JESUS GROUP ALL WORLD

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Tuesday 30 April 2024

मई महीना में परमेश्वर आपको और आपके सब परिवार को अपनी स्वर्गी आशीष से भरे आमीन

 *मई महीना में परमेश्वर आपको और आपके सब परिवार को अपनी स्वर्गी आशीष से भरे आमीन*

*निचे दिए शब्दों को रिसीव करे*


*मई महीने में सुख शांति आशीष चंगाई मिले*

*रुका हुआ काम शुरू हो जाए*

*जो कर्ज में है उनका कर्ज उतर जाए*

*रुका हुआ पैसा मिलने जा रहा है*

*नौकरी की आशीष मिले*

*बिजनेस में आशीष सफलता मिले*

*परिवार में सुख शांति आए*

*घर में शांति आशीष आए*

*परिवार में सफलता मिले*

*सारे बंधन टुट जाये*

*बीमार लोग चंगे हो जाए*

*बच्चो को सफलता मिले*

*जिनका ट्रांसफर रुका हुआ है उनका ट्रांसफर हो जाए*

*सारे मार्ग ओपन हो जाए*

*जिनकी शादी होने है उनकी सादी हो जाए*

*बच्चे की आशीष मिले*

*आफिस में जो दुश्मन है उनको प्रभु मन फिराए*

*आपके पीछे जो शत्रु पड़े है उनके सारे काम असफल हो जाए*

*प्रभु आप सब को अपनी स्वर्गी आशीष से भरे पुरा महीना आशीष की बारिश होती रहे है आपके ऊपर* 


*बोलो आमीन*

*और भीर आमीन*

*Pastor Emmanuel*

*YouTube Channel Links*

https://youtube.com/@NewLifeSikhteHaiKuch?si=AW_KnCDi7j40TUXF

Monday 1 April 2024

believers and faith vishvaasee aur vishvaas


साधारण शब्दों में प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास करने वाला विश्वासी है। विश्वास क्या है - विश्वास मनुष्य के मन,बुद्धि और शरीर की वह प्रक्रिया है, जिनमें मनुष्य अपने आप को किसी वस्तु व स्थिति में सीमित कर दे और यह निश्चय रखे कि केवल यही है जिसके द्वारा( मेरा) हर एक कार्य हो सकता है तथा यह आशा रखे कि मेरा कार्य हो जाएगा। इस प्रक्रिया में ऐसा होता है कि वह जिन बातों को नहीं जानता कि वे हैं या हो जाएँगी उसे क्रिया रुप में कहना और देखना प्रारंभ करता हैं। 





जब एक व्यक्ति जिसे यीशु मसीह की गवाही तथा सुसमाचार सुनाया जाता है तो यह सुनकर उसकी बातों पर विश्वास करता है। यह उसी प्रकार हैं जिस प्रकार एक सूबेदार जिसका सेवक बीमार था और उसने आकर यीशु से कहा - मेरा सेवक लकवे का मारा हुआ घर में पड़ा है और बहुत तकलीफ में है तब यीशु ने उससे कहा - मैं आकर उसे चंगा करूंगा। सूबेदार ने जवाब में कहा - हे प्रभु मैं इस लायक नहीं कि तू मेरी छत के नीचे आए परंतु केवल मुख ही से कही दे तो मेरा सेवक चंगा हो जाएगा। ( मतती 8:6-8)

यह सूबेदार का ऐसा बड़ा विश्वास था जिसमें आशा और निश्चय की बहुतायत थी जिसके चलते प्रभु यीशु मसीह द्वारा वहीं से कहा गया और सूबेदार का सेवक चंगा हो गया। 

सूबेदार ने यीशु मसीह के बारे में एक  आशा जागृत किया और उसे निश्चय हुआ कि मेरे द्वारा यीशु से कहे जाने पर वह उसे चंगा करेगा। 

यह विश्वास हैं बगैर देखे विश्वास करना अर्थात सुनकर विश्वास करना। 

(2) दूसरा विश्वास हैं देखकर विश्वास करना। 

प्रभु यीशु मसीह के बारह चेले थे जिसमें से एक था थोमा। उसे जब  शेष 10 चेलो ने ( एक चेला यहूदा फांसी लगाकर मर गया था) बताया कि यीशु मसीह मुर्दो में जी उठा है तब थोमा ने कहा जब तक मैं उसके हाथों के छेद में ऊँगली और उसकी पसली में हाथ डालकर ना देख लूँ 
तब तक विश्वास ना करूंगा। थोमा अविश्वास में था कि यीशु मसीह मुर्दो में जी उठा है लेकिन हमारे प्रभु ने उसे दर्शन दिया और अविश्वास से विश्वास में लाया। तब उसने यीशु को अपना प्रभु और परमेश्वर स्वीकार किया। 

