Wednesday, 21 January 2026

परमेश्वर आत्मा है – आत्मा और सच्चाई से भजन करें | Powerful Christian Message in Hindi

आत्मा और सच्चाई से भजन करने वाले

📖 मुख्य वचन
“परमेश्वर आत्मा है, और अवश्य है कि उसके भजन करने वाले आत्मा और सच्चाई से भजन करें।”
(यूहन्ना 4:24)


🔹 1. परमेश्वर आत्मा है – उसकी पहचान और स्वभाव

व्याख्या:
यह वचन हमें परमेश्वर के स्वभाव को स्पष्ट रूप से समझाता है। परमेश्वर आत्मा है, अर्थात वह भौतिक सीमाओं में बंधा हुआ नहीं है। वह हर स्थान पर उपस्थित रहने वाला, सब कुछ जानने वाला और हर समय कार्य करने वाला प्रभु है। वह मनुष्य की बाहरी दशा को नहीं, बल्कि उसके भीतरी मन और आत्मा की स्थिति को देखता है।

जब हम यह समझते हैं कि परमेश्वर आत्मा है, तब हमारी आराधना का दृष्टिकोण बदल जाता है। तब हम केवल औपचारिकता या रीति से नहीं, बल्कि पूरे हृदय से परमेश्वर के सामने झुकते हैं। ऐसा भजन केवल शब्दों का उच्चारण नहीं, बल्कि आत्मा की गहराई से निकली हुई आराधना होती है।

📖 2 कुरिन्थियों 3:17
“प्रभु आत्मा है; और जहाँ प्रभु का आत्मा है वहाँ स्वतंत्रता है।”

📖 भजन संहिता 34:18
“यहोवा टूटे हुए मन वालों के निकट रहता है, और पिसे हुए मन वालों का उद्धार करता है।”


🔹 2. भजन का अर्थ – सम्पूर्ण जीवन का समर्पण

व्याख्या:
भजन केवल गीत गाने या शब्द बोलने तक सीमित नहीं है। बाइबल के अनुसार भजन का अर्थ है अपने पूरे जीवन को परमेश्वर के अधीन कर देना। जब मनुष्य अपने विचार, इच्छाएँ, योजनाएँ और मार्ग परमेश्वर को सौंप देता है, तब उसका जीवन स्वयं एक भजन बन जाता है।

परमेश्वर ऐसे भजन को स्वीकार करता है जो आज्ञाकारिता और नम्रता से भरा हो। यदि मनुष्य अपने जीवन में परमेश्वर की इच्छा को मानने से इनकार करता है, तो केवल शब्दों का भजन परमेश्वर को प्रसन्न नहीं करता।

📖 भजन संहिता 95:6
“आओ, हम झुककर दण्डवत करें; अपने कर्ता यहोवा के सम्मुख घुटने टेकें।”

📖 रोमियों 12:1
“अपने शरीरों को जीवित, पवित्र और परमेश्वर को भाता हुआ बलिदान करके चढ़ाओ; यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है।”

📖 1 शमूएल 15:22
“आज्ञा मानना बलिदान से और कान लगाना मेढ़ों की चर्बी से कहीं अच्छा है।”


🔹 3. आत्मा से भजन करना – जीवित और सामर्थी आराधना

व्याख्या:
आत्मा से भजन करने का अर्थ है ऐसा भजन जो केवल बुद्धि या भावना तक सीमित न रहे, बल्कि परमेश्वर के आत्मा की अगुवाई में हो। जब मनुष्य आत्मा से भजन करता है, तब वह परमेश्वर के साथ गहरे संबंध में प्रवेश करता है।

ऐसा भजन बोझ नहीं लगता, बल्कि आत्मा को ताज़गी और शांति देता है। आत्मा से किया गया भजन मनुष्य के जीवन को बदलता है, उसे सामर्थ देता है और विश्वास में स्थिर करता है।

📖 रोमियों 8:26
“इसी रीति से आत्मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है।”

📖 इफिसियों 5:18-19
“आत्मा से परिपूर्ण होते जाओ; और भजन, स्तुति और आत्मिक गीत गाया करो।”

📖 गलातियों 5:25
“यदि हम आत्मा से जीवित हैं, तो आत्मा के अनुसार चलें भी।”


