📖 Day 7
मत्ती 4:4 – वचन से जीवन
वचन:
“मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुंह से निकलता है, जीवित रहेगा।”
✨ विस्तृत व्याख्या
यह वचन उस समय का है जब प्रभु यीशु जंगल में उपवास कर रहे थे और शैतान ने उन्हें परीक्षा में डाला। जब शैतान ने कहा कि पत्थरों को रोटी बना ले, तब यीशु ने यह उत्तर दिया।
इस वचन में गहरी आत्मिक सच्चाई है।
1️⃣ “मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं”
रोटी शारीरिक जीवन का प्रतीक है।
भोजन शरीर को जीवित रखता है, परंतु केवल शरीर का जीवन ही पर्याप्त नहीं है।
मनुष्य के भीतर आत्मा भी है, और आत्मा को भी आहार चाहिए।
2️⃣ “हर एक वचन से”
परमेश्वर का वचन आत्मा का भोजन है।
जैसे शरीर को प्रतिदिन भोजन चाहिए, वैसे ही आत्मा को प्रतिदिन वचन चाहिए।
जब हम वचन पढ़ते, सुनते और मानते हैं, तब आत्मिक शक्ति मिलती है।
3️⃣ “जो परमेश्वर के मुंह से निकलता है”
वचन केवल पुस्तक के शब्द नहीं, बल्कि परमेश्वर की जीवित आवाज है।
यह मार्गदर्शन देता है, सुधारता है, सिखाता है और बल देता है।
4️⃣ “जीवित रहेगा”
सच्चा जीवन केवल सांस लेना नहीं है।
सच्चा जीवन वह है जो परमेश्वर के साथ जुड़ा हो।
वचन हमें सही मार्ग पर बनाए रखता है और परीक्षा के समय हमें गिरने से बचाता है।
✨ इस वचन का सार:
उपवास केवल भोजन छोड़ना नहीं, बल्कि वचन के द्वारा आत्मा को भरना है।
जब हम वचन पर निर्भर होते हैं, तब हम हर परीक्षा में विजय पाते हैं।
📖 वचन
1️⃣ भजन 119:105
“तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है।”
व्याख्या:
परमेश्वर का वचन हमें अंधकार में दिशा देता है।
जब जीवन में भ्रम या कठिनाई होती है, वचन सही मार्ग दिखाता है।
2️⃣ इब्रानियों 4:12
“क्योंकि परमेश्वर का वचन जीवित, और प्रभावशाली, और हर एक दोधारी तलवार से भी चोखा है…”
व्याख्या:
वचन केवल पढ़ने की चीज नहीं, बल्कि सामर्थ से भरा हुआ है।
यह हृदय को परखता है और अंदर के बदलाव लाता है।
3️⃣ यशायाह 40:8
“घास तो सूख जाती है, और फूल मुरझा जाता है; परन्तु हमारे परमेश्वर का वचन सदा अटल रहेगा।”
व्याख्या:
संसार की बातें बदलती रहती हैं,
पर परमेश्वर का वचन स्थायी और सच्चा है।
जो वचन पर खड़ा रहता है, वह स्थिर रहता है।
✨ निष्कर्ष:
मत्ती 4:4 हमें सिखाता है कि सच्चा जीवन परमेश्वर के वचन पर निर्भर है।
भोजन शरीर को बचाता है, पर वचन आत्मा को जीवित रखता है।
✨ आत्मिक जीवन में वचन का महत्व
जब प्रभु यीशु ने जंगल में यह उत्तर दिया, तब उन्होंने केवल शैतान को नहीं हराया, बल्कि हमें यह सिखाया कि हर परीक्षा में विजय का मार्ग वचन है। उपवास के समय शरीर कमजोर हो सकता है, पर यदि वचन हमारे भीतर है तो आत्मा मजबूत रहती है।
आज भी शैतान मनुष्य को भौतिक आवश्यकताओं में उलझाकर आत्मिक जीवन से दूर करना चाहता है। वह कहता है — पहले रोटी, पहले पैसा, पहले सुविधा। परंतु परमेश्वर कहता है — पहले मेरा वचन।
✨ वचन पढ़ना क्यों आवश्यक है?
बहुत से लोग बाइबल को केवल धार्मिक पुस्तक समझते हैं, पर यह जीवित परमेश्वर का संदेश है। जब हम नियमित रूप से वचन पढ़ते हैं:
- हमारा विश्वास बढ़ता है
- हमारा मन शुद्ध होता है
- गलत विचार दूर होते हैं
- निर्णय लेने में बुद्धि मिलती है
- भय के स्थान पर शांति आती है
इसलिए बिना वचन के मजबूत विश्वास संभव नहीं।
✨ उपवास और वचन का संबंध
उपवास केवल भोजन से दूर रहना नहीं है। यदि हम केवल खाना छोड़ दें पर वचन न पढ़ें, तो वह केवल शारीरिक अभ्यास रह जाता है। पर जब हम वचन पढ़ते हैं, मनन करते हैं और प्रार्थना करते हैं, तब उपवास आत्मिक सामर्थ बन जाता है।
✨ परीक्षा के समय वचन ढाल है
जब कठिन समय आता है — बीमारी, आर्थिक समस्या, निराशा, असफलता — तब मनुष्य टूट सकता है। पर जो व्यक्ति वचन पर खड़ा है, वह गिरता नहीं। क्योंकि वह परिस्थिति को नहीं, परमेश्वर के वादों को देखता है।
✨ अंतिम सार
मत्ती 4:4 केवल एक वचन नहीं, बल्कि जीवन का सिद्धांत है।
यदि हम केवल रोटी पर निर्भर रहेंगे, तो जीवन सीमित रहेगा।
पर यदि हम परमेश्वर के वचन पर निर्भर रहेंगे, तो जीवन मजबूत, स्थिर और विजयी होगा।
