से भर दे।
मैं अपना जीवन तेरे हाथों में सौंपता हूँ।
यीशु मसीह के नाम से — आमीन।”

Friday, 26 September 2025

अन्य भाषाओं का वरदान – पवित्र आत्मा का अद्भुत कार्य | Bible Study in Hindi

भाषाओं का वरदान – पवित्र आत्मा का अद्भुत कार्य

भाषाओं का वरदान – पवित्र आत्मा का अद्भुत कार्य

परिचय: पवित्र आत्मा के वरदानों में “अन्य भाषा” या “भाषाओं का वरदान” (Gift of Tongues) एक विशेष और अद्भुत वरदान है। यह केवल किसी मानवीय भाषा को सीखना नहीं, बल्कि पवित्र आत्मा की सामर्थ से परमेश्वर की महिमा करना और आत्मिक निर्माण पाना है। बाइबल हमें बताती है कि यह वरदान आरम्भिक कलीसिया में पवित्र आत्मा के आगमन का स्पष्ट चिन्ह था और आज भी आत्मिक जीवन में गहरी भूमिका निभाता है।

1. पवित्र आत्मा का वादा और पूर्ति

प्रेरितों के काम 2:1-4
“जब पिन्तेकुस्त का दिन आया, तो वे सब एक ही स्थान पर इकट्ठे थे। तभी अचानक आकाश से ऐसा शब्द हुआ, जैसे प्रचण्ड आँधी चलने का शब्द होता है, और उस पूरे घर को भर लिया… और वे सब पवित्र आत्मा से भर गए और आत्मा ने जैसा उन्हें बोलने की शक्ति दी, वैसी ही वे अलग-अलग भाषाओं में बोलने लगे।”

यह पहला अवसर था जब पवित्र आत्मा ने कलीसिया को अन्य भाषाओं में बोलने की सामर्थ दी। इसका उद्देश्य था कि लोग परमेश्वर के अद्भुत कार्यों को अपने-अपने मातृभाषा में सुन सकें (प्रेरितों 2:11)।

2. भाषाओं का उद्देश्य

1 कुरिन्थियों 14:2
“जो अन्य भाषा में बोलता है, वह मनुष्यों से नहीं, परमेश्वर से बातें करता है; क्योंकि कोई नहीं समझता, परन्तु वह आत्मा में भेद भरे हुए वचन बोलता है।”
  • परमेश्वर से सीधे संवाद: यह प्रार्थना का आत्मिक तरीका है।
  • व्यक्तिगत आत्मिक निर्माण: 1 कुरिन्थियों 14:4 – “जो अन्य भाषा में बोलता है, वह अपनी ही आत्मा का निर्माण करता है।”

3. व्यवस्था और कलीसिया में प्रयोग

1 कुरिन्थियों 14:27-28
“यदि कोई अन्य भाषा में बोलता है, तो दो या सबसे अधिक तीन व्यक्ति क्रम से बोलें, और कोई उसका अर्थ बताए; पर यदि कोई अर्थ बताने वाला न हो, तो वह सभा में चुप रहे और अपने मन में और परमेश्वर से बातें करे।”

पवित्र आत्मा का वरदान अनुशासन और शांति में उपयोग होना चाहिए। कलीसिया में अर्थ बताने वाला हो तो ही सार्वजनिक रूप से भाषाओं में बोलें।

4. आत्मिक जीवन में लाभ

रोमियों 8:26
“इसी प्रकार आत्मा भी हमारी दुर्बलताओं में सहायता करता है; क्योंकि हम नहीं जानते कि हमें कैसी प्रार्थना करनी चाहिए, पर आत्मा स्वयं ऐसी आहें भरकर, जिन्हें शब्दों में नहीं कह सकते, हमारे लिये बिनती करता है।”

यह प्रार्थना में गहराई, आत्मा की संगति और आत्मिक युद्ध में सामर्थ प्रदान करता है।

5. आज के मसीही के लिए संदेश

1 कुरिन्थियों 12:7,11
“आत्मा का प्रगटीकरण हर एक को लाभ के लिये दिया जाता है… परन्तु यह सब एक ही आत्मा करता है, और वही अपनी इच्छा अनुसार हर एक को अलग-अलग बांटता है।”

भाषाओं का वरदान हर विश्वासियों के लिए खुला है, परन्तु यह परमेश्वर की इच्छा और आत्मा की अगुवाई पर निर्भर है।

व्यावहारिक सुझाव

  • पवित्र आत्मा की भरपूरी के लिए नियमित प्रार्थना और उपवास।
  • बाइबल अध्ययन और कलीसिया की संगति में बने रहना।
  • वरदान के पीछे नहीं, वरदान देने वाले—यीशु मसीह—के पीछे लगे रहना।

निष्कर्ष

भाषाओं का वरदान केवल आत्मिक अनुभव नहीं, बल्कि परमेश्वर की महिमा, व्यक्तिगत आत्मिक उन्नति और कलीसिया की भलाई के लिए है। पवित्र आत्मा आज भी विश्वासियों को सामर्थ देता है। हमें हृदय खोलकर परमेश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए कि वह अपनी इच्छा अनुसार हमें यह वरदान दे और इसके सही प्रयोग में मार्गदर्शन करे।

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