🔹 4. सच्चाई से भजन करना – वचन के अनुसार जीवन

व्याख्या:
सच्चाई से भजन करने का अर्थ है ऐसा जीवन जीना जो परमेश्वर के वचन के अनुसार हो। यदि हमारा जीवन वचन से अलग है और हमारा भजन अलग, तो वह भजन अधूरा रह जाता है। सच्चाई से भजन तब होता है जब हमारा आचरण, सोच और निर्णय परमेश्वर के वचन के अधीन होते हैं।

परमेश्वर का वचन सत्य है और वही मनुष्य के जीवन को पवित्र करता है। जब कोई व्यक्ति वचन में स्थिर रहता है, तब उसका भजन भी सच्चा और स्वीकार्य बनता है।

📖 यूहन्ना 17:17
“सच्चाई से उन्हें पवित्र कर; तेरा वचन सत्य है।”

📖 भजन संहिता 119:105
“तेरा वचन मेरे पांव के लिए दीपक और मेरे मार्ग के लिए उजियाला है।”

📖 भजन संहिता 119:160
“तेरे वचन का सार सत्य है।”


🔹 5. परमेश्वर की खोज – सच्चे भजन करने वालों के लिए

व्याख्या:
बाइबल यह स्पष्ट करती है कि परमेश्वर स्वयं ऐसे लोगों को खोजता है जो आत्मा और सच्चाई से भजन करें। वह केवल बाहरी भीड़ से प्रसन्न नहीं होता, बल्कि उन हृदयों को ढूंढ़ता है जो पूरी रीति से उसके प्रति समर्पित हों।

यह एक अद्भुत सच्चाई है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर मनुष्य के हृदय की खोज करता है, ताकि वह उसे सामर्थ और आशीष दे सके।

📖 यूहन्ना 4:23
“पिता ऐसे भजन करने वालों को ढूंढ़ता है जो आत्मा और सच्चाई से भजन करें।”

📖 2 इतिहास 16:9
“यहोवा की दृष्टि सारी पृथ्वी पर लगी रहती है कि जिनका मन उसकी ओर पूरा है, उन्हें वह सामर्थ दे।”


🔹 6. आज के समय के लिए आत्मिक सीख

व्याख्या:
आज के समय में यह वचन हमें आत्मिक जांच करने के लिए बुलाता है। क्या हमारा भजन केवल परंपरा बन गया है, या वह वास्तव में आत्मा और सच्चाई से निकल रहा है? परमेश्वर आज भी ऐसे भजन से प्रसन्न होता है जो टूटे और नम्र हृदय से किया गया हो।

📖 भजन संहिता 51:17
“टूटा हुआ और पिसा हुआ मन—ऐसा बलिदान परमेश्वर तुच्छ नहीं जानता।”

📖 यशायाह 29:13
“ये लोग मुँह से मेरा आदर करते हैं, पर उनका मन मुझ से दूर रहता है।”


🙏 समापन विचार

परमेश्वर आत्मा है।
वह हमारे शब्दों से अधिक हमारे हृदय को देखता है।
जब हम आत्मा और सच्चाई से भजन करते हैं,
तब हमारा भजन केवल सुनाई नहीं देता,
बल्कि परमेश्वर के सिंहासन तक पहुँचता है।

आओ, हम ऐसे भजन करने वाले बनें
जिनका जीवन स्वयं परमेश्वर की आराधना बन जाए।

भजन संहिता 2 अध्ययन हिंदी में | Psalm 2 Explained in Hindi | आओ हम उसके बंधन को डोड देते है

भजन संहिता 2 — पृष्ठभूमि और लेखक

भजन संहिता 2 दाऊद द्वारा लिखा गया भजन है। यह उस समय की परिस्थितियों को दर्शाता है जब राष्ट्र और राजा परमेश्वर की इच्छा के विरुद्ध चल रहे थे। यह मसीह के राज्य, उसके अधिकार और परमेश्वर की प्रभुता को प्रकट करता है। यह भजन चेतावनी और आशीष दोनों देता है।


2:1 जाति जाति के लोग क्यों हुल्लड़ मचाते हैं, और देश देश के लोग व्यर्थ बातें क्यों सोच रहे हैं?