यह विश्वास हैं देखकर करना। आज भी हजारों लोग हैं जो अपने जीवन में यीशु के द्वारा दिए गए आश्चर्य कर्मो को नहीं लेते उसकी उपस्थिति को महसूस नहीं कर लेते तब तक वे उस पर विश्वास नहीं करते। 

विश्वासी कौन हैं? 

विश्वासी वह व्यक्ति हैं-

(1) जो मन से यह विश्वास करे कि परमेश्वर ने उसे यीशु को मरे हुओ में जिलाया हैं। ( रोमियो 10:9)

(2) और यीशु को अपना प्रभु जानकर अंगीकार ( कहें ) करें। ( रोमियो 10:9 )

( 3) अपना मन फिराकर परमेश्वर के पास आए ( मतती 3:2 )

यहाँ पर निम्न प्रकार की बातें हैं -



(1) लिखा है ( मन से यह विश्वास करें कि) परमेश्वर ने उसे मरों हुओ में जिलाया हैं। निश्चय, विश्वास के लिए प्रथम जरूरी बात है जब एक व्यक्ति को निश्चय हो जाता है कि यीशु मसीह को परमेश्वर ने मुर्दो में से जीवित कर दिया है। उस मनुष्य के मन में दूसरी आशा उतपन होती हैं। निश्चय के द्वारा वह व्यक्ति यह जान पाता है यीशु का लहू मुझे सब पापो से शुद्ध करता है वह मेरे लिए मारा गया है कि मैं जीवन पाऊँ और यीशु मेरे लिए जी उठा कि मैं हमेशा जिंदगी पाऊँ। 


(2) जब इस निश्चय के द्वारा वह व्यक्ति अपने मुँह से अंगीकार करता है कि परमेश्वर ही मेरा प्रभु और स्वामी है तब एक सेवक की आशा अपने स्वामी से प्रारंभ हो जाती है और मुँह से किया गया यह अंगीकार कि यीशु ही मेरा प्रभु है उसके जीवन में एक और आशा उतपन करता है कि यीशु जो शरीर स्वर्ग पर उठा लिया गया वह मुझे अपने साथ पिता के पास ले जाने आएगा जब वो आएगा तब मैं चाहें दफन ( गाड़ा) किया जाऊँ, चाहे जीवित होऊँ उठा लिया जाऊँगा और अविनाशी देह को धारण करूँगा। 

(3) जब जक्ई नाम महसूल ( कर)  लेने वाले व्यक्ति के घर यीशु मसीह गये तब एक बहुत बड़ा परिर्वतन जक्ई के जीवन में दिखाई दिया। वह धन जो उसने बहुत लोगों से जबरदस्ती करके लिया था, तथा पाप के द्वारा जमा किया गया था। बड़ा आश्चर्य। उसने वह धन जिस जिस से लिया था उनको चार गुना वापस किया जक्ई के मन में यीशु के आने से पापों के प्रति पश्चात उतपन हुआ और उसने अपने गुनाहो को तो मान ही लिया और जिसके प्रति गुनाह किया था उसने भी क्षमा के लिए उनका धन वापस दे दिया इसी तरह एक व्यक्ति के जीवन में जब प्रभु यीशु आ जाते हैं तब वह अपने किए हुए गुनाहों से पछताता हैं। मूर्तिपूजा, झूठ, जादूटोना, व्यभिचार, चोरी, लालच, बैर आदि पापों से और परमेश्वर की इच्छा के विरोध में किए गए कामों से और किसी भी मनुष्य का बुरा चाहकर किए गए कार्यो से पछताकर पश्चाताप करता है। तब उसके घर उद्वार और छुटकारा आता हैं। 




