📖 दूसरा आगमन क्या है?
प्रभु यीशु मसीह का दूसरा आगमन वह महान घटना है जब प्रभु यीशु महिमा, सामर्थ्य और अधिकार के साथ पुनः आएँगे। उनका पहला आगमन उद्धार देने के लिए हुआ था, परन्तु दूसरा आगमन न्याय करने, अपने राज्य की स्थापना करने और अपनी प्रतिज्ञाओं को पूरा करने के लिए होगा।
📖 प्रेरितों के काम 1:11
"हे गलील के पुरुषों, तुम क्यों आकाश की ओर देखते खड़े हो? यही यीशु, जो तुम्हारे पास से स्वर्ग पर उठा लिया गया है, जिस रीति से तुम ने उसे स्वर्ग को जाते देखा है, उसी रीति से फिर आएगा।"
यह प्रतिज्ञा स्वर्गदूतों ने उस समय दी जब प्रभु यीशु अपने शिष्यों के सामने स्वर्ग पर उठा लिए गए। इसका अर्थ स्पष्ट है कि प्रभु यीशु अवश्य लौटेंगे। उनका दूसरा आगमन केवल एक प्रतीकात्मक घटना नहीं, बल्कि वास्तविक और महिमामय होगा।
📜 पुराने नियम की भविष्यवाणियाँ
पुराने नियम के भविष्यद्वक्ताओं ने भी आने वाले राजा और उसके महिमामय राज्य की भविष्यवाणी की। यद्यपि अनेक भविष्यवाणियाँ मसीह के पहले और दूसरे दोनों आगमन की ओर संकेत करती हैं, परन्तु उनका अंतिम उद्देश्य परमेश्वर के राज्य की पूर्ण स्थापना है।
📖 दानिय्येल 7:13–14
"मैं ने रात्रि के दर्शनों में देखा, और देखो, मनुष्य के पुत्र सा एक जन आकाश के बादलों सहित आ रहा था... उसे प्रभुता, महिमा और राज्य दिया गया, ताकि सब देश, जातियाँ और भाषाओं के लोग उसकी सेवा करें। उसका राज्य अनन्त राज्य है।"
दानिय्येल की यह भविष्यवाणी प्रभु यीशु मसीह के अनन्त राज्य की ओर संकेत करती है। जब वे फिर आएँगे, तब उनका राज्य कभी समाप्त नहीं होगा।
✝️ प्रभु यीशु ने स्वयं क्या कहा?
प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों को बार-बार बताया कि वे फिर आएँगे। उन्होंने उन्हें तैयार रहने और विश्वासयोग्य बने रहने की शिक्षा दी।
📖 यूहन्ना 14:3
"यदि मैं जाकर तुम्हारे लिये स्थान तैयार करूँ, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहाँ ले जाऊँगा, कि जहाँ मैं हूँ वहाँ तुम भी रहो।"
यह केवल एक सांत्वना नहीं, बल्कि प्रभु की प्रतिज्ञा है। जो लोग उन पर विश्वास करते हैं, उनके लिए वह फिर आएँगे और उन्हें अपने साथ ले जाएँगे।
🌍 अंत समय के चिन्ह
प्रभु यीशु मसीह ने अपने शिष्यों को बताया कि उनके दूसरे आगमन से पहले संसार में अनेक चिन्ह दिखाई देंगे। ये चिन्ह विश्वासियों को जागते रहने और परमेश्वर के वचन पर स्थिर रहने की याद दिलाते हैं।
📖 मत्ती 24:6–8
"तुम लड़ाइयों और लड़ाइयों की चर्चाएँ सुनोगे... एक जाति दूसरी जाति के विरुद्ध और एक राज्य दूसरे राज्य के विरुद्ध उठ खड़ा होगा। जगह-जगह अकाल पड़ेंगे और भूकम्प होंगे। परन्तु ये सब पीड़ाओं का आरम्भ ही होगा।"
प्रभु यीशु ने स्पष्ट किया कि इन घटनाओं को देखकर लोग भयभीत न हों, क्योंकि ये अंत समय के आरम्भिक चिन्ह हैं। विश्वासियों को हर परिस्थिति में प्रभु पर भरोसा रखना चाहिए।
⚠️ बाइबल में बताए गए प्रमुख चिन्ह
✅ युद्ध और युद्धों की चर्चाएँ।✅ अकाल और भूकम्प।
✅ झूठे मसीह और झूठे भविष्यद्वक्ता।
✅ विश्वासियों पर सताव।
✅ अधर्म की वृद्धि।
✅ बहुतों का प्रेम ठण्डा पड़ जाना।
✅ सारे संसार में राज्य का सुसमाचार प्रचार किया जाना।
📖 मत्ती 24 की मुख्य शिक्षा
मत्ती अध्याय 24 में प्रभु यीशु ने अंत समय के विषय में सबसे विस्तृत शिक्षा दी। उन्होंने अपने चेलों को सावधान रहने, धोखे से बचने और धीरज बनाए रखने की शिक्षा दी।
📖 मत्ती 24:13
"जो अन्त तक धीरज धरे रहेगा, उसी का उद्धार होगा।"
यह वचन विश्वासियों को धैर्य, विश्वास और आज्ञाकारिता में बने रहने की प्रेरणा देता है। प्रभु चाहता है कि उसके लोग अंत तक विश्वासयोग्य बने रहें।
📢 सुसमाचार का प्रचार
दूसरे आगमन से पहले प्रभु की एक महत्वपूर्ण योजना यह है कि सुसमाचार संसार की सब जातियों तक पहुँचे। इसलिए प्रत्येक विश्वासी का दायित्व है कि वह प्रभु के शुभ समाचार को लोगों तक पहुँचाए।
📖 मत्ती 24:14
"राज्य का यह सुसमाचार सारे जगत में प्रचार किया जाएगा ताकि सब जातियों पर गवाही हो, तब अन्त आएगा।"
यह वचन प्रत्येक मसीही को स्मरण दिलाता है कि सुसमाचार का प्रचार परमेश्वर की योजना का महत्वपूर्ण भाग है। जब तक अवसर है, हमें लोगों तक प्रभु यीशु मसीह का संदेश पहुँचाना चाहिए।