अनुवाद: राष्ट्र क्यों विद्रोह कर रहे हैं और लोग व्यर्थ योजनाएँ क्यों बना रहे हैं?
व्याख्या: यह पद मानव जाति के घमंड को दिखाता है — लोग परमेश्वर की योजना के विरुद्ध जाकर अपनी शक्ति पर भरोसा करते हैं। उनकी सारी योजनाएँ व्यर्थ और टिकाऊ नहीं होतीं। दाऊद बता रहा है कि जो भी परमेश्वर के विरुद्ध खड़ा होता है, उसकी सोच खुद ही नाश का कारण बनती है।

2:2 यहोवा के और उसके अभिषिक्त के विरूद्ध पृथ्वी के राजा मिलकर, और हाकिम आपस में सम्मति करके कहते हैं, कि

अनुवाद: पृथ्वी के राजा और हाकिम परमेश्वर और उसके अभिषिक्त के विरुद्ध खड़े हो जाते हैं।
व्याख्या: यह पद दर्शाता है कि सांसारिक नेता मिलकर परमेश्वर की आज्ञा को चुनौती देते हैं। “अभिषिक्त” भविष्यद्वाणी रूप से मसीहा की ओर इशारा करता है। दुनिया की ताकतें हमेशा परमेश्वर की प्रभुता को नकारने की कोशिश करती हैं।

2:3 आओ, हम उनके बन्धन तोड़ डालें, और उनकी रस्सियों अपने ऊपर से उतार फेंके॥

अनुवाद: वे कहते हैं— हम परमेश्वर के नियमों को तोड़ डालें और उसके बन्धनों को हटाएँ।
व्याख्या: मनुष्य परमेश्वर के बंधन को बंधन नहीं बल्कि बोझ मानता है। वे आत्मिक स्वतंत्रता को गलत समझते हैं और परमेश्वर के अधिकार को हटाना चाहते हैं। यह विद्रोही मनुष्य के स्वभाव को दिखाता है।

2:4 वह जो स्वर्ग में विराजमान है, हंसेगा, प्रभु उन को ठट्ठों में उड़ाएगा।

अनुवाद: स्वर्ग में बैठा परमेश्वर उन पर हंसेगा और उनका उपहास करेगा।
व्याख्या: परमेश्वर की नजर में मनुष्य का विद्रोह हास्यास्पद है। परमेश्वर का शासन अटल है— कोई भी उसकी शक्ति को चुनौती नहीं दे सकता। विद्रोही योजनाएँ खुद ही टूटने के लिए बनी होती हैं।

2:5 तब वह उन से क्रोध करके बातें करेगा, और क्रोध में कहकर उन्हें घबरा देगा, कि

अनुवाद: परमेश्वर क्रोध में उनसे बात करेगा और उन्हें भयभीत करेगा।
व्याख्या: जब परमेश्वर न्याय करता है, तो कोई भी उसके सामने ठहर नहीं सकता। उसकी डांट शक्तिशाली है और विद्रोही राष्ट्रों को भय में डाल देती है।

2:6 मैं तो अपने ठहराए हुए राजा को अपने पवित्र पर्वत सिय्योन की राजगद्दी पर बैठा चुका हूं।

अनुवाद: परमेश्वर कहता है— मैंने अपने चुने हुए राजा को सिय्योन पर बैठाया है।
व्याख्या: परमेश्वर का राज्य स्थापित है। चाहे मनुष्य जितना विरोध करे, परमेश्वर का अभिषिक्त— मसीहा— ही सच्चा राजा है। उसका राज्य कभी नहीं हिलेगा।

2:7 मैं उस वचन का प्रचार करूंगा: जो यहोवा ने मुझ से कहा, तू मेरा पुत्रा है, आज तू मुझ से उत्पन्न हुआ।

अनुवाद: परमेश्वर ने कहा— तू मेरा पुत्र है, आज मैंने तुझे उत्पन्न किया।
व्याख्या: यह मसीह के दिव्य पुत्रत्व की घोषणा है। यह पद मसीहा की महिमा, अधिकार और स्वर्गीय पहचान को प्रकट करता है।

2:8 मुझ से मांग, और मैं जाति जाति के लोगों को तेरी सम्पत्ति होने के लिये, और दूर दूर के देशों को तेरी निज भूमि बनने के लिये दे दूंगा।

अनुवाद: मुझसे मांग— मैं सारी जातियों को तेरी विरासत बना दूंगा।
व्याख्या: परमेश्वर अपने पुत्र को संपूर्ण पृथ्वी की प्रभुता देता है। यह पद बताता है कि मसीह सिर्फ इस्राएल का नहीं बल्कि सारी दुनिया का राजा है।