(1) एक चुना हुआ वंश - यदि हम अपनी वंशावली में जाए इस प्रकार जैसे मेरा नाम सौरभ है मेरे पिता का नाम माधव प्रसाद मेरे दादा का नाम राम प्रसाद उनके पिता का नाम रामलाल ये वंशावली मेरे परिवार की है जो इस तरह जाकर किसी ने किसी रूप में आदम से मिलती है। पहले आदम ने पाप किया और पाप के द्वारा अब तक मृत्यु सारी जाति पर कब्जा रखे हुए हैं। 

परंतु हमारे प्रभु यीशु पुनः जीवित होकर मृत्यु पर जयवंत हो गए और हमें इस जगत से आवाज देकर अलग किया जैसे कि लिखा है मेरी भेड़ मेरा शब्द सुनकर मेरे पीछे हो लेती है। हमने परमेश्वर के वचनों को सुना और यीशु मसीह के पीछे हो लिए। यीशु मसीह ने हमें जगत से चुनकर अपने वंस में शामिल किया और हमें अपनी संतान बनाया। ( यूहनां 1:12, 10:16)



Tuesday 18 July 2023

खुदा हमारी गलतियों को बरकतों में तब्दील कर देगा। हमारे महान और जीवित परमेश्वर का अनुग्रह हम सब पर बना रहे

 हमारे महान और जीवित परमेश्वर का अनुग्रह हम सब पर बना रहे। आमीन।


खुदा हमारी गलतियों को बरकतों में तब्दील कर देगा।

आज की इस भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में हर इंसान तनाव में है दिन ब दिन हम मुश्किलों और परेशानियों में फंसते जा रहे है और इसी के परिणामस्वरुप हम न जाने कितनी अनगिनत गलतियां करते है जिनका नतीजा गुनाह है। आज के इस दौर में गलतियां होना स्वाभाविक है परन्तु हम अपनी गलतियों के प्रति अपना नज़रिया कैसा रखते है ? ये सब से महत्वपूर्ण बात है - क्या हम अपनी गलती को नज़रअंदाज करते  है या उन्हें छुपााते है या उनसे भागते है या हम उन्हें सुधारते है या उनके लिए क्षमा मांगते है ?

यदि हम अपनी गलती (भूल) को छुपा रहे है या उस से भाग रहे है तो हम गुनाह कर रहे है और अपने जीवन में परेशानियों को और बुलावा दे रहे है ! यदि हम माफ़ी और सच्चे पश्चाताप द्वारा अपनी गलती को नहीं सुधार रहे तो हम गुनाहों की और जा रहे है जिसके दुष्परिणाम हमें जीवन में देखने होंगे। क्योंकि गुनाह के कारण हम खुदा से दिन-ब-दिन दूर होते जाएंगे और खुदा की बरकतों से वंचित हो जाएंगे।

जैसा हम अपनी गलतियों के साथ करते हैं, वैसा ही हम अपने जीवनों के पापों के साथ भी करते हैं। लेकिन परमेश्वर जो हम सब का सृष्टिकर्ता है, हम सबको अन्दर-बाहर से भलि-भांति जानता है, हमारी गलतियों और गुनाहों के कारण हमें छोड़ना नहीं चाहता वरन चाहता है कि हमें सुधार सकें और पाप के परिणाम से बचाकर भला और बेहतर बना सके। इसका एक उदाहरण हम प्रभु यीशु के चेले पतरस के जीवन से पाते हैं।

जब प्रभु यीशु ने अपनी आती मृत्यु के बारे में अपने चेलों से चर्चा करी तब पतरस ने उसके प्रति अपने समर्पण तथा वफादारी के बड़े बड़े दावे किए; किंतु थोड़े ही समय पश्चात जब प्रभु यीशु को क्रूस पर चढ़ाए जाने के लिए वास्तव में पकड़वाया गया, तब पतरस ने भयवश तीन बार प्रभु यीशु को पहचानने और उसका अनुयायी होने से इन्कार कर दिया। लेकिन अपने मृतकों में से पुनरुत्थान के पश्चात प्रभु यीशु ने पतरस के दोषपूर्ण अतीत के बावजूद तीन बार पतरस को अपने आने वाले अनुयायीयों की देखभाल करने कि ज़िम्मेदारी दी (यूहन्ना 21)।