2:9 तू उन्हें लोहे के डण्डे से टुकड़े टुकड़े करेगा। तू कुम्हार के बर्तन की नाईं उन्हें चकना चूर कर डालेगा॥

अनुवाद: तू उन्हें लोहे के डंडे से तोड़ेगा और बर्तनों की तरह चूर कर देगा।
व्याख्या: यह मसीह के न्यायी राजा होने को दर्शाता है। जो उसके विरुद्ध खड़े होंगे, न्याय के दिन ठहर नहीं सकेंगे।

2:10 इसलिये अब, हे राजाओं, बुद्धिमान बनो; हे पृथ्वी के न्यायियों, यह उपदेश ग्रहण करो।

अनुवाद: अब राजाओं, बुद्धिमान बनो; पृथ्वी के न्यायियों, शिक्षा लो।
व्याख्या: परमेश्वर सभी शक्तिशाली लोगों को चेतावनी देता है— अहंकार में मत रहो। परमेश्वर की प्रभुता को स्वीकार करना ही बुद्धिमानी है।

2:11 डरते हुए यहोवा की उपासना करो, और कांपते हुए मगन हो।

अनुवाद: डरते हुए यहोवा की उपासना करो और कांपते हुए आनन्दित हो।
व्याख्या: परमेश्वर की भय मानने वाली उपासना ही सच्ची उपासना है। आदर और विनम्रता के साथ आनन्द मनाना मसीही जीवन का आधार है।

2:12 पुत्र को चूमो ऐसा न हो कि वह क्रोध करे, और तुम मार्ग ही में नाश हो जाओ; क्योंकि क्षण भर में उसका क्रोध भड़कने को है॥ धन्य हैं वे जिनका भरोसा उस पर है॥

अनुवाद: पुत्र को आदर दो, ताकि वह क्रोध न करे और तुम नाश न हो जाओ। धन्य हैं वे जो उस पर भरोसा रखते हैं।
व्याख्या: यह अंतिम चेतावनी और आशीष है। जो मसीह को मानते हैं वे धन्य हैं, परन्तु जो उसे अस्वीकार करते हैं वे न्याय का सामना करते हैं। परमेश्वर पर भरोसा सुरक्षा और आशीष लाता है।

Powerful Christian Message in Hindi

परमेश्वर आत्मा है – आत्मा और सच्चाई से भजन करने का गहरा अर्थ

मुख्य वचन:

“परमेश्वर आत्मा है, और अवश्य है कि उसके भजन करने वाले आत्मा और सच्चाई से भजन करें।”
(यूहन्ना 4:24)


भूमिका (Introduction)

यह वचन हमें यह सिखाता है कि प्रभु की आराधना केवल बाहरी रीति या शब्दों तक सीमित नहीं है। परमेश्वर आत्मा है, इसलिए वह हमारे हृदय की दशा, हमारी सच्चाई और हमारी आत्मा की पुकार को देखता है। आज बहुत से लोग प्रभु का नाम लेते हैं, पर आत्मा और सच्चाई से भजन करने वाले बहुत कम हैं।


परमेश्वर आत्मा है – इसका अर्थ

जब बाइबल कहती है कि परमेश्वर आत्मा है, तो इसका अर्थ यह है कि वह सीमाओं में बंधा हुआ नहीं है। वह हर स्थान पर उपस्थित है, हर मन को जानता है और हर आह को सुनता है।

बाइबल वचन:
“क्या मैं ही निकट का परमेश्वर हूँ और दूर का नहीं?”
(यिर्मयाह 23:23)

इसलिए हमें प्रभु के पास आने के लिए किसी विशेष स्थान या समय की आवश्यकता नहीं होती। जहाँ सच्चा हृदय पुकारता है, वहाँ प्रभु उपस्थित होता है।


आत्मा से भजन करने का अर्थ

आत्मा से भजन करने का अर्थ है – पूरे मन, पूरे विश्वास और पूरे समर्पण के साथ प्रभु की आराधना करना। यह केवल होठों का भजन नहीं बल्कि टूटे हुए हृदय की पुकार है।

बाइबल वचन:
“हे परमेश्वर, तू टूटे और पिसे हुए मन को तुच्छ नहीं जानता।”
(भजन संहिता 51:17)

जब हम अपनी कमजोरी, पीड़ा और आवश्यकता के साथ प्रभु के सामने आते हैं, तभी हमारा भजन आत्मा में होता है।


सच्चाई से भजन करने का अर्थ

सच्चाई से भजन करने का अर्थ है – बिना दिखावे के, बिना कपट के और बिना दोहरे जीवन के प्रभु के सामने आना। प्रभु झूठे होंठों से नहीं, सच्चे हृदय से की गई प्रार्थना को स्वीकार करता है।

बाइबल वचन:
“जो लोग सच्चे मन से यहोवा को पुकारते हैं, यहोवा उनके निकट रहता है।”
(भजन संहिता 145:18)

जब हमारा जीवन और हमारे शब्द एक समान होते हैं, तब हमारा भजन सच्चाई में होता है।


भजन का प्रभाव हमारे जीवन में

आत्मा और सच्चाई से किया गया भजन हमारे जीवन को बदल देता है। भजन से भय दूर होता है, आत्मिक बल मिलता है और विश्वास दृढ़ होता है।

बाइबल वचन:
“यहोवा मेरा बल और ढाल है; मेरा मन उस पर भरोसा रखता है।”
(भजन संहिता 28:7)

जब हम सच्चे मन से प्रभु की आराधना करते हैं, तो समस्याएँ छोटी और प्रभु महान दिखाई देने लगता है।


आज के समय के लिए संदेश

आज प्रभु हमसे यह नहीं पूछता कि हमने कितना ऊँचा गाया, बल्कि यह पूछता है कि क्या हमने सच्चे मन से गाया। यह वचन हमें अपने आत्मिक जीवन की जाँच करने के लिए बुलाता है।

बाइबल वचन:
“आज यदि तुम उसका शब्द सुनो, तो अपने मन कठोर न करो।”
(इब्रानियों 3:15)


समापन प्रार्थना (Pastor Prayer)

अब मैं एक सेवक के रूप में प्रार्थना करता हूँ। हे प्रभु यीशु, तू आत्मा है और सच्चाई का स्रोत है। आज हर उस व्यक्ति को छू जो टूटे मन से तुझे खोज रहा है।

हे प्रभु, जो रोगी हैं उन्हें चंगा कर, जो निराश हैं उन्हें आशा दे, जो बंधन में हैं उन्हें स्वतंत्र कर।

हमारे भजन को औपचारिकता से निकालकर आत्मा और सच्चाई में बदल दे। हमारा जीवन तेरी महिमा के लिए उपयोग कर।

यीशु मसीह के नाम में प्रार्थना करते हैं, आमीन।

Friday, 5 December 2025

“Christmas Message | यीशु का जन्म और उद्धार का वचन | Powerful Christmas Sermon – Pastor Emmanuel”

Christmas Message in Hindi | Christmas Bible Study | जन्म का संदेश

मत्ती 1:23 “देखो, एक कुँवारी गर्भवती होगी और पुत्र जन्मेगी; और उसका नाम इम्मानुएल रखा जाएगा।”

क्रिसमस का आत्मिक संदेश

क्रिसमस केवल एक त्योहार नहीं है, यह वह दिव्य क्षण है जब परमेश्वर ने अपने पुत्र को संसार में भेजा ताकि मानवता को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए। यह दिन हमें परमेश्वर के प्रेम, अनुग्रह और उद्धार की याद दिलाता है।

क्रिसमस हमें यह सिखाता है कि परमेश्वर मनुष्य से दूर नहीं है — वह हमारे साथ है, हममें है, और हमारे जीवन को बदलना चाहता है। "इम्मानुएल" का अर्थ ही है — “परमेश्वर हमारे साथ।”

1. क्रिसमस हमें आशा देता है

यूहन्ना 1:5 “जो ज्योति अन्धकार में चमकती है और अन्धकार ने उसे दबा न लिया।”

ईसा मसीह की ज्योति किसी भी अन्धकार से बड़ी है। चाहे निराशा हो, बीमारी हो, आर्थिक संकट हो — मसीह की ज्योति जीवन में आशा पैदा करती है।

2. क्रिसमस हमें उद्धार की याद दिलाता है

लूका 2:11 “क्योंकि आज दाऊद के नगर में तुम्हारे लिये उद्धारकर्ता जन्मा है, जो प्रभु मसीह है।”

यीशु का जन्म मानवता के उद्धार के लिए हुआ। वे हमें पाप से छुड़ाने, जीवन में शांति और अनन्त जीवन देने आए।

3. क्रिसमस हमें प्रेम का मार्ग दिखाता है

यूहन्ना 3:16 “क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया।”