यदि आपने भी कोई ऐसी भूल करी है जो आपको अपरिवर्तनीय लगती है, जिसके दुषपरिणाम आपको परेशान करते हैं, तो उन्हें सुधारने के लिए बिना कोई सन्देह किए अपनी उस भूल और उसके दुषपरिणामों को प्रभु यीशु के सामने स्वीकार कर के उन्हें उसके हाथों में सौंप दीजिए। प्रभु यीशु हमारी बड़ी भूलों को भी बड़ी भलाई में बदल देंगे ।

*हे यहोवा, हम को अपनी ओर फेर, तब हम फिर सुधर जाएंगे। प्राचीनकाल की नाईं हमारे दिन बदल कर ज्यों के त्यों कर दे।*

विलापगीत 5:21
परमेश्वर आप सभी को आशीष दे और अपनी दया अनुग्रह प्रेम करुणा और शांति हमेशा आप सभी पर बनाए रखें।आमीन।


Monday 17 July 2023

When a man dies he faces judgment | जब मनुष्य मरता है तब वह न्याय का सामना करता है

                      जब मनुष्य मरता है, 

तब वह न्याय का सामना करता है


 जब मनुष्य मरता है, तब वह न्याय का सामना करता है (इब्र 9:27) एक व्यक्ति अपराधी है या नहीं, और यदि वह अपराधी है तो उसका अपराध कितना बड़ा है, इसका आखिरी निर्णय करने की प्रक्रिया ही न्याय है। आत्मिक दुनिया में भी ऐसा ही होता है।*

लोग जो नहीं जानते कि नरक का दुख कितना भयंकर है, वे इस पृथ्वी पर अपना कीमती समय बर्बाद करते हैं। वे अपने जीवन के अन्त में उस हालत का सामना करेंगे, जिसमें उन्हें अपने किए पर अफसोस होगा। चूंकि परमेश्वर जानते हैं कि मनुष्य के जीवन के अन्त में क्या होगा, इसलिए वह इस पृथ्वी पर शरीर धारण करके आए। उन्होंने हमारे पापों के लिए क्रूस पर एक पापबलि के रूप में अपना बलिदान करने के द्वारा नई वाचा को स्थापित किया है। इसके द्वारा उन्होंने हमारे लिए, जिन्हें सजा पाने के लिए नरक जाना पड़ा, स्वर्ग के राज्य में वापस जाने का मार्ग खोल दिया


इसलिए अधिक से अधिक आत्माओं को नरक से बचाने और उन्हें स्वर्ग की ओर ले जाने के लिए हमें अपना पूरा मन और शक्ति लगानी चाहिए। परमेश्वर चाहते हैं कि हम अपने स्वर्ग में किए गए सारे पापों से पश्चाताप करके स्वर्ग वापस आएं। इसी कारण उन्होंने हमें सुसमाचार का प्रचार करने का मिशन सौंपा है। प्रचार का उद्देश्य सिर्फ बाइबल के वचन लोगों को पहुंचाना नहीं है, बल्कि लोगों को यह जानने देना है कि जिस मार्ग पर अब वे जा रहे हैं, उसका गंतव्य स्थान क्या है, ताकि वे स्वर्ग की ओर अपने कदम बढ़ा सकें। अब आइए हम प्रचार के अर्थ के बारे में सोचने का कुछ समय लें और जानें कि हमें किस प्रकार की मानसिकता के साथ परमेश्वर का आदर करना चाहिए


मैं ने तो तुम्हें पानी से बपतिस्मा दिया है पर वह तुम्हें पवित्र आत्मा से बपतिस्मा देगा॥

मरकुस 1:8

9  उन दिनों में यीशु ने गलील के नासरत से आकर, यरदन में यूहन्ना से बपतिस्मा लिया।

मरकुस 1:9

10  और जब वह पानी से निकलकर ऊपर आया, तो तुरन्त उस ने आकाश को खुलते और आत्मा को कबूतर की नाई अपने ऊपर उतरते देखा।

मरकुस 1:10

11  और यह आकाशवाणी हई, कि तू मेरा प्रिय पुत्र है, तुझ से मैं प्रसन्न हूं॥

मरकुस 1:11

12  तब आत्मा ने तुरन्त उस को जंगल की ओर भेजा।

मरकुस 1:12

13  और जंगल में चालीस दिन तक शैतान ने उस की परीक्षा की; और वह वन पशुओं के साथ रहा; और स्वर्गदूत उस की सेवा करते रहे॥

मरकुस 1:13

14  यूहन्ना के पकड़वाए जाने के बाद यीशु ने गलील में आकर परमेश्वर के राज्य का सुसमाचार प्रचार किया।

मरकुस 1:14


Thursday 14 October 2021

हम वचन खाते है , पचाते है या भीर चुईंगम की तरह चबाते आये हम देखे है कुछ वचनों को"

 मेरे प्यारे भाई ,बहन पास्टर ,प्रचारक और युवा मित्र साथियों आप सभी को प्रभु यीशु मसीह के मधुर और मीठे नाम में जय मसीह की कहता हूँ  "हम वचन खाते है , पचाते है या भीर चुईंगम की तरह चबाते आये हम देखे है कुछ वचनों को"


प्रकाशितवाक्य 10:8-11 में इस प्रकार से लिखा गया है, ''और जिस शब्द करनेवाले को मैंने स्वर्ग से बोलते सुना था, वह फिर मेरे साथ बातें करने लगा, "जा, जो स्वर्गदूत समुद्र और पृथ्वी पर खड़ा है, उसके हाथ में की खुली हुई पुस्तक ले लें" और मैंने स्वर्गदूत के पास जाकर कहा, "यह छोटी पुस्तक मुझे दें" और उसने मुझ से कहा, "ले, इसे खा जा, और यह तेरा पेट कड़वा तो करेगी, परंतु तेरे मुंह में मधु सी मीठी लगेगीं" इसलिए मैं वह छोटी पुस्तक उस स्वर्गदूत के हाथ से लेकर खा गया, वह मेरे मुंह में मधु सी मिठी तो लगी, परंतु जब मैं उसे खा गया, तो मेरा पेट कड़वा हो गयां तब मुझ से यह कहा गया, "तुझे बहुत से लोगों, और जातियों, और भाषाओं, और राजाओं पर, फिर भविष्यद्वाणी करनी होगीं"|

यहां हम देखते है कि जब यूहन्ना ने वह पुस्तक खाई वह उसके मुंह में मधु सी मिठी लगीं यह परमेश्वर के अनुग्रह का दृश्य है जो हमारे पास वचनो के माध्यम से आता हैं परन्तु जब वह वचन उसके अंदर गया वह कड़वा था जो यह दर्शाता है कि उसमें सत्यता है जो हमारे पापों का न्याय करता हैं यह मात्र अनुग्रह ही नही सत्य भी हैं प्रकाशितवाक्य की पुस्तक में एक के बाद एक अनुग्रह और न्याय का दृश्य देखते हैं|

यहां हम देखते है कि किस प्रकार से परमेश्वर के वचन की सेवकाई कैसे सही रीति से करें हमे पहले परमेश्वर से वचन लेना, खाना और पचाना है तभी परमेश्वर हमें दूसरों के भविष्य के विषय में बताएगां ।


जब हम परमेश्वर को पाते है तो यह बहुत ही आसान होता है कि उसमें का मधुर भाग अनुग्रह ले लें हम उसे हमेशा के लिए अपने मुंह में रख सकते है, बिना परमेश्वर की अनुमति लिये कि वह हमारे अंदरूनी भाग तक पहुंचें हम उस आखरी भाग का आनन्द नहीं ले पाते क्योंकि हमने जो पाप किए है उनका न्याय करने में हम लगे रहते हैं जबकि न्याय हममें ही शुरू होना है (1 पतरस 4:17)|

बहुत से मसीही वचन को चुईंगम की तरह चबाते हैं वे इस लिए चबाते है क्योंकि वह मिठा है और बाद में उसे बाहर उगल देते हैं वह उनके हृदय में पाचन नही होतां वे परमेश्वर के वचन को गंभिरता से नहीं लेते कि खुद ही उनका न्याय करें|

परमेश्वर हमे बहुत से कड़वे अनुभवों में से लेकर जाता है ताकि जो वचन हमने सुने वे पाचन हो सकें परन्तु उन सारे कडुए अनुभवों से हम परमेश्वर की सुरक्षा का भी अनुभव करते है (2 कुरिन्थियों 1:4) और तभी हमारे पीढ़ी में हम भविष्यवाणी की सेवकाई कर पाएंगें|