परमेश्वर ने हमें इतना प्रेम किया कि अपने पुत्र को बलिदान के रूप में दे दिया। इसलिए क्रिसमस प्रेम, दया, और क्षमा का संदेश है।

4. क्रिसमस आज भी जीवन बदलता है

2 कुरिन्थियों 5:17 “यदि कोई मसीह में है, तो वह नई सृष्टि है।”

यीशु आज भी जीवन बदलते हैं। उनका जन्म केवल अतीत की घटना नहीं— वह आज भी हर उस हृदय में जन्म लेते हैं जो उन्हें स्वीकार करता है।

क्रिसमस का आत्मिक अर्थ (Refined Explanation)

  • यीशु का जन्म — मानव इतिहास का सबसे बड़ा चमत्कार।
  • परमेश्वर का प्रेम — जो हमें अयोग्य होने पर भी दिया गया।
  • यीशु की ज्योति — जो हर अन्धकार को तोड़ती है।
  • यीशु की उपस्थिति — जो हमें जीवन में दिशा और शांति देती है।
  • यीशु का संदेश — प्रेम, क्षमा और उद्धार।

Christmas Blessing (आशीष)

“इम्मानुएल का प्रकाश आपके परिवार में चमके। यीशु की शांति आपके घर को भर दे। उनकी उपस्थिति आपके जीवन में नई दिशा, नई आशा और नया आरंभ दे।”

Christmas Prayer (शॉर्ट और शक्तिशाली)

प्रभु यीशु, आपके जन्म के दिन हम आपका धन्यवाद करते हैं। हे प्रभु, आज अपने प्रकाश से हमारे जीवन के हर अंधकार को हटा दीजिए। हमारे घर, परिवार, काम, स्वास्थ्य और भविष्य पर आपकी शांति और आशीष बनी रहे। हमें प्रेम, क्षमा और विनम्रता में चलने की शक्ति दीजिए। आपकी ज्योति इस पूरे नए वर्ष में हमारा मार्गदर्शन करे। इम्मानुएल— परमेश्वर हमारे साथ— हम पर अनुग्रह करे। आमीन।

अतिरिक्त Christmas Wachan

यशायाह 9:6 “क्योंकि हमारे लिये एक बालक उत्पन्न हुआ... और उसका नाम अद्भुत, युक्ति करने वाला, पराक्रमी ईश्वर, अनन्तकाल का पिता, शान्ति का राजकुमार होगा।”

मीका 5:2 “हे बेतलेहेम... तुझ में से मेरे लिये एक ऐसा निकलेगा जो इस्राएल पर प्रभुता करेगा।”

गलातियों 4:4 “जब समय पूरा हुआ, तो परमेश्वर ने अपने पुत्र को भेजा।”

Christmas का अंतिम संदेश

क्रिसमस केवल एक दिन नहीं — यह वह शक्ति है जो जीवन को बदल सकती है। यीशु आपके घरों में शांति, आपके दिलों में आनंद, आपकी राहों में प्रकाश और आपके भविष्य में सफलता प्रदान करें।

क्रिसमस संदेश — वचन में जन्मा उद्धार

By Pastor Emmanuel

मुख्य वचन

“वह एक पुत्र जनेगी और तू उसका नाम यीशु रखना; क्योंकि वही अपने लोगों को उनके पापों से उद्धार करेगा।”
— मत्ती 1:21

व्याख्या — मत्ती 1:21

यह वचन क्रिसमस का केंद्र है। यीशु का जन्म केवल एक त्योहार नहीं बल्कि मानवता के लिए परमेश्वर की उद्धार योजना है। संसार पाप में गिरा हुआ था और परमेश्वर ने समाधान भेजा—यीशु। क्रिसमस वह क्षण है जब स्वर्ग ने पृथ्वी से कहा — उद्धार आ गया है।

स्वर्गदूत का सन्देश

“मत डर, देख, मैं तुम्हारे लिये बड़े आनन्द का सुसमाचार लाता हूँ… आज दाऊद के नगर में तुम्हारे लिये एक उद्धारकर्ता उत्पन्न हुआ है, अर्थात मसीह प्रभु।”
— लूका 2:10–11

व्याख्या — लूका 2:10–11

क्रिसमस का पहला शब्द है—“मत डर।” इसका अर्थ है कि मसीह का आगमन हमारे जीवन से हर भय को दूर करने के लिए है। जहाँ मसीह आते हैं, वहाँ शांति, आशा और आनंद का जन्म होता है।