जब यूहन्ना परमेश्वर के वचन का पाचन कर चुका तब परमेश्वर ने यूहन्ना से कहा 'अब तुझे भविष्यद्वाणी करना हैं जो परमेश्वर ने उससे पूर्व में कहा था इससे तुलना करो और जो सुना है वह मत लिखों हमे यह मालूम होना चाहिये कि दूसरों से क्या बाटना चाहिए और क्या नहीं|

एक बार पौलुस तिसरे स्वर्ग पर उठा लिया गया था परन्तु 14 वर्षों में उसने उस विषय में किसी को नहीं बताया और जब बताया भी तो उसने कहा मैने ऐसी बाते सुनी जो अकथनीय और मुंह पर लाना मनुष्य को उचित नही (2 कुरिन्थियों 12:4)|

यूहन्ना साफ रीति से समझ गया कि परमेश्वर उससे क्या कहना चाह रहा है और दूसरों से क्या कहना चाह रहा हैं|

प्रभु यीशु मसीह आप सभी को इस वचन के द्वारा आशीष देवे

मसीह में आप का भाई 

Emmanuel 

+919826709367

With

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Wednesday 15 September 2021

प्रार्थना करने के कौन कौन से तरीके है। आए वचन से देखे

 जय मसीह की प्रियों...


            *प्रार्थना करने के कौन कौन से तरीके है।

                       आए वचन से देखे* 


1• घुटने के बल प्रार्थना करने के लिए

इफिसियों 3:14

मैं इसी कारण उस पिता के साम्हने घुटने टेकता हूं,


2• सिर झुका कर प्रार्थना करने के लिए

निर्गमन 34:8

तब मूसा ने फुर्ती कर पृथ्वी की ओर झुककर दण्डवत् की।


3• बैठ कर प्रार्थना करने के लिए

2शमूएल 7:18

तब दाऊद राजा भीतर जाकर यहोवा के सम्मुख बैठा, और कहने लगा, हे प्रभु यहोवा, क्या कहूं, और मेरा घराना क्या है, कि तू ने मुझे यहां तक पहुंचा दिया है?


4• खड़े होकर प्रार्थना करने के लिए

मरकुस 11:25

और जब कभी तुम खड़े हुए प्रार्थना करते हो, तो यदि तुम्हारे मन में किसी की और से कुछ विरोध, हो तो क्षमा करो: इसलिये कि तुम्हारा स्वर्गीय पिता भी तुम्हारे अपराध क्षमा करे।।


5• हाथों को फैलाकर प्रार्थना करने के लिए

1राजा 8:54

जब सुलैमान यहोवा से यह सब प्रार्थना गिड़गिड़ाहट के साथ कर चुका, तब वह जो घुटने टेके और आकाश की ओर हाथ फैलाए हुए था, सो यहोवा की वेदी के साम्हने से उठा,


6• हाथों को उठाकर प्रार्थना करने के लिए

1 तीमुथियुस 2:8

सो मैं चाहता हूं, कि हर जगह पुरूष बिना क्रोध और विवाद के पवित्रा हाथों को उठाकर प्रार्थना किया करें।


परमेश्वर प्रभु यीशु मसीह इस वचनो के द्वारा आपको बहुत आशीष और बरकत दे....हल्लिलुयाह आमीन



Sunday 16 August 2020

प्रभु यीशु उसने कैसी ज़िंदगी जी || बुद्धिमान अपनी बुद्धि पर घमण्ड न करे न वीर अपनी वीरता पर न धनी अपने धन पर घमण्ड करे | Pastor Emmanuel New Life Sikhte Hai Kuch

 प्रभु यीशु उसने कैसी ज़िंदगी जी

(यिर्मयाह 9: 23)

यहोवा यों कहता है, बुध्दिमान अपनी बुध्दि पर घमणड न करे, न वीर अपनी वीरता पर,
और  धनी अपने धन पर घमणड करे;
(यिर्मयाह 9: 24)
परन्तु जो घमणड करे वह इसी बात पर घमणड करे, कि वह मुझे जानता और समझता हे,
 कि मैं ही वह यहोवा हूँ, जो पृथ्वी पर करूणा, न्याय और धर्म के काम करता है;
 क्योंकि मैं इन्हीं बातों से प्रसन्न रहता हूँ।

👉प्रभु यीशु उसने कैसी ज़िंदगी जी
🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱
“मेरा खाना यह है कि मैं अपने भेजनेवाले की मरज़ी पूरी करूँ और उसका काम पूरा करूँ।”
🌱यूहन्ना 4:34.🌱

यीशु ने ऊपर दिए शब्द जिस समय और हालात में कहे, उससे पता चलता है कि वह किस 
काम को अपनी ज़िंदगी में सबसे ज़्यादा अहमियत देता था। यीशु अपने चेलों के साथ 
सुबह से सामरिया के पहाड़ी इलाकों में पैदल चल रहा था और अब दोपहर हो चली थी। 
🌱यूहन्ना 4:6🌱
चेलों ने सोचा कि यीशु को भूख लगी होगी इसलिए उन्होंने उसे कुछ खाने के लिए दिया। 
🌱यूहन्ना 4:31-33🌱
 तब यीशु ने उन्हें बताया कि उसकी ज़िंदगी का मकसद क्या है। उसके लिए परमेश्वर का
 दिया काम, खाना खाने से ज़्यादा ज़रूरी था। उसने अपनी बातों और कामों से दिखाया कि
 उसके जीने का मकसद है, परमेश्वर की मरज़ी पूरी करना। इसमें क्या-क्या शामिल था?
🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱
👉 परमेश्वर के राज के बारे में प्रचार करना और सिखाना: यीशु की ज़िंदगी में सबसे 
ज़रूरी काम क्या था, इस बारे में बाइबल कहती है: “यीशु सारे गलील प्रदेश का दौरा 
करता हुआ . . . सिखाता और राज की खुशखबरी का प्रचार करता रहा।” 
🌱मत्ती 4:23🌱
 यीशु ने परमेश्वर के राज के बारे में सिर्फ प्रचार या घोषणा नहीं की, वह लोगों
 को सिखाता भी था। यानी वह उन्हें हिदायत देता, समझाता और ठोस दलीलें देकर
 यकीन दिलाता था। परमेश्वर का राज ही यीशु के संदेश का मुख्य विषय था।
🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱
प्रचार काम के दौरान यीशु ने लोगों को सिखाया कि परमेश्वर का राज क्या है और 
वह राज क्या करेगा। राज के बारे में आगे दी सच्चाइयों पर गौर कीजिए। उनके
 बाद बाइबल के हवाले भी दिए गए हैं जो बताते हैं कि यीशु ने उस विषय पर क्या कहा था।

👉 परमेश्वर का राज एक स्वर्गीय सरकार है  यीशु ही इसका राजा चुना है।
🌱मत्ती 4:17🌱
🌱यूहन्ना 18:36🌱

👉 राज के ज़रिए परमेश्वर का नाम पवित्र होगा और स्वर्ग की तरह
 धरती पर उसकी मरज़ी पूरी होगी।
🌱मत्ती 6:9, 10🌱

👉परमेश्वर के राज में पूरी धरती को फिरदौस यानी एक खूबसूरत बगीचे 
में तबदील कर दिया जाएगा। 1000 साल के राज मे 
🌱लूका 23:42, 43🌱

👉परमेश्वर का राज जल्द ही आएगा और धरती पर उसकी मरज़ी पूरी करेगा। 
🌱मत्ती 24:3, 7-12. 🌱
1000 साल के राज मे 

👉शक्‍तिशाली काम करना: यीशु खासकर एक “गुरु” के तौर पर जाना जाता था। 
🌱यूहन्ना 13:13🌱
 लेकिन, अपनी साढ़े-तीन साल की सेवा में उसने ढेरों शक्‍तिशाली काम किए।
 इन कामों से कम-से-कम दो मकसद पूरे हुए। पहला, इनसे यह साबित हुआ कि
 यीशु को वाकई परमेश्वर है
🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱
👉उसने समुद्र में उठे तूफान को शांत किया और आँधी को रोका।—मरकुस 4:39-41.

👉 उसने बीमारों को ठीक किया और अंधे, बहरे और लंगड़ों को चंगा किया।

🌱लूका 7:21, 22.🌱

👉उसने चमत्कार के ज़रिए ज़रा-से खाने को कई गुना करके हज़ारों लोगों का पेट भरा।
मत्ती 14:17-21;15:34-38.

👉कम-से-कम तीन मौकों पर उसने मरे हुओं को ज़िंदा किया।
लूका 7:11-15; 8:41-55;
 यूहन्ना 11:38-44.
👉और भी बहुत से काम है 
यूहन्ना 21:2
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