वचन देहधारी हुआ

“और वचन देहधारी हुआ, और हमारे बीच में रहा; और हमने उसकी महिमा देखि, जैसे पिता के एकलौते का महिमा।”
— यूहन्ना 1:14

व्याख्या — यूहन्ना 1:14

ईश्वर दूर से नहीं देखता—वह हमारे बीच आता है। वचन का देहधारी होना दर्शाता है कि परमेश्वर हमें समझता है, हमारे दुःख को महसूस करता है और हमारे साथ चलना चाहता है। क्रिसमस का अर्थ है — परमेश्वर हमारे साथ।

मसीहा के नामों की घोषणा

“क्योंकि हमारे लिये एक बालक उत्पन्न हुआ… और उसका नाम अद्भुत युक्ति करने वाला, पराक्रमी ईश्वर, अनन्तकाल का पिता, और शान्ति का राजकुमार रखा जाएगा।”
— यशायाह 9:6

व्याख्या — यशायाह 9:6

  • अद्भुत युक्ति करने वाला — समस्याओं में मार्ग दिखाने वाला।
  • पराक्रमी ईश्वर — कमजोरी में शक्ति देने वाला।
  • अनन्तकाल का पिता — प्रेम और सुरक्षा देने वाला।
  • शांति का राजकुमार — हर तूफान में शांति देने वाला।

क्रिसमस का सार

  • क्रिसमस = उद्धार का दिन।
  • क्रिसमस = परमेश्वर का हमारे निकट आना (इम्मानुएल)।
  • क्रिसमस = भय का अंत और आनंद की शुरुआत।
  • क्रिसमस = शांति, शक्ति और आशा का पर्व।

आध्यात्मिक चुनौती

क्रिसमस केवल उत्सव नहीं बल्कि परिवर्तन का दिन है। प्रश्न यह है—क्या हमने यीशु को अपने जीवन का केंद्र बनाया है? क्या हमने अपने डर, चिंता और समस्याओं को उसके हाथों सौंपा है? क्रिसमस का असली अर्थ तब प्रकट होता है जब मसीह हमारे हृदय में जन्म लेते हैं।

क्रिसमस प्रार्थना

हे स्वर्गीय पिता,

हम आपके देहधारी वचन के लिए धन्यवाद करते हैं। इस क्रिसमस हम प्रार्थना करते हैं कि यीशु मसीह का प्रकाश हमारे जीवन में चमके। हमारे पापों का उद्धार, हमारे मन की शांति, हमारे घरों में प्रेम और हमारे भविष्य में आशा स्थापित कर।

जहाँ भी अंधकार है वहाँ आपका प्रकाश उतरे। जहाँ टूटन है वहाँ आपकी चंगाई और पुनर्स्थापना हो। आप हमारे साथ रहे और हमारे हर कदम का मार्गदर्शन करें।

यीशु मसीह के नाम में, आमीन।

समापन आशीष

मैं घोषणा करता/करती हूँ कि इस क्रिसमस के मौसम में आपके जीवन में उद्धार, अनुग्रह, शांति, नई शुरुआत और दिव्य सुरक्षा प्रकट होगी। प्रभु आपका मार्ग प्रशस्त करे और आपको अपनी ज्योति से भर दे।

— Pastor Emmanuel





Saturday, 22 November 2025

भजन संहिता 1 अध्ययन हिंदी में | Psalm 1 Explained in Hindi | धन्य व्यक्ति का मार्ग

 

भजन संहिता 1 पूरा अध्ययन हिंदी में | Psalm 1 Study in Hindi

भजन संहिता 1 एक ज्ञान-भजन है जिसे सामान्यतः दाऊद द्वारा लिखा गया माना जाता है। इस अध्याय में दो मार्ग दिखाए गए हैं—धर्मी का मार्ग और दुष्ट का मार्ग। यह भजन हमें सिखाता है कि परमेश्वर के वचन पर चलने वाला जीवन फलदार, स्थिर और आशीषित होता है।

भजन संहिता 1 – पृष्ठभूमि

यह अध्याय उस समय लिखा गया जब दाऊद लोगों को यह बताना चाहता था कि परमेश्वर के वचन में आनंद लेने वाला व्यक्ति ही सच्चे जीवन का आनंद पाता है। भजन 1 पूरे भजन संहिता की दिशा तय करता है और दो मार्गों की तुलना करता है:
✔ धर्मियों का मार्ग — उन्नति, स्थिरता
✔ दुष्टों का मार्ग — अस्थिरता और नाश

भजन संहिता 1 — पद दर पद अध्ययन

1:1

क्या ही धन्य है वह पुरूष जो दुष्टों की युक्ति पर नहीं चलता, और न पापियों के मार्ग में खड़ा होता; और न ठट्ठा करने वालों की मण्डली में बैठता है!

अनुवाद: धन्य वह मनुष्य है जो बुरे लोगों की सलाह नहीं मानता, पापियों के मार्ग पर नहीं रुकता और ठट्ठा करने वालों की संगति में नहीं बैठता।

व्याख्या:
– आशीषित जीवन बुराई से दूरी बनाने से शुरू होता है।
– चलना, खड़ा होना और बैठना — यह पाप में धीरे-धीरे फँसने के 3 स्तर हैं।
– धर्मी अपनी संगति सोच-समझकर चुनता है क्योंकि संगति जीवन की दिशा बदल देती है।

1:2

परन्तु वह तो यहोवा की व्यवस्था से प्रसन्न रहता; और उसकी व्यवस्था पर रात दिन ध्यान करता रहता है।

अनुवाद: वह परमेश्वर के वचन से आनंद लेता है और दिन-रात उसी पर मनन करता है।

व्याख्या:
– धर्मी का आनंद संसार में नहीं, वचन में होता है।
– रात-दिन ध्यान का अर्थ है कि वचन उसके मन में लगातार सक्रिय रहता है।
– वचन के कारण उसके निर्णय, स्वभाव और जीवन में परमेश्वर का चरित्र झलकने लगता है।

1:3

वह उस वृक्ष के समान है, जो बहती नालियों के किनारे लगाया गया है। और अपनी ऋतु में फलता है, और जिसके पत्ते कभी मुरझाते नहीं। इसलिये जो कुछ वह पुरूष करे वह सफल होता है॥

अनुवाद: वह नहरों के पास लगे हरे-भरे वृक्ष जैसा है; सही समय पर फल देता है और उसके पत्ते नहीं सूखते। वह जो भी करता है उसमें सफलता पाता है।

व्याख्या:
– वचन उसकी जड़ों को मजबूत रखता है, जैसे पानी वृक्ष को पोषण देता है।
– वह अपने समय में फलता है — परमेश्वर सही समय पर उसके लिए मार्ग खोलता है।
– सफलता उसके प्रयास से नहीं, परमेश्वर की कृपा से आती है।

1:4

दुष्ट लोग ऐसे नहीं होते, वे उस भूसी के समान होते हैं, जो पवन से उड़ाई जाती है।

अनुवाद: दुष्ट भूसे की तरह होते हैं जिसे हवा जहाँ चाहे उड़ा देती है।

व्याख्या:
– भूसा हल्का, अस्थिर और बेकार होता है — यही दुष्टों का जीवन है।
– उनमें स्थिरता का कोई आधार नहीं होता।
– उनका दिखावा थोड़ी-सी हवा से उड़ जाता है।

1:5

इस कारण दुष्ट लोग अदालत में स्थिर न रह सकेंगे, और न पापी धर्मियों की मण्डली में ठहरेंगे;

अनुवाद: न्याय के दिन दुष्ट टिक नहीं पाएंगे और पापी धर्मियों की संगति में स्थिर नहीं रह सकेंगे।

व्याख्या:
– परमेश्वर का न्याय किसी को पक्षपात नहीं देता।
– धर्मियों की मण्डली में स्थान चरित्र और विश्वास के कारण मिलता है।
– दुष्ट अपनी चालों के कारण स्थिर नहीं रह पाते।

1:6

क्योंकि यहोवा धर्मियों का मार्ग जानता है, परन्तु दुष्टों का मार्ग नाश हो जाएगा॥

अनुवाद: यहोवा धर्मियों के मार्ग की देखभाल करता है, पर दुष्टों का मार्ग नाश की ओर जाता है।

व्याख्या:
– यहोवा जानता है = वह मार्गदर्शन, सुरक्षा और देखभाल करता है।
– धर्मी सुरक्षित है क्योंकि परमेश्वर उसके साथ है।
– दुष्टों का अंत हमेशा नाश, बिखराव और हानि में होता है।

Popular Posts